कप्तान धोनी की चिंता रंग लाई, बीसीसीआई में उठा मुद्दा
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आस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की ओर से जताई गई चिंता रंग लेती दिखाई दे रही है। बीसीसीआई के सचिव अनुराग ठाकुर ने संकेत दिए हैं कि निकट भविष्य में भारत के साथ होने वाली द्वीपक्षीय श्रृंखलाओं में डीआरएस को अपनाए जाने पर चर्चा हो सकती है।
यही नहीं आईसीसी ने भी संकेत दिए हैं कि डीआरएस के मुद्दे पर उसकी ओर से बीसीसीआई की शंकाओं को दूर करने की पूरी कोशिश की जा रही है।
पर्थ में पहले वन डे के दौरान जार्ज बैली को अंपायर रिचर्ड कैटलब्रो की ओर से संदेह का लाभ मिलने के बाद धोनी ने डीआरएस नहीं होने पर उनके खिलाफ लगातार आ रहे अंपायरों के फैसलों पर खुलकर तो नहीं लेकिन इशारों में जरूर चिंता जताई थी।
बोर्ड को भी इस बात का अहसास होने लग पड़ा है कि भारतीय टीम को डीआरएस नहीं होने का फायदा कम और अब नुकसान ज्यादा हो रहा है। फिर डीआरएस के विरोध में एक समय खडे़ सभी दिग्गज क्रिकेटर सन्यास ले चुके हैं। डीआरएस को नहीं अपनाने का एक बड़ा कारण ये क्रिकेटर भी थे।
डीआरएस पर हो सकती हैं कुछ शर्ते
बीसीसीआई बोर्ड के सचिव अनुराग ठाकुर ने सोमवार को कहा भी कि भारतीय टीम जब आस्ट्रेलियाई दौरे से वापस लौटेगी तो डीआरएस के मुद्दे पर बात की जाएगी। ठाकुर ने यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय में अगर एलबीडब्लू को छोड़ दें तो दूसरे फैसलों पर डीआरएस लेने में बुराई नहीं है।
बोर्ड की चिंता एलबीडब्लू के फैसलों पर थी, लेकिन दूसरे फैसलों पर डीआरएस के बारे में चर्चा होगी। वहीं डीआरएस को लेकर बोर्ड के रुख की आईसीसी को भी चिंता है। आईसीसी के सीईओ डेव रिचर्डसन स्वीकार करते हैं कि डीआरएस पूर्ण रूप से सही नहीं है। यही कारण है कि आईसीसी एक नामी गिरामी तकनीकि इंस्टीट्यूट के जरिए डीआरएस का रीव्यू करा रही है।
डीआरएस पर इस रिपोर्ट को टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन अनिल कुंबले को भेजा जाएगा। इसके बाद ही एक ऐसे डीआरएस को पेश किया जाएगा जो सभी को मान्य होगा।
आईसीसी ने डीआरएस को रीव्यू के लिए अमेरिका के मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को भेजा है। आईसीसी मान रहा है कि इसके बाद वह बीसीसीआई के संदेह को जरूर दूर करने में सफल रहेगा।