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जुनून और जज्बे से लबरेज थे चेतन चौहान, पर रह गई अंतरराष्ट्रीय शतक न बना पाने की कसक

Mon, 17 Aug 2020 02:30 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: मुकेश कुमार झा Updated Mon, 17 Aug 2020 02:30 AM IST
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Chetan Chauhan: Guts and grit and that elusive hundred
चेतन चौहान

टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का रविवार को 73 साल की उम्र में निधन हो गया। कोरोना से संक्रमित चौहान का निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ। वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती थे और वहीं उन्होंने अंतिम सांस ली। चेतन चौहान अपने जमाने के प्रतिष्ठित बल्लेबाजों में शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उम्दा पारियां खेलने के बावजूद हालांकि वह कभी शतक नहीं बना पाए। मगर उन्हें इसका मलाल कभी नहीं रहा।


 

Chetan Chauhan: Guts and grit and that elusive hundred
चेतन चौहान बैटिगं करते हुए - फोटो : अमर उजाला

चौहान का सबसे मजबूत पक्ष संभवत: यह था कि उन्हें पता था कि उनकी कमजोरियां क्या हैं और उनका मानना रहा कि इससे उन्हें प्रशासक और फिर राजनेता के रूप में मदद मिली। फिरोजशाह कोटला मैदान पर दिल्ली का रणजी ट्रॉफी मैच देखने के दौरान एक बार उनसे यह पूछा गया कि नौ बार 80 और 97 रन के बीच आउट होकर उन्हें कैसा लगा तो वह मुस्कुरा दिए।

Chetan Chauhan: Guts and grit and that elusive hundred
चेतन चौहान

उन्होंने गर्व के साथ कहा, 'यह संभवत: किस्मत थी लेकिन मैंने देखा है कि लोग शतक को लेकर मुझसे अधिक निराश हुए हैं। मुझे कोई मलाल नहीं है। मैंने भारत के लिए 40 टेस्ट खेले और सुनील गावस्कर का सलामी जोड़दार रहा।' बैकफुट के मजबूत खिलाड़ी चौहान बाउंसर का अच्छी तरह सामना करते थे। उनके करियर का सबसे शानदार चरण 1977 से 1981 के बीच रहा जब वह शीर्ष क्रम में गावस्कर के साथ लगातार खेलते थे।

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Chetan Chauhan: Guts and grit and that elusive hundred
चेतन चौहान

भारत के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने 40 टेस्ट मैचों में 2084 रन बनाए और उनका सार्वाधिक स्कोर 97 रहा। इसके अलावा उन्होंने सात वन-डे अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले थे। करियर में बिना शतक लगाए दो हजार रन बनाने वाले वह दुनिया के पहले क्रिकेटर थे। राजनिति और संसद में सांसद के रूप में बिताए समय ने चौहान को धैर्यवान बनाया। फिरोजशाह कोटला को हालांकि हमेशा इस अनुभवी प्रशासक की कमी खलेगी।

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