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अमेरिका: सांस्कृतिक युद्ध ऐतिहासिक घटना... वर्तमान माहौल में ट्रंप जैसे तेज-तर्रार और सतर्क व्यक्ति जरूरी
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल)
- फोटो :
ANI
विस्तार
अक्सर अच्छे विचार ही बुरे सिद्धांत बन जाते हैं। जागरूकता (वोकनेस) की जड़ें नस्लीय संवेदनशीलता में देखी जा सकती हैं, जो सत्ता और विशेषाधिकारों द्वारा किए जाने वाले सामाजिक अन्याय के प्रति सजग रखती है। इस शब्द का अर्थ संभवतः धार्मिक सांस्कृतिक मानदंड हो गया है, लेकिन जिस शुद्ध भावना को अब यह हथियार मुहैया करा रहा है, वह कभी सभ्य लोगों द्वारा साझा की जाती थी, जिन्हें आचरण के लिए किसी वैचारिक फतवे की आवश्यकता नहीं होती थी।
जॉर्ज फ्लॉयड एक अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्ति था, जिसकी अमेरिका में 2020 में एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने हत्या कर दी थी। सड़क पर बर्बरता और नस्लीय असंवेदनशीलता के कारण फ्लॉयड की मौत के बाद सब कुछ बदल गया। उसकी शहादत के बाद जो पैदा हुआ, वह आक्रोश का सिद्धांत था, जो अमेरिकी शहरों में लाखों लोगों के मार्च और लूट के कारण उभरा। वोकनेस एक आदर्श सुधारवादी सिद्धांत है, लेकिन इसका इस सीमा तक उतरना कहां तक न्यायोचित है? एक वक्त था, जब सत्य और तथ्य की विसंगति केवल उन लोगों के लिए मायने रखती थी, जो साहस करते थे। तब वोकेइज्म जैसे सिद्धांत की जरूरत भी थी। लेकिन आज के सोशल मीडिया युग में स्थितियां बदल चुकी हैं। कुछ गलत होगा, तो वह किसी से भी छिप नहीं सकेगा। आज हर कोई इतना जागरूक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी के हाथ में हथियार दे दिए जाएं। वोकनेस की परिभाषा अस्पष्ट हो सकती है, जो समर्थकों की चेतना के स्तर के अनुसार बदलती रहती है, लेकिन इसने अपने शास्त्रीय विस्तार में पहचान की राजनीति की सभी चिंताओं को शामिल कर लिया है।
यह उन खांचों को पहचानता है, जिनमें पहचान की राजनीति ने सामाजिक समूहों को रखा है और राजनीतिक फायदे के लिए अनुक्रमित भी किया है। वोकनेस की किताब में न्याय सत्ता के खिलाफ एक सांस्कृतिक संघर्ष है, जो जीवित लोगों को याद दिलाता है कि इतिहास कैसे झूठ और खंडन का पुलिंदा मात्र है। इसने किसी भी चीज को नहीं छोड़ा, यहां तक कि जीवविज्ञान को भी विवाद में बदल दिया। असल में जो मायने रखता है, वह यह नहीं है कि आप किस लिंग के साथ पैदा हुए हैं, बल्कि यह है कि यह सामाजिक संरचना के रूप में कैसे विकसित होता है। यह पुराने जमाने के नारीवादियों को बर्दाश्त नहीं हो सका। शायद नारीवाद शब्द ही असंवेदनशील रूप से लिंग-विशिष्ट था।
हैरी पॉटर की लेखिका जेके रोलिंग जानती हैं कि निश्चितताओं पर सवाल उठाने का साहस कैसे किया जाता है। वह इसलिए बच गईं, क्योंकि वह जेके रोलिंग थीं। जॉर्डन पीटरसन और डगलस मुरे जैसे वोकनेस-विरोधी योद्धा भी इसलिए बच गए, क्योंकि वे उन कट्टरपंथियों से बेहतर तर्क देते हैं, जो तर्क नहीं करते और केवल आज्ञाओं को दोहराते हैं, जैसा कि कट्टरपंथी हमेशा करते हैं। अगर वोकनेस पर प्रहार होगा, तो उस पर प्रतिक्रिया तो यकीनन होगी, क्योंकि उदारवाद के भीतर प्रगतिशील धर्मनिष्ठतावादी लोग अपने युद्धक्षेत्र का विस्तार करना चाहते थे। