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PM Modi: विश्व मंच पर मोदी का कद बता देती हैं हाल की यात्राएं, व्यक्तिगत रिश्तों को कला में बदलने की चर्चाएं
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पीएम मोदी को मिला फिजी का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- फोटो :
PMO/Social Media
विस्तार
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जापान, पापुआ न्यूगिनी और ऑस्ट्रेलिया में जैसा सम्मान और गर्मजोशी भरा व्यवहार मिला, वह उनके लिए जरूरी था। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया व पापुआ न्यूगिनी के नेताओं की ओर से नरेंद्र मोदी की तारीफों से तो ऐसा लग रहा था कि शब्दों के इस्तेमाल में वे एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं। हिरोशिमा में जी-7 की बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन खुद मोदी से मिलने आए और मजाकिया लहजे में कहा कि वह उनका ऑटोग्राफ चाहते हैं।
बाइडन का मोदी के प्रति यह रुख अमेरिका में रह रहे उन भारतीयों में हमारे प्रधानमंत्री की अपार लोकप्रियता का प्रमाण है, जो अगले महीने मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान वाशिंगटन में उनके सम्मान में आयोजित डिनर में ज्यादा संख्या में शिरकत करना चाहेंगे। हिरोशिमा में बाइडन ने मोदी के योगदानों को भी रेखांकित करते हुए कहा, 'आपने जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में संजीदगी का परिचय दिया, तो हिंद-प्रशांत को भी प्रभावित किया।' पापुआ न्यूगिनी के प्रधानमंत्री ने हवाई अड्डे पर मोदी की अगवानी करते हुए भारतीय परंपरा के अनुरूप पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। उन्होंने मोदी को विश्व गुरु और ग्लोबल साउथ का नेता बताते हुए उन जैसे छोटे देशों के मुद्दों और चिंताओं को विश्व मंच पर वाणी देने का निवेदन किया। मोदी पापुआ न्यूगिनी जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे और इस छोटे-से देश का रणनीतिक महत्व यह है कि चीन को रोकने के लिए अमेरिका ने हाल ही में उसके साथ सुरक्षा समझौता किया। चीन ने पिछले साल सोलोमन द्वीप पर अपना नौसैनिक आधार स्थापित करने के लिए उससे समझौता किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिजी के प्रधानमंत्री से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया, तो पोर्ट मोरस्बी की यात्रा के दौरान पापुआ न्यूगिनी के गवर्नर जनरल ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक अलंकरण से विभूषित किया। चीन के वर्चस्ववादी रवैये के विपरीत प्रधानमंत्री मोदी ने साझेदारी की बात करते हुए कहा, 'हम बगैर किसी हिचक के अपनी क्षमता और अनुभवों को आपके साथ साझा करने के लिए तैयार हैं। चाहे वह डिजिटल तकनीक हो या अंतरिक्ष विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा हो या खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन हो या फिर पर्यावरण संरक्षण, हम आपके साथ हैं।'
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मोदी का एक रॉक स्टार की तरह जिस तरह स्वागत हुआ, उससे अमेरिका के मेडिसन स्कॉवयर में मोदी के स्वागत की याद ताजा हो गई। मोदी ने अपने भाषण में चिर-परिचित शैली में अपनी सरकार की नौ साल की उपलब्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नए भारत का रूपांतरण हो रहा है। दुनिया की निगाह भारत पर है, जो यह जानना चाहती है कि भारत क्या सोच रहा है। मोदी निर्विवाद रूप से उस नए भारत के सबसे प्रभावी ब्रांड एम्बेसडेर हैं, जिसे वह निर्मित कर रहे हैं और जो वैश्विक मुद्दों तथा खासकर ग्लोबल साउथ की मुखर आवाज बनेगा। मोदी के मुताबिक, आपसी विश्वास तथा सम्मान भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों के मजबूत आधार हैं, जो तीन सी (कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और करी), तीन डी (डेमोक्रेसी, डायस्पोरा और दोस्ती) और तीन ई ( इनर्जी, इकनॉमी और एजुकेशन) के जरिये आगे बढ़े हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री अल्बनीज ने मोदी को 'बॉस' कहा, तो मोदी ने बातचीत के दौरान उनका ध्यान वहां हो रहे भारतीय मंदिरों पर हमले की ओर दिलाया।
जापान के प्रधानमंत्री ने जी-7 की शिखर बैठक में भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया और वियतनाम को आमंत्रित कर ग्लोबल साउथ की उभरती अर्थव्यवस्थाओं से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की। अमेरिका के नेतृत्व में जी-7 मुख्यत: पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें जापान अकेला गैर पश्चिमी देश है।
प्रधानमंत्री की स्वदेश वापसी के बाद उनके स्वागत में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने, जो तीन देशों के दौरे में उनके साथ थे, कहा, 'पैंतालीस साल लंबे अपने कूटनीतिक करिअर में मैंने किसी दूसरे नेता का इतना उत्साहपूर्ण तरीके से स्वागत नहीं देखा।' मोदी की करिश्माई छवि का इससे बड़ा प्रमाण और क्या होगा कि जिस पाकिस्तान में सरकार और लोग भारत के खिलाफ सैकड़ों बातें कहते हैं, वहां का मीडिया और युवा मोदी की उपलब्धियों से अभिभूत हैं और अपने नेताओं की उनसे तुलना कर रहे हैं! नरेंद्र मोदी के जादू का राज क्या है? दरअसल अपनी नेतृत्व क्षमता से उन्होंने लोगों को अपना मुरीद बना लिया है। जनता ऐसे नेता की ओर देखती है, जो आत्मविश्वास का प्रतीक हो और मोर्चे पर उतरकर नेतृत्व करे; जो न सिर्फ लगातार काम करे, बल्कि अपनी नीतियों से असंख्य गरीब लोगों का जीवन बदल दे; जो विदेशी आक्रामकता का मुकाबला तो करे ही, कोविड-19 जैसी आपदा के समय देश का कुशलतापूर्वक नेतृत्व भी करे।
प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी ने ज्यादा विदेश यात्रा नहीं की थी, पर आज वह सर्वाधिक विदेश यात्रा करने वाले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो शिखर बैठकों और वैश्विक मंचों पर अपने विदेशी समकक्षों के साथ बेहद आसानी से संवाद और संपर्क स्थापित कर लेते हैं। कूटनीति में व्यक्तिगत संबंधों को उन्होंने इस कुशलता से कला में बदला है कि सामने वाला अगर बिल्कुल भिन्न प्रकृति का हो, तब भी उनसे वह गर्मजोशी भरा रिश्ता बना लेते हैं। बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के बाद जो बाइडन से भी उनका वैसा ही संबंध है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से उनके वैसे ही रिश्ते हैं, जैसे उनके दो पूर्ववर्तियों-डेविड कैमरन और बोरिस जॉनसन से थे। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टॉनी एबॉट की तरह अल्बनीज से उनके मधुर संबंध हैं। जापान के प्रधानमंत्री किशिदा से मोदी के रिश्ते पूर्व (दिवंगत) प्रधानमंत्री शिंजो आबे जैसे ही सम्मान व भरोसे से भरे हैं।
आजकल लोकतंत्र और अधिनायकवादी शासन की न सिर्फ खूब बातें होती हैं, बल्कि मोदी और बाइडन ने इस बारे में बताया है कि लोकतंत्र किस तरह जनता के हित में काम करता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नागरिकों और नेताओं को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय कानून के शासन को फलने-फूलने देना चाहिए।