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गर्म समुद्र, अल-नीनो और चक्रवाती तूफान: भारत ने मौतों को कम करने में सफलता पाई, आर्थिक नुकसान अब भी बड़ी चुनौत

Wed, 04 Nov 2026 10:01 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Wed, 04 Nov 2026 10:01 AM IST
सार

भारत ने बेहतर पूर्वानुमानों के जरिये चक्रवातों से होने वाली मौतों को कम करने में सफलता पाई है, पर आर्थिक नुकसान अब भी बड़ी चुनौती है।

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Warming oceans El Niño cyclons India success in reducing fatalities economic losses remain major challenge
जलवायु परिवर्तन, संकट की आहट। - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ रही ग्लोबल वार्मिंग से सिर्फ पृथ्वी ही नहीं, बल्कि महासागर भी गर्म हो रहे हैं। भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से का आकार दोगुना हो गया है। पृथ्वी पर महासागर के तापमान में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। और, दूसरी तरफ हिंद महासागर के तेजी से गर्म होने की रफ्तार कहीं ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में, समुद्री तूफान भीषण रूप ले रहे हैं। इसका हालिया उदाहरण है-आंध्र प्रदेश के तट से टकराया अर्नब चक्रवात।

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अर्नब की खासियत इसकी तेजी से बढ़ती ताकत थी। यह एक उष्णकटिबंधीय निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ और अगले 36 घंटों में चक्रवाती तूफान बन गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने इसे ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में रखा। समुद्र का सामान्य से अधिक गर्म होना और बढ़ती गर्मी के साथ प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति भी बनी हुई है। आईएमडी के पूर्व महानिदेशक डॉ. केजे रमेश के मुताबिक, समुद्र की सतह का सामान्य से अधिक गर्म तापमान व अल-नीनो की भूमिका ने अर्नब की तीव्रता बढ़ाने में मदद की।
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समुद्र से उठने वाले चक्रवातों को गर्म पानी से ऊर्जा मिलती है। गर्म समुद्र से अधिक पानी वाष्प बनकर वातावरण में जाता है। जब यह जलवाष्प संघनित होती है, तो गर्मी निकलती है, जो तूफान की प्रणाली को ऊर्जा दे सकती है। इस प्रक्रिया में समुद्र का तापमान अहम है, पर केवल यही पूरी कहानी नहीं बताता। समुद्र में गर्म पानी कितनी गहराई तक मौजूद है, यह भी तूफान की ताकत को प्रभावित कर सकता है। इस साल अक्तूबर में भूमध्यरेखीय मध्य प्रशांत महासागर की सतह का तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा।
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अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) के आंकड़ों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के मध्य व पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्सों में बड़े क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया गया। अटलांटिक, हिंद और दक्षिणी महासागरों के कुछ हिस्सों में भी समुद्र का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर रहा। सितंबर 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान औसत से 1.10 डिग्री सेल्सियस अधिक था। यह किसी भी महीने के लिए दर्ज सबसे बड़ा अंतर था और अगस्त 2026 के पिछले रिकॉर्ड से भी थोड़ा अधिक था।

जलवायु वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र में जमा अतिरिक्त गर्मी का बड़ा हिस्सा महासागर सोख लेते हैं। इससे समुद्री परिस्थितियां बदलती हैं और कुछ क्षेत्रों में शक्तिशाली चक्रवातों के लिए अनुकूल हालात बन सकते हैं। हालांकि, चक्रवातों की संख्या और तीव्रता में बदलाव को समझने के लिए समुद्र के तापमान के साथ हवा, नमी, वायुमंडलीय परिस्थितियों और तूफानों के रास्ते का भी अध्ययन करना पड़ता है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस के रिसर्च साइंटिस्ट अक्षय देवरस के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में इस समय चक्रवात बनने के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियां हैं। साथ ही, गर्म वातावरण में अधिक नमी मौजूद रह सकती है। इससे बादलों में नमी की मात्रा बढ़ने और तेज बारिश की संभावना बन सकती है।

भारत में मानसून के बाद का मौसम भी चक्रवातों के लिहाज से अहम होता है। आम तौर पर समुद्र की सतह का तापमान 27 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होना चक्रवात बनने के अनुकूल माना जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक आकलनों के मुताबिक, उत्तर हिंद महासागर में कुछ चक्रवात बहुत कम समय में काफी ताकतवर हो रहे हैं। 2000 के बाद से इस क्षेत्र में करीब 38 फीसदी चक्रवातों में तेजी से तीव्रता बढ़ने की स्थिति दर्ज की गई, जबकि उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में यह अनुपात करीब 22 फीसदी बताया गया है।


राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य और विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णा एस वत्सा के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के साथ जलवायु संबंधी खतरों की विविधता बढ़ रही है। भारत ने बेहतर तैयारी और समय पर पूर्वानुमान के जरिये चक्रवातों में होने वाली मौतों को कम करने में सफलता पाई है, लेकिन आर्थिक नुकसान अब भी बड़ी चुनौती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अत्यधिक मौसमी घटनाओं में वृद्धि हो रही है।

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