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विविधता, समानता और समावेशन की अस्वीकृति कोई हैरान करने वाली बात नहीं है, क्योंकि यह एक ऐसे व्यक्ति की ओर से आया है, जिसने स्वयं को उस चीज के अग्रदूत के रूप में रखा है, जिसे वह कॉमन सेंस की क्रांति कहता है। अमेरिकी रक्षा बलों में पुरुष वर्चस्व को बहाल करना द्वि-लिंगीय सामान्यता के उनके दृष्टिकोण के अनुरूप है। वोकनेस को कभी राजनीतिक नेतृत्व की आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिली, भले ही इसे सत्ता में उदारवादी वर्ग का समर्थन प्राप्त रहा हो। वोकनेस के विरुद्ध युद्ध एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि इसका नेतृत्व विश्व का सबसे शक्तिशाली देश कर रहा है। यह सांस्कृतिक युद्ध को दक्षिणपंथी राजनीति में वापस लाया है।
परंपरागत रूप से यह वह युद्ध है, जिसे दक्षिणपंथी हारते रहे हैं। बाजार में होने वाले युद्ध को वे आसानी से जीत लेते हैं। अमेरिकी महानता को बहाल करने की उन्मत्त दौड़ में लगे बूढ़े ट्रंप दोनों युद्ध जीतना चाहते हैं। सांस्कृतिक युद्ध में घरेलू स्तर पर उनके पास एलन मस्क जैसे साधन संपन्न लोग हैं, जो उसे हवा देते रहते हैं। और विदेश में, उनके पास अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली जैसे साथी हैं, जो प्रगतिशीलता (वामपंथ) के ‘मानसिक वायरस’ के खिलाफ उनके अभियान का समर्थन करते हैं। क्या नया सांस्कृतिक युद्ध सशस्त्र सामाजिक संवेदनशीलता के एक लापरवाह दौर के बाद सामान्यता की बहाली के बारे में है? क्या सामाजिक व्यवहार को सामान्य बनाने का अर्थ बहुसंख्यकों की असंवेदनशीलता को वैधता प्रदान करना है, जो विरासत में मिले सामाजिक विशेषाधिकारों से संतुष्ट हैं?
जिस उग्रता के साथ ट्रंप अपना वोकनेस-विरोधी युद्ध छेड़ रहे हैं, उससे निश्चित रूप से एमएजीए (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) क्षेत्र में एक निम्न वर्ग का निर्माण होगा, जो बदले में सांस्कृतिक और सामाजिक अधिकारों के लिए भावी संघर्षों को मुख्यधारा में लाएगा। एक स्वयंभू एकीकरणकर्ता, जो सामाजिक न्याय के विचार को पुनर्लिखित राष्ट्रीय इतिहास और मानव शरीर को विज्ञान की संभावनाओं से अलग करता है, उसे नए आक्रोशों-नई सांस्कृतिक बस्तियों के साथ रहने के लिए तैयार रहना चाहिए।
ट्रंप जिस चीज से हमेशा नहीं लड़ सकते, उसे ट्रंपवाद के उत्तराधिकारियों को ही उठाना होगा। हो सकता है कि उन्होंने ट्रंप के बाद के कंजर्वेटिव लोगों को विरासत में सबसे लंबा सांस्कृतिक युद्ध दे दिया हो। फिलहाल ट्रंप आदर्शवाद से उपजी सभी समस्याओं का संहार करने की भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन दिक्कत यह है कि इसमें हारने वाले अपने सार्वजनिक व निजी, पेशेवर व सामाजिक जीवन में उनकी विचारधारा को बिल्कुल नहीं स्वीकारेंगे। जब उदारवाद राजनीतिक सत्ता के लिए अपना संघर्ष खोकर अपने संपूर्ण वैचारिक संसाधनों को पहचान में लगाकर सांस्कृतिक शक्ति हासिल करने के लिए चरम सीमा तक चला गया, तो इसने एक नए संघर्ष की आशंका पैदा की है। इस माहौल में, राजनीति को अच्छाई और बेहतरी की लोककथा में बदलने के लिए ट्रंप जैसे तेज-तर्रार और सतर्क व्यक्ति की ही जरूरत है।