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झटका : 26 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की नहीं दी जा सकती अनुमति, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Thu, 03 Aug 2023 11:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 03 Aug 2023 11:31 AM IST
सार

याची ने बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत अपनी मां की मृत्यु के 26 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की थी। याची की मां बरेली कॉर्पोरेशन बैंक में कैशियर कम क्लर्क के रूप में कार्यरत थी। इस बैंक का 1999 में बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हो गया था।

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compassionate job could not be approved after 26 years, High Court rejected
Court - फोटो : Social Media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के 26 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने अपनी इस टिप्पणी के साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा बरेली के सहायक महाप्रबंधक और क्षेत्रीय प्रमुख द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने अवनीश टंडन की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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याची ने बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत अपनी मां की मृत्यु के 26 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग करते हुए रिट याचिका दायर की थी। याची की मां बरेली कॉर्पोरेशन बैंक में कैशियर कम क्लर्क के रूप में कार्यरत थी। इस बैंक का 1999 में बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हो गया था।

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याची की ओर से कहा गया कि उसकी मां का निधन 12 नवंबर 1996 को हो गया था। उस समय याची/अवनीश नाबालिग था। अवनीश ने बीकॉम पूरा करने के बाद 2007 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा उनके दावे पर ध्यान नहीं दिया। 2022 में उन्होंने अपने दावे पर विचार करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

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कोर्ट ने अपने पूर्व के एक आदेश में बैंक को अवनीश के दावे पर विचार करने का निर्देश दिया था। क्योंकि, बैंक ने 23 मार्च 2020 को उससे इस संबंध में प्रत्यावेदन लिया था। हालांकि, कोर्ट ने माना था कि दावा बहुत देर से किया गया था और बैंक को अनुमति दे दी थी कानून के अनुसार मामले पर निर्णय लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि याची की मां का निधन हुए 26 साल बीत चुके हैं। इतने लंबे समय के दौरान जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता गया। याची अपने वित्तीय संकट से उबर गया।



 

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