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तमिल राजनीति में दो नए सितारे

Thu, 28 Sep 2017 10:30 AM IST
bhaskar sai भास्कर साई
Updated Thu, 28 Sep 2017 10:30 AM IST
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Two new star in Tamilnadu politics
कमल हासन एवं रजनीकांत

तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा को एक ही सिक्के का दो पहलू कह सकते हैं, क्योंकि इन दोनों के बीच गहरा संबंध है। और अगर हम इन दोनों को शरीर और आत्मा कहें, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अब तक तमिलनाडु फिल्म उद्योग ने राज्य को पांच मुख्यमंत्री दिए हैं-सीएन अन्नादुरई, एम करुणानिधि, एमजी रामचंद्रन, वीएन जानकी और जे जयललिता। पांच तो केवल मुख्यमंत्रियों की संख्या है। तमिलनाडु की राजनीति में प्रवेश करने वाले सिनेमा के लोगों की संख्या तो अनगिनत है-शिवाजी गणेशन से लेकर सिंगामुथु तक।


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लेकिन रुकिए, अब तमिल सिनेमा के दो शीर्ष अभिनेता रजनीकांत और कमल हासन की प्रस्तावित राजनीतिक योजनाओं की बात करते हैं, जो इन दिनों सुर्खियों में है। पर्दे की दुनिया में प्रतिस्पर्धी और असल जिंदगी में करीबी दोस्त-रजनीकांत और कमस हासन ने लगभग स्पष्ट कर दिया है कि वे दोनों शीघ्र ही राजनीति के मैदान में उतरेंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से चेन्नई में भेंट के बाद कमल हासन ने जहां खुलेआम कहा कि वह तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे, वहीं रजनीकांत ने पहले से ही अपने प्रशंसकों को ‘युद्ध’ के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि वह अभी भावी रणनीतियां बनाने में व्यस्त हैं।
 
तो क्या ये दोनों राजनीति में भी कुछ बड़ा करेंगे, जैसा उन्होंने सिनेमा में किया? या उनमें से कोई एमजीआर बन जाएगा और दूसरा शिवाजी? एमजीआर जहां राजनीति में सफल रहे, वहीं शिवाजी फ्लॉप कर गए। या रजनी और कमल, दोनों को पराजय का सामना करना पड़ेगा?

हास्य अभिनेता जीवा के मुताबिक, 'रजनी पहले से ही एक जननेता हैं और वह राजनीति में भी खुद को साबित करेंगे। लाखों लोग उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू करने की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। मुझे कोई संदेह नहीं है कि वह राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे।' उन्होंने आगे कहा, मैंने रजनीकांत के राजनीतिक सलाहकार से बात की और उनसे मिले संकेतों के आधार पर मैं कह सकता हूं कि शीघ्र ही वह राजनीति में उतरेंगे।

कमल हासन के कट्टर समर्थक हास्य अभिनेता माइलसामी कहते हैं, 'कमल सर बहुत तेज बुद्धि के हैं और वह समाज की बहुत परवाह करते हैं। हाल में दिए गए उनके बयान राज्य और राज्य के लोगों के प्रति उनकी चिंता को दर्शाते हैं। वह निश्चित रूप से राजनीति में भी बड़ा बदलाव लाएंगे।' दिग्गज अभिनेता-निर्देशक टी राजेंद्र, जो पहले से ही राजनीति में हैं, रजनीकांत और कमल हासन, दोनों का विरोध करते हैं। वह कहते हैं, 'इन दोनों ने अब तक लोगों के लिए क्या किया है? क्या इन दोनों ने महत्वपूर्ण मुद्दों पर बयान तक दिया है? वे अब जयललिता की मौत के बाद खाली हुई जगह का फायदा उठाना चाहते हैं, लोगों को इन पर बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए।'

राजनीतिक विश्लेषक और प्रोफेसर एस रवि तेजा कहते हैं, चाहे रजनीकांत हों या कमल हासन, दोनों को पहले अपनी नीति और वायदों की घोषणा करने दीजिए। उसके बाद ही हम उनके समर्थन और विरोध का फैसला कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह सच है कि फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति में बहुत बड़ा शून्य है। जयललिता अब नहीं हैं, करुणानिधि बीमार हैं, सरकार कई समस्याओं का सामना कर रही है और विपक्ष मजबूत नहीं है। ऐसे में रजनीकांत या कमल हासन जैसे लोकप्रिय चेहरे निश्चित रूप से लोगों को आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन लोग और समय ही यह तय करेगा कि कौन बना रहेगा और कौन दौड़ से बाहर हो जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि रजनी और कमल, दोनों के सिनेमा में गुरु प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता के बालाचंदर थे। 1970 के दशक के उत्तरार्ध से दोनों एक-दूसरे के करीबी मित्र हैं। यहां तक कि हाल ही में कमल हासन ने रजनी से मुलाकात कर राजनीति पर चर्चा की। स्वयं कमल हासन के शब्दों में, 'चार-पांच हफ्ते पहले मैं रजनीकांत से मिला था, हम दोनों काम करते थे...हमारे बीच बातचीत होती है...हम दोनों का एक ही लक्ष्य है, पहले भ्रष्टाचार से लड़ाई। लेकिन मैंने एक दूसरा मार्ग अपनाया है और उन्होंने दूसरा। विस्तार में हमने चर्चा नहीं की, इसलिए असहमति नहीं थी। मैंने उन्हें गले लगाया, और कहा कि मैं राजनीति में जा रहा हूं।' अपने हालिया ट्वीट में कमल हासन ने अन्नाद्रमुक सरकार पर निशाना साधा। और केजरीवाल से मिलने से पहले वह केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन से मिले। इसलिए चर्चा है कि संभवतः कमल खुद अपनी पार्टी बनाएं और दो में से किसी एक (आप या माकपा) से या संभव हुआ, तो दोनों पार्टियों से गठजोड़ करें।
 
जहां तक रजनीकांत का संबंध है, तो उन्होंने हाल ही में चेन्नई में अपने प्रशंसकों से ‘युद्ध’ के लिए तैयार रहने के लिए कहा है, क्योंकि राज्य की व्यवस्था सड़ चुकी है। सैद्धांतिक रूप से राजनीति रजनी के लिए कोई नई चीज नहीं है, क्योंकि 1996 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जयललिता के खिलाफ आवाज उठाई थी और तब उनकी सरकार को हराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। लेकिन व्यावहारिक स्तर पर यह उनके लिए नई जमीन है। हालांकि उनके राजनीतिक सलाहकार मजबूती से कहते हैं कि वह एक नई पार्टी शुरू करेंगे, जो सकारात्मक तरीके से राज्य की तकदीर बदल देगी। ऐसी भी अफवाह है कि वह या तो भाजपा में शामिल होंगे या उसके साथ गठजोड़ करेंगे। कमल हासन और केजरीवाल की मुलाकात के अगले दिन ही रजनीकांत ने एक ट्वीट करके प्रधानमंत्री की 'स्वच्छता ही सेवा' पहल के प्रति पूर्ण समर्थन जताया। और सभी जानते हैं कि भाजपा लंबे समय से रजनीकांत को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटी हुई है।

इसलिए सिनेमा के ये दो दिग्गज चाहे जो भी फैसला लें, यह तो निश्चित है कि तमिलनाडु की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम होनेवाले हैं। और लोग भावी कार्यक्रमों के खुलासे का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि सीटियां और तालियां क्या वोट में तब्दील होंगी!

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