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पड़ोस: पाकिस्तान में खाद्यान्न का भीषण संकट, इस बदहाली का जिम्मेदार कौन

Sat, 18 Feb 2023 05:54 AM IST
Shivdan Singh शिवदान सिंह
Updated Sat, 18 Feb 2023 05:54 AM IST
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सार
विभाजन के बाद ज्यादा उपजाऊ और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर जमीन मिलने के बावजूद पाकिस्तान इस सदी के सबसे गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रहा है।
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who is responsible for worst food crisis in Pakistan
पाकिस्तान में खाद्यान्न संकट - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

संयुक्त भारत की सबसे ज्यादा उपजाऊ और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर जमीन के होने के बावजूद आजकल पाकिस्तान इस सदी के सबसे गंभीर खाद्यान्न संकट से जूझ रहा है। जबकि इतनी उपजाऊ जमीन होने के कारण पाकिस्तान को खाद्यान्न का निर्यातक होना चाहिए था। वैसे तो 1947 से लेकर आज तक पाकिस्तान में तरह-तरह के संकट आते रहे, जो ज्यादातर मानवीय कारणों से थे। मसलन, बंटवारे के समय करोड़ों शरणार्थी भारत-पाकिस्तान के बीच एक-दूसरे के यहां गए, जिसके कारण पूरे पाकिस्तान में अस्थिरता का माहौल रहा। इसके बाद वहां पर सत्ता के लिए बार-बार राजनीतिक संकट उत्पन्न हुए, जिसका फायदा उठाकर वहां की सेना ने अब तक पांच बार मार्शल लॉ लगाकर सैन्य शासन स्थापित किया। पाकिस्तानी सेना देश के शासनतंत्र पर पूरी तरह शुरू से ही हावी रही है और उसने देश के विकास संबंधी धन को हथियार और गोला-बारूद खरीदने पर खर्च किया।



मौजूदा संकट में पाकिस्तान में सेना की भूमिका अहम है। 1980 के दशक में जनरल जियाउल हक के शासन के समय पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण शुरू किया गया, जिनका उपयोग अमेरिका ने अफगानिस्तान से रूसी सेना को भगाने के लिए किया था। इसके बाद पाकिस्तान भाड़े के आतंकी तैयार करने वाला देश बन गया, जिसके कारण विश्व की ज्यादातर आतंकवादी गतिविधियों में उसका नाम आने लगा। आज पाकिस्तान में तरह-तरह के आतंकी संगठन चल रहे हैं, जिनमें तहरीक-ए-तालिबान काफी खबरों में है, जो पाकिस्तान में खलीफा शासन स्थापित करना चाहता है। इन सबके कारण पाकिस्तान में आजादी के बाद से ही औद्योगिक विकास बिल्कुल रुक गया और वहां की आतंकी और हिंसक गतिविधियों को देखते हुए विदेशी निवेशकों ने पाकिस्तान में निवेश नहीं किया। नतीजतन पाकिस्तान में आज बेरोजगारी चरम पर है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वह ज्यादातर अपना आयात और देश का खर्चा अरब देशों के दान या कर्ज में मिली हुई राशि से चला रहा है।


पाकिस्तान की मुद्रा का यह हाल है कि अमेरिका का एक डॉलर पाकिस्तान के 250 रुपये के बराबर है। उसकी पूरी आशाएं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष पर टिकी थी, जिससे उसने 1.1 अरब पाउंड का कर्जा मांगा था। परंतु वहां से भी उसे कर्ज मिलता नहीं दिख रहा है, क्योंकि पाकिस्तान उसकी दी हुई शर्तों पर खरा उतरता नजर नहीं आ रहा है।

पाकिस्तान में पैदा हुए अन्य संकटों को तो समझा जा सकता है, परंतु खाद्य सामग्री का संकट समझ से परे है, क्योंकि पाकिस्तान को प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर भूमि बंटवारे में मिली थी। वहां के पंजाब प्रांत में पांच-पांच नदियां जल के लिए उपलब्ध हैं और राजस्थान का उपजाऊ हिस्सा सिंध के रूप में पाकिस्तान के हिस्से में आया, जबकि इसका रेगिस्तानी हिस्सा जैसे जैसलमेर, बाड़मेर तथा बीकानेर जिले भारत में आए। परंतु पाकिस्तान के निर्माण के समय से ही वहां देश निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, जिसके कारण अभी तक भूमि सुधार लागू नहीं हुए हैं।

यही कारण है कि कृषि योग्य भूमि के 70 फीसदी हिस्से पर केवल 263 सामंती परिवारों का कब्जा है, जिन्हें आज भी नवाब, नवाबजादा, मनसबदार इत्यादि नामों से जाना जाता है। इनमें प्रमुख नाम भुट्टो, जरदारी, रजा गिलानी इत्यादि हैं। पाकिस्तान में प्रजातंत्र केवल नाम मात्र का है, क्योंकि यह सामंत अपने भय और आतंक से वहां की राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली में पहुंचकर शासन पर कब्जा कर लेते हैं। आंकड़ों के अनुसार वहां के देहातों में 55 फीसदी आबादी भूमिहीन है, जो इन सामंतों के यहां बंधुआ मजदूरों की तरह काम करके गुजारा करती हैं। इन सामंतों के जुल्म-ओ-सितम से तंग आकर अनेक युवा आतंकी संगठनों में भर्ती होकर आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। सामंतों का मुख्य व्यवसाय कृषि नहीं है, इसलिए वे कृषि पर ध्यान नहीं देते हैं, जिस कारण पाकिस्तान की उपजाऊ जमीन का पूरा उत्पादन नहीं मिल पा रहा है। जबकि पाकिस्तान का मुख्य निर्यात और वहां की जीडीपी मुख्यतया कृषि पर ही आधारित है। यह विडंबना ही है कि जिस पाकिस्तान को गरीब देशों को खाद्यान्न निर्यात करना चाहिए, उसी पाकिस्तान में आजकल आटे-दाल के लिए लोग तरस रहे हैं।

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