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Amar Ujala Samwad: 'सीधा शाहरुख-प्रीति की टीम में जाना है', सुरेश रैना ने युवा खिलाड़ियों को क्या दी सलाह?

Fri, 18 Apr 2025 06:46 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Fri, 18 Apr 2025 06:46 PM IST
सार

Suresh Raina Amar Ujala Samwad 2025: भारतीय टीम के पूर्व ऑलराउंडर सुरेश रैना अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने अपने करियर के संघर्ष और शुरुआती दिनों को लेकर बात की। रैना ने युवा खिलाड़ियों से अपने राज्य के लिए खेलने की भी अपील की। 

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Amar Ujala Samwad 2025 Former Indian All rounder Suresh Raina live in Samwad 2025 news and updates
सुरेश रैना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मिस्टर आईपीएल के नाम प्रसिद्ध पूर्व भारतीय ऑलराउंडर सुरेश रैना लखनऊ में अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे। अमर उजाला संवाद के वैचारिक संवाद कार्यक्रम में देश की जानी मानी शख्सियतों, नीति नियंताओं, विचारकों और विशेषज्ञों के विचार जानने का मौका मिला और इसमें रैना ने भी शिरकत की। इस दौरान इस पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने अपने करियर को लेकर कई किस्से सुनाए और साथ ही युवा खिलाड़ियों को सलाह भी दी। आइए जानते हैं सुरेश रैना के साथ बातचीत के प्रमुख अंश:
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सवालः रात भर घर नहीं पहुंचे थे? क्या किस्सा था वो?

रैनाः
अमर उजाला और लखनऊ में बहुत साल रहे हैं। बहुत प्यार मिला है। तालीम सीखी है लखनऊ यूनिवर्सिटी से। वो किस्सा बहुत पुराना था। दो दिन का मैच था। स्कूल में छुट्टी होती थी। ऐसा बच्चों को नहीं करना चाहिए, क्योंकि पापा ने बहुत पिटाई की थी मेरी। तब फोन नहीं होता था। सारे मैच हो चुके थे, सिर्फ फाइनल बचा था। जब मैं ट्रॉफी लेकर घर पहुंचा तो पापा ने पूछा कि बता कर क्यों नहीं जाता। तो मैंने कहा कि फोन किया था फोन किसी ने नहीं उठाया। वो जुनून अलग था, उत्तर प्रदेश के लिए खेलने का, देश के लिए खेलने का तो मैंने सोचा कुछ तो अलग करना पड़ेगा देश का नाम रोशन करना है तो।
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सवालः मम्मी ने बेलन से पीटा था, उस किस्से के बारे में कुछ बताएंगे?

रैनाः नहीं नहीं मां थपकी से मारती थी।
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सवालः ये जो सपना था भारत के लिए खेलने का, ये सबसे पहले किसने देखा? युवा सुरेश रैना ने देखा, पिता ने देखा या मां ने देखा? 

रैनाः मेरे परिवार ने मेरा बहुत समर्थन किया। मैं गाजियाबाद कभी नहीं आया था। मैं मुरादनगर से मेरठ गया। मेरठ से ही मेरा चयन हुआ था। मुरादनगर से फिर मैं लखनऊ गया जहां चार साल रहा। मेरा जीवन बहुत कठिन था। मैं सबसे  छोटा था घर में। मेरे परिवार ने कहा कि खेलना है तो खेलो लेकिन पढ़ाई बहुत जरूरी है। मैंने लखनऊ से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। फिर लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। परिवार ने कहा कि पढ़ाई करोगे तो किसी भी फील्ड में आगे बढ़ोगे। फिस होस्टल आए। लखनऊ से अंडर 16 खेलने को मिला, फिर अंडर 14 खेलने को मिला। तो यह सफर चलता रहा। मेरे यहां पर बहुत कोच हैं और बहुत ने मेरे लिए दुआ की। लेकिन सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया का है। मुझे याद है 1998 में 10 हजार रुपये मिलते थे स्कॉलरशिप और होस्टल की फीस 10 हजार रुपये थी साल की। मैं अपने परिवार पर कभी निर्भर नहीं रहा। लेकिन मुझे जो अनुभव मिला, देश के लिए खेलकर, उत्तर प्रदेश के लिए खेलकर और गाजियाबाद के लिए खेलकर। मुझे लगता है कि सपना देखना जरूरी होता है, लेकिन परिवार का समर्थन मिलना भी बहुत जरूरी है आगे बढ़ने के लिए।

सवालः लखनऊ में आप होस्टल में रहे। यहां से जुड़ी सबसे खूबसूरत याद कौन सी थी? आप होस्टल छोड़कर भी चले गए थे। वह क्या वजह थी?

