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AFG vs NZ: क्या भविष्य में ग्रेटर नोएडा को नहीं मिलेगी अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी? सामने आई बड़ी जानकारी
Tue, 10 Sep 2024 10:25 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 10 Sep 2024 10:25 PM IST
सार
पहले दो दिनों में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी और मंगलवार शाम को हुई भारी बारिश के बाद तीसरे दिन के खेल की संभावना भी बेहद कम हो गई है। श्रीनाथ को मैदान की गीली आउटफील्ड का आकलन करना होगा, जहां जल निकासी अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलों की तरह नहीं है।
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अफगानिस्तान बनाम न्यूजीलैंड
- फोटो : PTI
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विस्तार
अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच एकमात्र टेस्ट दूसरे दिन भी शुरू नहीं हो पाने के बाद ग्रेटर नोएडा के शहीद विजय सिंह पथिक खेल परिसर पर सवालिया निशान लग गया है। ऐसे में इस स्टेडियम को भविष्य में किसी अंतरराष्ट्रीय मैच की मेजबानी मिलेगी इस पर भी अब खतरे के बाद मंडरा रहे हैं क्योंकि जिस तरह की अव्यवस्था देखने मिली है वो शर्मिंदगी का विषय है। हालांकि, इसके भविष्य पर फैसला काफी हद तक तरह मैच रेफरी जवागल श्रीनाथ की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।
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खराब हुआ दो दिन का खेल
पहले दो दिनों में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी और मंगलवार शाम को हुई भारी बारिश के बाद तीसरे दिन के खेल की संभावना भी बेहद कम हो गई है। श्रीनाथ को मैदान की गीली आउटफील्ड का आकलन करना होगा, जहां जल निकासी अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलों की तरह नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थल के लिए मानक प्रोटोकॉल का पालन करेगा जहां मैच रेफरी की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।
पहले दो दिनों में एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी और मंगलवार शाम को हुई भारी बारिश के बाद तीसरे दिन के खेल की संभावना भी बेहद कम हो गई है। श्रीनाथ को मैदान की गीली आउटफील्ड का आकलन करना होगा, जहां जल निकासी अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलों की तरह नहीं है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्थल के लिए मानक प्रोटोकॉल का पालन करेगा जहां मैच रेफरी की रिपोर्ट आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।
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क्या कहता है आईसीसी का नियम?
पिच और आउटफील्ड रिपोर्ट फॉर्म में मैच रेफरी के साथ अंपायरों और दोनों टीमों के कप्तानों की टिप्पणियां भी होती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यूजीलैंड के कप्तान टिम साउदी किस तरह की टिप्पणी देते हैं। इस रिपोर्ट के मिलने के 14 दिन के अंदर आईसीसी सीनियर क्रिकेट संचालक के प्रबंधक इसे मेजबान बोर्ड को भेजकर स्टेडियम पर लगाए गए डिमेरिट अंकों की जानकारी देते हैं। आईसीसी अनुच्छेद के अनुसार मैच रेफरी के पास अगर पिच या आउटफील्ड को असंतोषजनक या अनफिट रेटिंग देने का कारण है, तो मेजबान स्थल पर पिचों की रेटिंग के दिशानिर्देशों के अनुसार डिमेरिट अंक दिए जाएंगे। ये डिमेरिट अंक पांच साल तक प्रभावी रहते हैं। ग्रेटर नोएडा स्थल के नाम अगर छह या उससे अधिक डिमेरिट अंक हो जाते है तो उसे 12 महीने तक अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी से निलंबित कर दिया जाएगा।
