टी-20 वर्ल्ड कप से जुड़े विवाद, अभी तक हैं रहस्य
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भारत में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप की शुरुआत हो चुकी है। टी-20 का यह 6वां टूर्नामेंट है। अभी तक इस टूर्नामेंट से जुड़े 8 से ज्यादा विवादों पर एक नजर।
चौकड़ी की गैरहाजिरी: 2007 के पहले टी-20 विश्व कप में भारतीय चौकड़ी सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का न खेलना रहस्य ही बना रहा। विवाद इसलिए बना रहा क्योंकि इसके बाद ये खिलाड़ी कई वर्षों तक आईपीएल में खेलते रहे और अपना लोहा भी मनवाते रहे।
‘अशांत’श्रीसंत की बेवजह अपील: 2007 के पहले विश्व कप में ही तेज गेंदबाज़ एस। श्रीसंत के नाम एक और विवाद जुड़ा। ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल मुक़ाबले में श्रीसंत ने 12 रन देकर दो विकेट चटकाए, लेकिन मैच में ‘बेवजह’ अपील करने के कारण उन पर मैच फ़ीस का 25 प्रतिशत जुर्माना किया गया।
2009 का ‘विलेन’: इस विश्व कप में भारत सेमीफाइनल में भी नहीं पहुँच सका था। इस टूर्नामेंट में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अहम मुक़ाबले में 154 रनों का लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 5 विकेट पर 150 रन ही बना सकी। इस मैच में कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के रविंद्र जडेजा को बल्लेबाज़ी क्रम में चौथे स्थान पर भेजने के फ़ैसले पर विवाद हुआ। जडेजा 35 गेंदों पर 25 रन ही बना सके थे।
‘नशेड़ी’साइमंड्स बाहर: ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू साइमंड्स को 2009 के टी 20 विश्व कप में अनुशासनहीनता महंगी पड़ी। शराब पीने और टीम के अन्य नियम तोड़ने के कारण उन्हें टूर्नामेंट के बीच में ही घर भेज दिया गया।
2005 में भी इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एशेज सीरीज के दौरान साइमंड्स शराब के नशे में पाए गए थे और तब भी उन्हें वापस भेज दिया गया था।
टीम जिम्बाब्वे डकवर्थ ने फिर छकाया
टीम जिम्बाब्वे डकवर्थ ने फिर छकाया: 2010 के ग्रुप मैच में श्रीलंका और ज़िम्बाब्वे के बीच वर्षा से बाधित मैच में खेल से ज़्यादा रोमांच डकवर्थ लुईस नियम ने दिलाया। श्रीलंका ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पाँच विकेट पर 173 रन बनाए।
जिम्बाब्वे को 20 ओवरों में 174 रनों का लक्ष्य मिला, लेकिन तभी बारिश हो गई, जिसके बाद लक्ष्य 11 ओवरों में 106 कर दिया, बाद में इसे पाँच ओवरों में 44 रन कर दिया। जिम्बाब्वे 5 ओवरों में 1 विकेट पर 29 रन ही बना सकी।
पीटरसन बाहर: 2010 का विश्व कप इंग्लैंड के नाम रहा और इस तरह से किसी भी फॉर्मेट में आईसीसी विश्व कप का ये उसका पहला खिताब था। इस जीत के हीरो थे केविन पीटरसन। पीटरसन को इस टूर्नामेंट में ‘मैन ऑफ़ द सिरीज़’ चुना गया था।
लेकिन इसके बाद चयनकर्ताओं के साथ उनकी पटरी नहीं बैठी और उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। हालाँकि पीटरसन आज भी विभिन्न देशों में टी-20 मुक़ाबले खेल रहे हैं।
2014 में युवराज की धीमी बल्लेबाजी
युवराज की धीमी पारी: 2014 के विश्व कप में धमाकेदार शॉट्स के लिए मशहूर युवराज की बेहद धीमी पारी ने इस हीरो को कुछ ही पलों में विलेन बना दिया। फाइनल मैच में श्रीलंका के ख़िलाफ़ युवराज 21 गेंदों पर 11 रन ही बना सके और भारत के हाथ से कप फिसल गया।
तब आलोचकों ने युवराज को जमकर कोसा था और ये भी संयोग ही है कि युवराज इस मैच के बाद टीम से बाहर हो गए और पिछले महीने ही टीम में वापस लौट सके।
धोनी को नापसंद स्पाइडरकैम: इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान स्पाइडरकैम के इस्तेमाल पर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने आपत्ति दर्ज कराई थी। यही नहीं धोनी ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के दौरे में भी एक बार फिर इसके प्रति अपना विरोध जताया, लेकिन आईसीसी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा विश्व कप में इसका इस्तेमाल होगा।
धर्मशाला के बदले कोलकाता: 19 मार्च को भारत और पाकिस्तान का मैच हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में होना था। लेकिन सुरक्षा कारणों और पाकिस्तानी टीम के अनुरोध के बाद ये मैच अब कोलकाता में होगा।