रैनाः तब बहुत रैगिंग होता थी। किसी भी इंस्टीट्यूट में किसी भी स्पोर्ट्स के कल्चर में रैगिंग नहीं होनी चाहिए। वो मुश्किल था, क्योंकि कभी रहे नहीं परिवार से दूर, मम्मी पापा से दूर तो मेरे लिए मुश्किल था। तो जब मैं घर गया तो पापा ने कहा कि आपने ही कहा था कि आपका सपना है भारत के लिए खेलना, लेकिन अब आप वापस आ गए। तो मुझे थोड़ा निराशा हुई कि परिवार ने मुझे इतना समर्थन दिया और फिर मैंने वापसी की। जैसे लक्ष्य मूवी में ऋतिक रोशन ने वापसी की, मैंने भी ठीक वैसी ही वापसी की।

सवालः ये कब लगा कि भारत के लिए खेलना अब दूर नहीं है? वो कौन सी पारियां थीं?

रैनाः जैसा कि मैंने कहा एयर इंडिया से मैं कंगाली खेला, बॉम्बे में एक ट्रॉफी मैच खेला। मैंने तब बहुत कुछ सीखा जब एयर इंडिया से मुझे स्कॉलरशिप मिली थी। मेरा सबसे पहला सपना गाजियाबाद के लिए खेलना था। फिर यूपी का प्रतिनिधित्व करना। मुझे याद है 2005-06 में हमने केडी बाबू सिंह स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी जीती थी। तब टीम में पीयूष चावला, प्रवीण कुमार, आरपी सिंह थे। बहुत बड़े-बड़े नाम थे उस टाइम पर। सच कहूं तो मुझे पता नहीं था कि मैं देश के लिए खेलूंगा या नहीं खेलूंगा। मुझे पहले उत्तर प्रदेश अंडर 14 टीम की कप्तानी मिली, फिर अंडर 16 की और फिर अंडर-17 और अंडर 19 की कप्तानी मिली। मैं एक डिसिप्लिन रोड पर था। अच्छा फोकस करना, ऊपर वाले का आशीर्वाद, मां पापा की दुआएं तो अलग जुनून था खेलने का। मुझे लगता है कि किसी को अगर क्रिकेटर बनना है तो कड़ी मेहनत से ज्यादा मां पापा का आशीर्वाद होना ज्यादा जरूरी है।

सवालः आपके एक ग्रेजुशन मैच के अगले दिन आपकी परीक्षा थी। आप मुंबई में थे। आप उस मैच के बारे में बताएंगे कि कैसे आपने इसे मैनेज किया, क्योंकि परीक्षा लखनऊ में थी?

रैनाः मैंने 85 रन बनाए थे। शाम को मेरी फ्लाइट थी। तब भी एयर इंडिया ने मेरी मदद की थी। मैं उस टाइम यूपी के लिए खेल रहा था। मैंने पापा को बोला था कि मैं परीक्षा जरूर दूंगा। आए फिर रात में पढ़ाई की और सुबह परीक्षा दी। लेकिन हमने बॉम्बे में बॉम्बे को हराया था तो उसकी अलग फीलिंग थी। जब यूपी की टीम बाहर जाती है, जैसे रणजी ट्रॉफी जीते थे तो बॉम्बे को बॉम्बे में हराया था। फिर बड़ौदा पंजाब सबको हराया। रणजी हमारा एक ग्रासरूट टूर्नामेंट है और यह बहुत जरूरी है किसी भी खिलाड़ी को खेलने के लिए। 2005-06 में हम रणजी जीते। अब आईपीएल की टीम लखनऊ की है, वो बहुत अच्छा कर रही है। जीशान दिखेंगे, विपराज दिखेंगे। भुवनेश्वर सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले में से हैं। रिंकू सिंह अच्छी लय में हैं। कुलदीप यादव अच्छा खेल रहे हैं। तो यूपी से बहुत बड़े बड़े नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हैं। तो मैं कहना चाहूंगा कि पहले अपने स्कूल की टीम के लिए खेलो मेहनत करो क्योंकि कोई शॉर्टकट नहीं है। चयन हुआ तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन थोड़ा सा कोच के साथ समय बिताओ क्योंकि वहीं से रास्ता मिलेगा। सीधा उनको शाहरुख खान की टीम में जाना है, प्रीति जिंटा की टीम में जाना है, लेकिन उससे पहले उत्तर प्रदेश के लिए खेलें।

सवालः इंडिया के लिए कॉल और पहले मैच में जीरो पर आउट, इस पर कुछ प्रकाश डालेंगे? भारत के लिए जब आप खेलने जा रहे हों, एक डर हो और आप जाकर शून्य पर आउट हो जाएं। वो किस्सा क्या है?