पिच और आउटफील्ड रिपोर्ट फॉर्म में मैच रेफरी के साथ अंपायरों और दोनों टीमों के कप्तानों की टिप्पणियां भी होती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि न्यूजीलैंड के कप्तान टिम साउदी किस तरह की टिप्पणी देते हैं। इस रिपोर्ट के मिलने के 14 दिन के अंदर आईसीसी सीनियर क्रिकेट संचालक के प्रबंधक इसे मेजबान बोर्ड को भेजकर स्टेडियम पर लगाए गए डिमेरिट अंकों की जानकारी देते हैं। आईसीसी अनुच्छेद के अनुसार मैच रेफरी के पास अगर पिच या आउटफील्ड को असंतोषजनक या अनफिट रेटिंग देने का कारण है, तो मेजबान स्थल पर पिचों की रेटिंग के दिशानिर्देशों के अनुसार डिमेरिट अंक दिए जाएंगे। ये डिमेरिट अंक पांच साल तक प्रभावी रहते हैं। ग्रेटर नोएडा स्थल के नाम अगर छह या उससे अधिक डिमेरिट अंक हो जाते है तो उसे 12 महीने तक अंतरराष्ट्रीय मैचों की मेजबानी से निलंबित कर दिया जाएगा।
आईसीसी नियमों के मुताबिक हालांकि एक मैच के लिए अधिकतम तीन डिमेरिट अंक दिए जा सकते हैं और इस आयोजन स्थल को निलंबित करने के लिए एक और ऐसे मैच की जरूरत होगी। ऐसे में यह देखने की जिम्मेदारी अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) पर होगी कि क्या वे ऐसे स्थान पर मैचों की मेजबानी जारी रखना चाहेंगे, जो निकट भविष्य में अपने खराब बुनियादी ढांचे के कारण निलंबित हो सकता है।
मैदान को सुखाने को किए गए कई प्रयास
मैदानकर्मियों ने मैदान सुखाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन मैदान को खेलने लायक नहीं बना सके। मैदान को सुखाने के लिए कई तरीके के प्रयोग किए गए जिसमें शामियाने का इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक पंखे शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) से ग्राउंड कवर और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) से सुपर सोपर भी उधार लिया गया। मैदानकर्मी अभ्यास परिसर से सूखी घास लाकर मिड आन और मिडविकेट क्षेत्र में लगाने की कोशिश कर रहे थे। ऑफ साइड में तीन टेबल फैन भी लगाए गए जिससे उसे सुखाया जा सके। स्टेडियम अधिकारियों के अनुसार मैदान में पांच सुपर सोपर लगाए गए लेकिन काम नहीं बना।
मैदानकर्मियों ने मैदान सुखाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन मैदान को खेलने लायक नहीं बना सके। मैदान को सुखाने के लिए कई तरीके के प्रयोग किए गए जिसमें शामियाने का इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक पंखे शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) से ग्राउंड कवर और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) से सुपर सोपर भी उधार लिया गया। मैदानकर्मी अभ्यास परिसर से सूखी घास लाकर मिड आन और मिडविकेट क्षेत्र में लगाने की कोशिश कर रहे थे। ऑफ साइड में तीन टेबल फैन भी लगाए गए जिससे उसे सुखाया जा सके। स्टेडियम अधिकारियों के अनुसार मैदान में पांच सुपर सोपर लगाए गए लेकिन काम नहीं बना।
बीसीसीआई की नहीं है भूमिका
बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को विकल्प के तौर पर बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम और कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम की पेशकश की थी लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों के इस स्थल से परिचित होने और कम खर्च जैसे मुद्दों को तरजीह देते हुए इस स्थल का चयन किया। इस टेस्ट मैच में बीसीसीआई की कोई भूमिका नहीं है। यह स्थल पूरी तरह से अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की पसंद थी।
बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड को विकल्प के तौर पर बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम और कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम की पेशकश की थी लेकिन अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों के इस स्थल से परिचित होने और कम खर्च जैसे मुद्दों को तरजीह देते हुए इस स्थल का चयन किया। इस टेस्ट मैच में बीसीसीआई की कोई भूमिका नहीं है। यह स्थल पूरी तरह से अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड की पसंद थी।