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किसानों को राहत: MSP बढ़ने से किसानों को यकीनन राहत, लेकिन दीर्घकालिक कृषि सुधारों पर भी ध्यान देना होगा

Thu, 29 May 2025 09:02 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 29 May 2025 09:02 AM IST
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सार
चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर 14 खरीफ फसलों की एमएसपी में वृद्धि की घोषणा यकीनन किसानों को राहत देगी, लेकिन उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले, इसके लिए घोषणा के प्रभावी क्रियान्वयन के अलावा दीर्घकालिक कृषि सुधारों पर भी ध्यान देना होगा।
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Relief to farmers after MSP hike now attention will also have to be paid to long term agricultural reforms
फसलों की एमएसपी बढ़ने से किसानों को राहत मिलने के आसार (प्रतीकात्मक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने खरीफ के मौसम की शुरुआत से पहले ही चौदह खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी देकर देश के किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम उठाया है।



एमएसपी दरअसल वह तयशुदा मूल्य होता है, जो किसानों को बाजार में उनकी उपज के मूल्य से अप्रभावित रहते हुए दिया जाता है। इसके पीछे सोच यही होती है कि बाजार में फसलों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर किसानों पर न पड़े। इसीलिए, फसलों के हर मौसम से पहले सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश पर एमएसपी तय करती है।


ताजा निर्णय के तहत सामान्य धान की एमएसपी में 69 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2369 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जबकि तुअर दाल की एमएसपी में 450 रुपये की उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। इसके अतिरिक्त ज्वार, बाजरा और रागी इत्यादि फसलों की एमएसपी भी बढ़ा दी गई है।

ध्यान देने वाली बात है कि यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर तय करने की बात थी। एमएसपी में वृद्धि की यह घोषणा इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह ऐसे समय में की गई है, जब किसान बढ़ती लागत, असामान्य मौसमी प्रवृत्तियों और बाजार की अस्थिरता से जूझ रहे हैं।

धान, जो देश के बड़े हिस्से में खरीफ की मुख्य फसल है, की एमएसपी में बढ़ोतरी से लाखों किसान लाभान्वित होंगे। दूसरी तरफ, तुअर दाल और अन्य दलहनी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी से दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए जरूरी प्रोत्साहन मिलेगा, जो देश की खाद्य सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

अक्सर देखा गया है कि एमएसपी में वृद्धि का फायदा बड़े किसानों या बिचौलियों तक सीमित रह जाता है। ऐसे में यह समझने की भी जरूरत है कि एमएसपी में बढ़ोतरी की घोषणा तभी सार्थक साबित होगी, जब इसे प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। इसके लिए सरकार को पारदर्शी खरीद तंत्र, बेहतर भंडारण सुविधाएं और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत है।

कैबिनेट का यह निर्णय यकीनन किसानों के लिए एक राहत भरा कदम है, लेकिन इसके साथ ही सरकार को दीर्घकालिक कृषि सुधारों पर भी ध्यान देना होगा। किसानों की आय व उत्पादकता में वृद्धि के लिए सिंचाई, गुणवत्तापूर्ण बीज, तकनीकी सहायता व प्रशिक्षण पर तो गौर करना होगा ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिहाज से भी यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिले।

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