रैनाः पहला मैच श्रीलंका के खिलाफ था। राहुल द्रविड़ हमारे कप्तान थे। धोनी भाई, मैं और इरफान पठान बैठे हुए थे। जब मैं शून्य पर आउट हुआ तो काफी निराश था। सोच रहा था कि पहला मौका मिला, लेकिन अब दूसरा मौका मिलेगा या नहीं मिलेगा। तो राहुल भाई आए और कहा- मैच था ये भाई। आउट ही हो गया। कल फिर ये मैच होगा। फील्डिंग में कुछ करके दिखाओ, गेंदबाजी में कुछ करके दिखाओ। उस समय राहुल भाई, सचिन पाजी, वीरेंद्र सहवाग ने इतना समर्थन किया एक मेरे जैसे युवा का, वो कहते थे जाओ बिंदास खेलो, हम आपके साथ खड़े हैं। तो ऐसा लगता था कि ये टीम नहीं हमारा परिवार है। राहुल भाई मेरे आदर्श हैं। फिर 2005, 2006, 2007, 2008 वो डगर चलती रही। राहुल भाई ने बहुत समर्थन किया, वो काफी अनुशासित थे और टीम की दीवार थे। तो राहुल भाई एक अलग ही किस्म के इंसान हैं। मुझे 2005 में वनडे कैप भी उनसे मिली, 2010 में टेस्ट कैप भी उनसे मिली। उनके साथ बहुत पार्टनरशिप की, बहुत मैच खेले। 2005-06 में उनका बेटा समित, तब बहुत छोटा था तो वो बहुत रो रहा था। राहुल भाई को अगले दिन जमैका में बल्लेबाजी करनी थी। तो वो पहले बेटे के साथ रात तीन बजे तक खेले और फिर उसे सुलाके फिर आराम किया। अगले दिन दोनों पारियों में उन्होंने 60-70 रन बनाए। वो पिच बल्लेबाजी के लिए बहुत मुश्किल थी। भारत के लिए खेलना एक जज्बा होता है और एक फाइटिंग स्पिरिट होती है तो ये हमने राहुल भाई से सीखी।

सवालः आपका जो कश्मीरी कनेक्शन है उस बारे में बताइए। क्या आप अभी भी कश्मीर जाते हैं?

रैनाः 
नहीं उधर अब इजाजत नहीं है, क्योंकि आंतकवाद प्रभावित क्षेत्र रहा है। मेरे पापा सेना में थे, मेरी मां हिमाचल से हैं, लेकिन मेरी पैदाइश उत्तर प्रदेश से है। कश्मीर काफी करीब है हमारे दिल के। जो भी हमारे साथ पहले हुआ था, आपने देखा होगा कश्मीरी पंडित कुछ बुरे दौर से गुजरे। जब अपना गांव देखते हैं तो काफी भावुक हो जाते हैं क्योंकि वह दिल के करीब है। जब भी समय मिलता है तो अब हम परिवार के साथ पत्नी के साथ जाते हैं, बहुत खूबसूरत है हमारा कश्मीर।

सवालः सचिन तेंदुलकर से जब पहली बार मुलाकात हुई तो कैसा अनुभव रहा था? ड्रेसिंग रूम वाला वो किस्सा क्या था, जब वह मजाक-मजाक में आपसे नाराज हो गए थे, क्योंकि आपने अपना पसंदीदा खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को बताया था?

रैनाः 1998-1999 में मैंने पहली बार सचिन तेंदुलकर को देखा था। वो बीकेसी-सीसीआई स्टेडियम में अभ्यास के लिए आए थे। वहां जब मैंने 200 रन बनाए थे तो मैंने अतुल भाई से बोला कि पाजी से मिलना है। तब मैंने सोचा था कि पाजी क्रिकेट के भगवान हैं, लेकिन अगर वो क्रिकेट खेल सकते हैं तो मैं भी क्रिकेट खेल सकता हूं। मुझे भी उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना है। उसके पांच साल बाद जब मेरा डेब्यू हुआ तो वो मेरे दाएं तरफ में बैठे हुए थे। सपना सच होता है। सचिन इधर हैं, दादा (सौरव गांगुली) उधर बैठे हैं, वीवीएस लक्ष्मण, भज्जी (हरभजन सिंह) सब बड़े बड़े नाम मेरे अगल बगल बैठे थे। तो उसके बीच में रहकर क्रिकेट खेलने का स्वाद अलग है। एक मीटिंग हुई थी, तो उसमें युवी (युवराज सिंह) ने पूछा कि पसंदीदा खिलाड़ी कौन है तो मैंने कहा द्रविड़ हैं, तो वीरू पाजी ने बोला मैं नहीं हूं? सीनियर खिलाड़ी टांग खींचते रहते थे। 

सवालः कैसा रिश्ता है सीएसके के साथ आपका? धोनी से बात होती है?

