आर्थिकी: नई आर्थिक ताकत बनते कर सुधार, विकास दर के अनुमान से उम्मीदों को मिला आधार
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विस्तार
यह कोई छोटी बात नहीं है कि इन दिनों प्रकाशित हो रही वैश्विक आर्थिक-वित्तीय संगठनों की रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि 50 फीसदी ट्रंप के टैरिफ और एच-1बी वीजा की फीस एक लाख डॉलर किए जाने के बावजूद भारत की विकास दर बढ़ रही है और क्रेडिट रेटिंग ऊंची हो रही है। हाल ही में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (आईसीडी) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। फिच ने भारत में तेजी से बढ़ती घरेलू मांग, नए कर सुधार, ब्याज दर में कमी, क्रय शक्ति बढ़ने, सर्विसेज की तेज गति और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि के मद्देनजर विकास दर का अनुमान 6.9 फीसदी बताया है। ऐसे ही अनुमान विश्व बैंक, आईएमएफ ने भी लगाए हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि छह महीनों में भारत में आर्थिक परिदृश्य ऊंचाई पर होगा। विशेषकर जीएसटी में की गई कटौती से खुदरा कीमतें घटेंगी और उपभोग बढ़ने से मांग में तेजी आएगी। ऐसे में इस वित्तीय वर्ष में विकास दर 6.5 फीसदी से अधिक रहने की संभावना है।
हाल ही में दुनिया की प्रसिद्ध जापान की ग्लोबल रेटिंग एजेंसी रेटिंग एंड इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन (आरएंडआई) ने कहा कि अमेरिका द्वारा ऊंचे टैरिफ लगाने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ने की प्रवृत्ति दिखा रही है। भारत की ‘सॉवरेन रेटिंग’ को एक पायदान ऊपर करते हुए बीबीबी प्लस किया गया है। बीते दिनों एसएंडपी और मार्निंग स्टार डीबीआरएस जैसी वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड किया है। 24 सितंबर को प्रकाशित स्टैंडर्ड चार्टर्ड की ‘फ्यूचर ऑफ ट्रेड रिपोर्ट’ के मुताबिक, इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, हांगकांग और चीन की 60 फीसदी से ज्यादा बड़ी कंपनियां भारत के साथ कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। इस रिपोर्ट में उल्लेख है कि भारत दुनिया की बड़ी कंपनियों के लिए ग्लोबल सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग का पसंदीदा ठिकाना बन रहा है और कंपनियां भारतीय बाजार से जुड़ने की रणनीति बना रही हैं।
निश्चित रूप से कर सुधार भारत की नई आर्थिक ताकत बनते हुए दिख रहे हैं। जीएसटी और इनकम टैक्स में किए गए बदलाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह आम लोगों के जीवन में खुशहाली का डबल धमाका है। इनकम टैक्स में मिली 12 लाख तक की छूट के बाद अब जीएसटी की दरों में की गई कटौती से घरों का बजट सुधरेगा, आम लोगों की बचत बढ़ेगी और मध्यम वर्गीय लोगों की क्रयशक्ति में भी बड़ा इजाफा होगा। चूंकि, अब देश का लक्ष्य 2027 में तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था और 2047 तक देश को विकसित भारत बनाना है, इस लक्ष्य को पाने के लिए कई बातों पर रणनीतिक रूप से ध्यान देना होगा। एक, नए निर्यात बाजार में कदम रखे जाएं। दो, तेज बढ़ते घरेलू बाजार व अनुकूल आर्थिक परिदृश्य से विकास दर बढ़ाई जाए। तीन, एफटी की डगर पर तेजी से आगे बढ़ा जाए। चार, स्वदेशी अपनाएं। पांच सेवा निर्यात बढ़ाएं। अब भारत को स्वदेशी आत्मनिर्भरता के साथ घरेलू बाजार को ऊंचाई देनी होगी। अब भारत को नवाचार, प्रतिस्पर्धा, क्षमता में सुधार तथा शोध की डगर पर आगे बढ़ने की तैयारी करनी होगी। देश में तेजी से आगे बढ़ रहे छह क्षेत्रों-औषधि, रसायन, ऑटो, डिफेंस, औद्योगिक इंजीनियरिंग और खाद्य क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों को शोध एवं नवाचार क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ाना होगा। उम्मीद करें कि सरकार टैरिफ और एच-1बी वीजा फीस की चुनौती के बीच भारत में प्रतिभाओं को हर तरह से प्रोत्साहन देते हुए प्रतिभा पलायन रोकने के लिए रणनीतिपूर्वक आगे बढ़ेगी।