सहवाग के 'बुरे दिन', अपने घर में भी सम्मान को मोहताज 'नजफगढ़ के सुल्तान'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बुरे दिन खत्म होने का नाम नहीं ले रहे। लंबे समय से टीम इंडिया में वापसी की राह देखते-देखते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास भी ले लिया लेकिन अभी भी उनके साथ क्रिकेट अधिकारी सही सम्मान करते नहीं दिख रहे हैं।
बीसीसीआई ने कभी टीम इंडिया की जीत के ट्रंप कार्ड रहे सहवाग की विदाई के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मैच का प्रबंध तक नहीं किया और लंबे इंतजार के बाद बिना खेले ही क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। अब बीसीसीआई की तरह सहवाग का घरेलू क्रिकेट बोर्ड भी उनके साथ सही रवैया अपनाता नहीं दिख रहा है।
कुछ दिन पहले तक यह खबर आ रही थी कि दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के अंतिम टेस्ट मैच के दौरान सम्मानित करेगा। लेकिन अब जब टेस्ट मैच शुरू होने में सिर्फ 2 दिन ही शेष है तो डीडीसीए इस महान क्रिकेटर को सम्मानित करने में मूड में नहीं दिख रहे हैं। सहवाग एक दशक से भी ज्यादा समय तक टीम इंडिया के नियमित सदस्य रहे और टीम के लिए ढेरों रिकॉर्ड भी बनाए हैं।
सम्मानित करने को लेकर DDCA ने गेंद BCCI के पाले में डाली
टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के सम्मान समारोह मामले पर दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) ने गेंद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पाले में डाल दी है।
डीडीसीए ने यह कहकर बात टालने की कोशिश की है कि बीसीसीआई ने इस बारे में उनसे कुछ नहीं कहा है। इससे पहले, सहवाग को भी उसी तरह सम्मानित करने का फैसला हुआ था जिस तरह से मुंबई में जहीर खान को किया गया था। सहवाग हरियाणा की ओर से विदर्भ के खिलाफ मंगलवार से शुरू हो रहे रणजी ट्रॉफी मैच (अगर खेलते तो यह उनके करियर का अंतिम प्रथम श्रेणी मैच होता) में नहीं खेल रहे हैं।
हालांकि डीडीसीए के कार्यकारी अध्यक्ष चेतन चौहान और अदालत द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक मुकुल मुद्गल ने इस मामले पर कुछ नहीं कहा। पहले वादे के अनुसार डीडीसीए ने अब तक राज्य के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर के नाम पर कोटला के किसी गेट या स्टैंड का नाम नहीं रखा है और फिलहाल उन्हें सम्मानित करने के आसार भी नजर नहीं आ रहे हैं।
चौहान ने कहा, "हमें इस मामले में बीसीसीआई से कोई सूचना नहीं मिली है।" जस्टिस मुद्गल ने कहा कि उन्हें यह सूचना मिली है कि दिल्ली प्रशासन 1983 और 2011 की विश्व विजेता टीमों का सम्मान करना चाहती है। लेकिन मैं नहीं जानता कि इसके लिए क्या औपचारिकताएं होंगी।