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महिला आरक्षण: संसद से सड़क तक बदलेगी छवि, समाज के अन्य तबकों को भी मिलेगी प्रेरणा

Wed, 20 Sep 2023 07:11 AM IST
Kshama Sharma क्षमा शर्मा
Updated Wed, 20 Sep 2023 07:11 AM IST
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सार
महिलाएं संसद में अधिक संख्या में होंगी और हर पल दिखेंगी, तो समाज के अन्य तबकों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी।
 
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Womens Reservation Bill Presence of More Women in Parliament will also inspiration other sections of society
सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार संसद में महिला आरक्षण विधेयक ला रही है। यह विधेयक पारित हो जाता है, तो देश और समाज की तस्वीर बदल जाएगी। इससे महिलाओं के बारे में यह बनी-बनाई धारणा टूट जाएगी कि घर-गृहस्थी के अलावा वे और क्या कर सकती हैं। यों भी देश के सर्वोच्च पद पर एक महिला ही विराजमान हैं।



आज महिलाएं दफ्तरों में, बाजारों में, हवाई अड्डों पर, फिल्म, टीवी और रेडियो पर बड़ी संख्या में नजर आती हैं। उन्हें यह ताकत हमारे लोकतंत्र और शिक्षा ने दी है। मीडिया से भी उन्हें भरपूर सहयोग मिला है। महिलाओं को वोट देने का अधिकार हमारे यहां शुरू से है, जबकि अमेरिका में वोट देने के अधिकार के लिए महिलाओं को सत्तर वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा था। हर राजनीतिक दल आज महिला शक्ति को पहचानता है, इसलिए अपने-अपने घोषणा पत्रों में वह इनके लिए तरह-तरह के वादे करता है।

   
27 साल पहले महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया गया था। इस दौरान अनेक सरकारें आई-गईं, मगर यह विधेयक पारित नहीं हो सका। यदि यह सरकार इसमें कामयाब हो जाती है, तो यह न केवल एक बड़ी उपलब्धि होगी, बल्कि नरेंद्र मोदी इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लेंगे।

आमतौर पर इस सरकार पर महिला विरोधी होने का ठप्पा लगाया जाता रहा है। लेकिन मोदी सरकार की तमाम योजनाओं में महिलाओं को भरपूर प्राथमिकता मिली है। अचल संपत्ति न होने के कारण महिलाओं को कमजोर माना जाता था। लेकिन सरकार जो मकान गरीबों को दे रही है, वे महिलाओं के नाम ही होते हैं। महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती है। इस विधेयक के आने के बाद पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदलने वाला है। 

इसके अलावा सामाजिक स्थिति में भी महिलाओं को और अधिक प्राथमिकता मिलने वाली है। वैसे भी पिछली यानी कि 17वीं लोकसभा में सबसे ज्यादा 78 महिला सांसद लोकसभा में पहुंची थीं। इस विधेयक के पारित होने के बाद तो हर पार्टी को 33 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देना ही होगा। कोई भी जीते या हारे, आरक्षित सीटों पर महिलाएं ही संसद में पहुंचेंगी। इससे चुनावों के दौरान और बाद में परिदृश्य बेहद रोचक और महिलाओं की ताकत बढ़ाने वाला होगा। बड़ी संख्या में महिलाएं संसद में होंगी। वही कानून बनाएंगी और अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में जाकर उनके फायदे गिनाएंगी। इससे यह धारणा भी टूटेगी कि औरतों को राज-काज से भला क्या मतलब!

महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या उनके दिखाई देने या विजिबिलिटी की है। यह छवियों की दुनिया है। उसी से भला-बुरा तय होता है। महिलाएं संसद में अधिक संख्या में होंगी, हर पल दिखेंगी, तो समाज के अन्य तबकों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। पहले की तरह अगर कुछ ओबीसी नेता इसमें अपने वर्ग के लिए अलग से आरक्षण की मांग करते हैं, तो भी कुछ बुरा नहीं होगा। चाहे किसी वर्ग से कोई महिला आए, होगी तो वह महिला ही और इससे अंततः महिलाओं का ही भला होगा। 

प्रधानमंत्री मोदी के बारे में कहा जाता है कि वह महिलाओं में बहुत लोकप्रिय हैं। महिलाएं बड़ी संख्या में उन्हें वोट देती रही हैं। इसका कारण भी है। महिलाएं कमजोर पुरुष को घर में ही बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। उन्हें पुरुषों की ताकतवर छवि पसंद होती है। ऐसे में देश का कोई नेता अगर ताकतवर है और उनके बारे में सोच भी रहा है, संसद में उन्हें आरक्षण भी दे रहा है, तब तो और भी अधिक संख्या में वे वोट देने बाहर निकलेंगी।

जाहिर है कि इससे सत्ता के रास्ते में आती रुकावटें भी दूर होंगी। वैसे भी भाजपा ने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं को संसद में 33 फीसदी आरक्षण देने का वादा किया था। कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता खड़गे ने भी महिला आरक्षण बिल लाने की बात कही है। सोनिया गांधी भी ऐसी मांग कई बार कर चुकी हैं। सरकार द्वारा यह विधेयक पेश करने पर कांग्रेस इसका कितना समर्थन करती है, यह देखना होगा। हालांकि लगता नहीं कि बदले हुए समय में कोई इस विधेयक का विरोध कर पाएगा। आखिर 27 साल में बहुत कुछ बदल गया है। महिला आरक्षण विधेयक का विरोध अगर कोई पार्टी करेगी, तो वह अपना ही नुकसान करेगी। 

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