टीम इंडिया के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की सियासी पारी क्रिकेट से लंबी रही। सलामी बल्लेबाज के रूप में टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के लिए लगभग 12 साल विभिन्न मैदानों पर खेले। क्रिकेट का मैदान छोड़ने के बाद वह सियासत की ओर बढ़े। करीब 29 साल की उनकी सियासी पारी पर रविवार को अचानक विराम लग गया।
क्रिकेट से लंबी रही चेतन चौहान की सियासी पारी, यहां देखें उनके दोनों आंकड़े
क्रिकेट की पिच से सियासी पिच का रुख करने पर चेतन चौहान को भाजपा ने वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा संसदीय क्षेत्र में उतारा था। इसके बाद चेतन चौहान ने सियासत में पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले ही चुनाव में जीत दर्ज की। वह अमरोहा की सियासत में एक मंझे हुए बल्लेबाज की तरह जम गए। उन्होंने भाजपा के टिकट पर अमरोहा से लगातार पांच लोकसभा चुनाव लड़े। हालांकि उन्हें जीत सिर्फ दो बार मिली। तीन बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इन उतार-चढ़ाव के बीच वह वर्ष 1991 से लेकर 2020 तक 29 साल अमरोहा की राजनीति में सक्रिय रहे।
वर्ष 2017 में अपना पारंपरिक सियासी रुख बदलते हुए विधानसभा चुनाव में हाथ आजमाया। अमरोहा जिले की नौगांवा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। यूपी सरकार में पहले खेल मंत्री रहे, जबकि बाद में होमगार्ड मंत्री का दायित्व संभाल लिया था।
इससे पहले सितंबर 1969 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया के लिए क्रिकेट की शुरुआत करने वाले चेतन चौहान ने 13 अप्रैल 1981 न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट खेलने के बाद क्रिकेट का मैदान छोड़ दिया था। लगभग 12 साल की क्रिकेट की पारी में उनका लंबे समय टीम इंडिया का सलामी बल्लेबाज रहना और 90 रनों का आंकड़ा कई दफा पार करके भी शतक से चूक जाना लोग भुलाए नहीं भूलते।
- पहला टेस्ट मैच: 25 सितंबर 1969 न्यूजीलैंड के खिलाफ
- आखिरी टेस्ट: 13 अप्रैल 1981 न्यूजीलैंड के खिलाफ
- पहला वनडे: 01 अक्तूबर 1978 पाकिस्तान के खिलाफ
- आखिरी वनडे: 15 फरवरी 1981 न्यूजीलैंड के खिलाफ
सियासी पारी
- वर्ष 1991 में जनता दल के हरगोविंद को हराकर अमरोहा के सांसद बने
- वर्ष 1996 में सपा के प्रताप सिंह से चुनाव हार गए दूसरे नंबर रहे
- वर्ष 1998 में बसपा के आले हसन को हराकर दूसरी बार सांसद बने
- वर्ष 1999 में बसपा के राशिद अल्वी से चुनाव हार गए दूसरे नंबर रहे
- वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में चेतन चौहान चौथे नंबर पर रहे
- वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा-रालोद गठबंधन रहा, सीट रालोद के खाते में रही
- वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला
- वर्ष 2017 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, नौगांवा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर कैबिनेट मंत्री बने