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Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   Delhi High Court Dismisses PIL Against Use of ‘Team India’ Name by BCCI, Calls It a Waste of Time

Team India: दिल्ली हाईकोर्ट ने टीम इंडिया के नाम पर सवाल उठाने को समय की बर्बादी बताया, याचिका खारिज की

Thu, 09 Oct 2025 02:26 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Thu, 09 Oct 2025 02:26 PM IST
सार

न्यायपीठ ने कहा, 'जहां-जहां सरकार ने खेलों में दखल दिया है, वहां आईओसी ने सख्त कार्रवाई की है।' कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नसीहत देते हुए कहा कि वे बेहतर जनहित याचिकाएं दाखिल करें और इस याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।

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Delhi High Court Dismisses PIL Against Use of ‘Team India’ Name by BCCI, Calls It a Waste of Time
भारतीय टीम - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को 'टीम इंडिया' या 'भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम' कहकर संबोधित करना गलत है क्योंकि BCCI एक निजी संस्था है, सरकारी निकाय नहीं।
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PIL में कहा गया: BCCI निजी संस्था, फिर कैसे कहलाती है 'टीम इंडिया'?
यह याचिका वकील रीपक कंसल द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने कहा कि चूंकि बीसीसीआई एक निजी सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है और इसे राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) का दर्जा भी नहीं मिला है, इसलिए इसे 'राष्ट्रीय टीम' कहना जनता को भ्रमित करता है। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि यह मामला समय की बर्बादी है।
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मुख्य न्यायाधीश बोले- क्या ये टीम भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करती?
कोर्ट ने तीखे शब्दों में कहा, 'क्या आप कहना चाहते हैं कि जो टीम भारत का प्रतिनिधित्व कर रही है, वह भारत की टीम नहीं है? अगर दूरदर्शन या कोई और संस्था उसे ‘टीम इंडिया’ कहती है, तो क्या वह टीम भारत की नहीं है?' न्यायालय ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल संगठनों जैसे आईओसी (इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी) के नियमों के मुताबिक, किसी भी सरकार का सीधा हस्तक्षेप खेल संचालन में स्वीकार्य नहीं है।
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कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा- बेहतर जनहित याचिकाएं दाखिल करें
न्यायपीठ ने कहा, 'जहां-जहां सरकार ने खेलों में दखल दिया है, वहां आईओसी ने सख्त कार्रवाई की है।' कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नसीहत देते हुए कहा कि वे बेहतर जनहित याचिकाएं दाखिल करें और इस याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।

'संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं माना जा सकता'
कंसल की याचिका में तर्क दिया गया था कि बीसीसीआई, तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1975 के तहत पंजीकृत एक निजी संस्था है और इसे संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' नहीं माना जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया कि प्रसार भारती, जो दूरदर्शन और आकाशवाणी का संचालन करती है, बीसीसीआई की टीम को टीम इंडिया कहकर राष्ट्रीय प्रतीकों और नामों का अनुचित प्रयोग कर रही है।

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि यह कार्य राष्ट्रीय प्रतीक और नाम (अनुचित उपयोग की रोकथाम) अधिनियम, 1950 और भारतीय ध्वज संहिता, 2002 का उल्लंघन है। हालांकि, अदालत ने माना कि यह तर्क व्यावहारिक नहीं है और भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली क्रिकेट टीम को टीम इंडिया कहना पूरी तरह स्वाभाविक और उचित है।
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