रैनाः अच्छा है। बहुत क्रिकेट खेला है मैंने वहां और खूब रन बनाए। वो एक परिवार है। सीएसके की एक अलग फैन फॉलोइंग है। बहुत प्यार मिला है तो उनसे काफी अच्छा रिश्ता है। धोनी से अभी तीन चार दिन पहले बात हुई थी। 

सवालः इस आईपीएल से ऐसे कौन से खिलाड़ी हैं, जो भविष्य की इंडिया टीम में हो सकते हैं?

रैनाः यूपी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भरमार है। उत्तर प्रदेश इतना बड़ा राज्य है कि यहां चार रणजी ट्रॉफी टीम बननी चाहिए। हमारा नॉर्थ अलग है, साउथ अलग है, वेस्ट अलग। आप देखें गोरखपुर, बांदा, आजमगढ़, बनारस और उसके बाद लखनऊ में, प्रयागराज में अलग खिलाड़ी हैं, लखनऊ से आगे जाएंगे, आगरा, बुलंदशहर, मेरठ, नोएडा, शाहजहांपुर, शामली, फिर जो ये वाले लड़के हैं न, यहां के बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। हुसैन जैदी का नाम आपने सुना होगा। इलाहाबाद से बहुत बड़े गेंदबाज थे वो। ज्याति यादव, ज्ञान पांडे मेरे पहले कप्तान थे। बड़े बड़े नाम थे। मैं खुद इलाहाबाद से हूं। नॉर्थ से खिलाड़ी आ नहीं रहे। तो मुझे लगता है कि चार टीमें बनेंगी तो और बच्चों को मौका मिलेगा। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि बीसीसीआई प्राइवेट बॉडी है और उनका जो स्टेट का कल्चर है वो अलग होता है। महाराष्ट्र को देख लीजिए, उनकी पुणे की भी टीम है, मुंबई की भी टीम है। गुजरात को देखेंगे तो उनकी राजकोट की टीम है, बड़ौदा की टीम है तो यूपी की और टीमें क्यों नहीं हो सकती। हमारे पास छह-सात बड़े बड़े स्टेडियम हैं। अभी बनारस में स्टेडियम बन रहा, लखनऊ में बहुत प्यारा स्टेडियम है। गाजियाबाद में भी स्टेडियम बन रहा है। तो मुझे लग रहा जो बच्चे यहां बैठे हैं, उनके लिए बहुत अच्छा होगा।

सवालः यूपी टीम के सेलेक्शन कमिटी के जो चेयरमैन हैं प्रवीण कुमार, उनका गुस्सा प्रसिद्ध है। कभी कोई किस्सा उनके गुस्से का।

रैनाः वो जाट भाई हैं। आप सनी देओल की मूवी देखिए। पूरा खुलकर आए हैं सनी पाजी। गुस्सा कभी कभी हो जाता है और अगर तेज गेंदबाज को गुस्सा नहीं आएगा तो किसे आएगा। 

सवालः प्रियंका से आप कैसे मिले? जाट समाज में आसानी से शादी हो गई थी?

रैनाः वो एक बैंकर हैं और हम बचपन से एकदूसरे को जानते हैं। अभी वो पॉडकास्ट कर रही हैं। उनका मेरे साथ होना काफी महत्वपूर्ण है। मेरी बेटी नौ साल की है, बेटा पांच साल का है। मां होना आसान नहीं है। पति और पत्नी का एक दूसरे के प्रति सम्मान होना बहुत जरूरी है। सही पार्टनर होना आशीर्वाद है और टचवुड मुझे सही पार्टनर मिली। भगवान मेरे प्रति काफी दयालु रहा है। वो फिलहाल समाज के लिए काफी काम कर रही हैं। जाट समाज में शादी के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े थे। मेरी रिपोर्ट बहुत अच्छी थी उनके घर में तो ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा था मुझे।

भारत के लिए तीनों प्रारूप में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जन्में सुरेश रैना देश के सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शुमार रहे हैं। वह पहले भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने का गौरव हासिल किया। वह अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच में शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी हैं। 2005 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में अपने करियर की शुरुआत करने वाले रैना भारत के मध्यक्रम में बेहतरीन बल्लेबाज और बेहद उपयोगी खिलाड़ी थे।

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