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Anshuman Biography: अंशुमन गायकवाड़ की जीवनी का विमोचन, सचिन बोले- मेरा सबसे बेहतरीन समय उनकी कोचिंग में रहा
Sat, 20 May 2023 11:35 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sat, 20 May 2023 11:35 PM IST
सार
तेंदुलकर ने शुक्रवार को गायकवाड़ की जीवनी 'गट्स एमिडस्ट ब्लडबाथ' के विमोचन के अवसर पर कहा, मैं वास्तव में भाग्यशाली था कि जब वह हमारे कोच थे तो मुझे उनके साथ समय बिताने का मौका मिला।
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सचिन तेंदुलकर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने कहा कि जब अंशुमन गायकवाड़ भारत के कोच थे तो वे उनके क्रिकेट कॅरिअर के कुछ अच्छे वर्षों में से एक थे और वह ऐसे व्यक्ति हैं जिन पर आप हमेशा भरोसा कर सकते हैं। पूर्व सलामी बल्लेबाज गायकवाड़ 1997 से 1999 तक भारत के कोच रहे थे। इस दौरान तेंदुलकर ने कुछ शानदार पारियां खेली थी जिनमें शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए गए दो शतक भी शामिल हैं।
तेंदुलकर ने शुक्रवार को गायकवाड़ की जीवनी 'गट्स एमिडस्ट ब्लडबाथ' के विमोचन के अवसर पर कहा, मैं वास्तव में भाग्यशाली था कि जब वह हमारे कोच थे तो मुझे उनके साथ समय बिताने का मौका मिला। संभवत: जब वह कोच से तो वे मेरे कॅरिअर के बेहतर वर्ष थे। हम मेरी बल्लेबाजी और मुझे कैसा रवैया अपनाना चाहिए इसको लेकर चर्चा किया करते थे। उन्होंने कहा,‘ प्रत्येक के कॅरिअर में उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन वह हमेशा आपकी मदद के लिए मौजूद रहते थे। वह ईमानदार और बेहद पारदर्शी थे। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन पर आप भरोसा कर सकते थे। उनके साथ जो भी चर्चा होती थी वह हमेशा गोपनीय रहती थी। यह किसी कोच का महत्वपूर्ण गुण होता है। हम वास्तव में एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं।’
जब सिर पर गेंद लगने के बाद अंशुमन ने दिखाई दिलेरी
दिग्गज सुनील गावस्कर ने 1976 में जमैका टेस्ट के बारे में बताया जब गायकवाड़ के सिर पर चोट लगी थी। गावस्कर ने कहा, अंशु के सिर पर चोट लगी थी लेकिन उसने अविश्वसनीय रूप से दिलेरी दिखाई। हमने पिछले टेस्ट 400 से अधिक रन का पीछा करते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। इस आखिरी टेस्ट से पहले शृंखला 1-1 की बराबरी पर थी। गावस्कर ने कहा, इस शृंखला से पहले वेस्टइंडीज की टीम ऑस्ट्रेलिया से 1-5 से शृंखला हार गई थी और क्लाइव लॉयड अपनी कप्तानी बचाने के लिए बेताब थे। वेस्टइंडीज ने टॉस जीता और हमें पहले बल्लेबाजी करने के लिए कहा। पहले दिन लंच तक हम क्रीज पर थे। लंच के बाद माइकल होल्डिंग, वेन डेनियल और हर गेंदबाज बाउंसर या बीमर डालने लगा। अचानक एक गेंद गायकवाड़ के सिर में लगी। हमें उन्हें एंबुलेंस में अस्पताल ले जाना पड़ा। अंशु ने जो साहस दिखाया उसके दम पर वह हर बार वेस्टइंडीज के खिलाफ शृंखला के लिए टीम में वापसी कर लेते थे।
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तेंदुलकर ने शुक्रवार को गायकवाड़ की जीवनी 'गट्स एमिडस्ट ब्लडबाथ' के विमोचन के अवसर पर कहा, मैं वास्तव में भाग्यशाली था कि जब वह हमारे कोच थे तो मुझे उनके साथ समय बिताने का मौका मिला। संभवत: जब वह कोच से तो वे मेरे कॅरिअर के बेहतर वर्ष थे। हम मेरी बल्लेबाजी और मुझे कैसा रवैया अपनाना चाहिए इसको लेकर चर्चा किया करते थे। उन्होंने कहा,‘ प्रत्येक के कॅरिअर में उतार-चढ़ाव आते हैं लेकिन वह हमेशा आपकी मदद के लिए मौजूद रहते थे। वह ईमानदार और बेहद पारदर्शी थे। वह ऐसे व्यक्ति थे जिन पर आप भरोसा कर सकते थे। उनके साथ जो भी चर्चा होती थी वह हमेशा गोपनीय रहती थी। यह किसी कोच का महत्वपूर्ण गुण होता है। हम वास्तव में एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं।’
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जब सिर पर गेंद लगने के बाद अंशुमन ने दिखाई दिलेरी
दिग्गज सुनील गावस्कर ने 1976 में जमैका टेस्ट के बारे में बताया जब गायकवाड़ के सिर पर चोट लगी थी। गावस्कर ने कहा, अंशु के सिर पर चोट लगी थी लेकिन उसने अविश्वसनीय रूप से दिलेरी दिखाई। हमने पिछले टेस्ट 400 से अधिक रन का पीछा करते हुए रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। इस आखिरी टेस्ट से पहले शृंखला 1-1 की बराबरी पर थी। गावस्कर ने कहा, इस शृंखला से पहले वेस्टइंडीज की टीम ऑस्ट्रेलिया से 1-5 से शृंखला हार गई थी और क्लाइव लॉयड अपनी कप्तानी बचाने के लिए बेताब थे। वेस्टइंडीज ने टॉस जीता और हमें पहले बल्लेबाजी करने के लिए कहा। पहले दिन लंच तक हम क्रीज पर थे। लंच के बाद माइकल होल्डिंग, वेन डेनियल और हर गेंदबाज बाउंसर या बीमर डालने लगा। अचानक एक गेंद गायकवाड़ के सिर में लगी। हमें उन्हें एंबुलेंस में अस्पताल ले जाना पड़ा। अंशु ने जो साहस दिखाया उसके दम पर वह हर बार वेस्टइंडीज के खिलाफ शृंखला के लिए टीम में वापसी कर लेते थे।
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- अंशुमन गायकवाड़ ने एक खिलाड़ी, एक कोच, एक प्रशासक और एक चयनकर्ता के रूप में भारतीय क्रिकेट को सब कुछ दिया है।-सुनील गावस्कर, पूर्व साथी क्रिकेटर
- ‘वह तब कोच थे जब पहली बार मैं क्रीज पर दौड़ने की समस्या से रूबरू हुआ। मैं अपने फॉलो-थ्रू पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था लेकिन अंशु भाई ने इसे बहुत अच्छी तरह से संभाला। अगर वह मेरी इस कमजोरी को दूर करने में मदद नहीं करते तो मेरा टीम में चयन नहीं हो पाता।-जहीर खान, पूर्व तेज गेंदबाज