अंडरआर्म गेंद विवाद: 35 साल पहले भी ठीक यही हुआ था
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35 साल और 1 दिन पहले 1 फरवरी 1981 को अंतरराष्ट्रीय मैच में एक विवादित घटना ने क्रिकेट के नियम बदल दिए। एक गेंद से उपजे विवाद के दाग अभी तक ऑस्ट्रेलिया पर वैसे ही हैं जैसा पहले थे।
उस वक्त अंडरआर्म गेंद पर आईसीसी में कोई नियम नहीं थे। इसका ऑस्ट्रेलिया ने फायदा उठाया और मैच के साथ सीरीज पर कब्जा किया। वह मैच न ही चैपल की यादगार बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है और न ही न्यूजीलैंड के संघर्ष को। जाना जाता है तो सिर्फ मैच की वह आखिरी गेंद।
उस मैच में सिर्फ एक नहीं दो विवाद हुए थे
1 फरवरी 1981 बेंसन एंड हेजेस वर्ल्ड सीरीज कप में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड आमने-सामने थे। सीरीज में एक-एक मैच की बराबरी के बाद आखिरी मैच रोमांचक और बेहद कड़ा होने वाला था।
मैच में सिर्फ एक नहीं दो विवाद हुए। दरअसल, पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ग्रैग चैपल फिफ्टी लगा चुके थे, अचानक ही उन्हें जीवनदान मिला। कैच आउट की अपील को अंपायर ने नॉटआउट दिया लेकिन रिव्यू में वह आउट साफ थे।
कीवी टीम उस गलत फैसले से पहले ही नाराज थी तो बाकी कसर न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी के दौरान फेंकी गई उस आखिरी गेंद ने पूरी कर ली। कप्तान चैपल ने आखिरी ओवर अपने भाई ट्रेवर चैपल को दिया था। आखिरी गेंद पर कीवी को छक्के की जरूरत थी।
चैपल के कहने पर ट्रेवर ने अंडरआर्म गेंद फेंकी। हालांकि चैपल के अनुसार वह इस बारे में अंपायर से पहले ही बात कर चुके थे। अंडरऑर्म गेंद पर कीवी बल्लेबाज ने डिफेंस किया और बल्ला पटखते हुए वहां से निकल गए।
मंगलवार को वर्ल्ड कप में भी हुई यही घटना
टीम इंडिया के कोच भी रह चुके ग्रैग चैपल इस घटना के बारे में याद करते है और कहते हैं कि मैच के कुछ समय बाद एक छोटी बच्ची ने उनकी बांह पकड़ी और इसे धोखाधड़ी कहा था।
सिर्फ यही नहीं इस संबंध में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की ओर से भी अपने-अपने बयान सामने आए थे। दोनों ने ऑस्ट्रेलियाई कप्तान के कदम की कड़ी निंदा की थी।
मंगलवार को भी यही घटना हुई, अंडर 19 वर्ल्ड कप के एक मैच में जिम्बाब्वे को 7 गेंद पर 4 रन चाहिए थे और एक विकेट हाथ में था। कैरेबियाई स्पिनर शामार स्प्रिंगर ने अंडरआर्म गेंद के लिए रनअप लेकर नॉट स्ट्राइकर एंड पर खड़े बल्लेबाज को रनआउट कर 35 साल पुराना काला इतिहास दोहरा दिया।