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पाकिस्तान : बाजवा के शांति संदेश की वजह, उथल-पुथल के बीच क्या है पड़ोसी मुल्क की मंशा

Sudhindra Kulkarni सुधींद्र कुलकर्णी
Updated Sat, 16 Apr 2022 07:26 AM IST
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सार
भारत के नजरिये से पाकिस्तान के हालिया उथल-पुथल के दौरान दो सकारात्मक बातें हुईं। सर्वप्रथम तो यही कि इमरान खान ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की जमकर प्रशंसा की। दूसरी यह कि वहां के सैन्य प्रमुख बाजवा ने फिर भारत के पास शांति संदेश भेजा है, जिसे मोदी सरकार को खारिज नहीं करना चाहिए।
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Pakistan: reason for Army Chief General Qamar Javed Bajwas peace message, what is intention of neighboring country amidst the turmoil
पाकिस्तानी सेना अध्यक्ष कमर जावेद बाजवा - फोटो : Daily Times Pakistan

विस्तार

पाकिस्तान ने हाल ही में एक गंभीर सांविधानिक संकट का सामना किया, जिसे वहां के सुप्रीम कोर्ट ने टाल दिया। नेशनल असेंबली में बहुमत गंवाने के बावजूद सत्ता में बने रहने की कोशिश का खामियाजा भुगतने के बाद इमरान खान ने इस्तीफा दे दिया है। शाहबाज शरीफ नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। भारत के नजरिये से इस उथल-पुथल के दौरान दो सकारात्मक बातें हुईं। सर्वप्रथम तो यही कि अमेरिका के नेतृत्व में अपनी सरकार गिराने की विदेशी साजिश का आरोप लगाने वाले इमरान खान ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की जमकर प्रशंसा की। और इससे भी महत्वपूर्ण दूसरी बात यह है कि पाकिस्तान के ताकतवर सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने एक बार फिर भारत के पास शांति का संदेश भेजा है, जिसे मोदी सरकार को खारिज नहीं करना चाहिए।



विगत दो अप्रैल को 'इस्लामाबाद सिक्योरिटी डॉयलॉग' को संबोधित करते हुए बाजवा ने कहा, 'पाकिस्तान कश्मीर विवाद सहित सभी लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति का इस्तेमाल करने में विश्वास रखता है और अगर भारत ऐसा करने के लिए सहमत होता है, तो वह इस मोर्चे पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है। हम मानते हैं कि हमारे क्षेत्र में शांति और स्थिरता साझा क्षेत्रीय समृद्धि और विकास के लिए जरूरी हैं। हमारे दरवाजे सभी पड़ोसियों के लिए खुले हैं।' 


अपनी बात को घरेलू स्तर तक पहुंचाने के लिए उन्होंने सावधानीपूर्वक तर्क का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में दुनिया का एक तिहाई हिस्सा कहीं न कहीं, किसी न किसी प्रकार के संघर्ष में शामिल है, ऐसे में यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने क्षेत्र से आग की इन लपटों को दूर रखें। उनकी यह चेतावनी प्रासंगिक है। क्या भारत या पाकिस्तान युद्ध की लपटों में जले बिना कश्मीर पर अपने-अपने दावों को साकार करने के लिए यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के उदाहरण का अनुकरण कर सकते हैं? नहीं।

यह पहली बार नहीं है, जब बाजवा ने भारत के साथ शांति के पक्ष में बात की है। वह भारत को नहीं, बल्कि धार्मिक अतिवाद को पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हैं। पिछले साल फरवरी में, उन्होंने साहसपूर्वक कहा था, 'हम आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के आदर्श के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध हैं। यह सभी दिशाओं में शांति का हाथ बढ़ाने का समय है।' बाजवा के रचनात्मक दृष्टिकोण का ठोस परिणाम यह हुआ कि पिछले साल 25 फरवरी को दोनों देशों ने नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम की घोषणा की। 

अब एक साल से ज्यादा समय से सीमापार से लगातार गोलीबारी रुकी है, जिसमें दोनों देशों के हजारों सैनिक एवं निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवाते थे। यह किसी भी तरह से छोटी उपलब्धि नहीं है। पिछले साल मार्च में उन्होंने कहा, यह अतीत को भूलने और आगे बढ़ने का समय है। मौजूदा चुनौतियों के लिए अतीत के विफल समाधानों का लागू करना भोलापन है। उन्होंने पाकिस्तान और भारत, दोनों देशों से 'अतीत की कटुता में नहीं फंसने, संघर्ष को बढ़ावा न देने और युद्ध, बीमारी और विनाश के एक और दुश्चक्र में न फंसने' का आग्रह किया। 

इसके बजाय, उन्होंने कहा कि उन्हें 'आगे बढ़ना, तकनीकी और वैज्ञानिक प्रगति के लाभांश को अपने लोगों तक पहुंचाना तथा शांति और समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत करना' चाहिए। उन्होंने दो अप्रैल को अपने ताजा भाषण में इस संदेश को और भी स्पष्ट करते हुए कहा, 'मेरा मानना है कि यह समय क्षेत्र के राजनीतिक नेतृत्व को अपने भावनात्मक और अवधारणात्मक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर इस क्षेत्र के लगभग तीन अरब लोगों के जीवन में शांति एवं समृद्धि लाने के लिए इतिहास की बेड़ियों को तोड़ने का है।'

पाकिस्तान की सेना भारत के साथ शांति की बात क्यों कर रही है? इसका एक कारण तो यह है कि जनरल बाजवा वास्तव में शांतिप्रिय व्यक्ति हैं। यह मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से जानता हूं। दूसरा तथ्य यह है कि गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान ने अपने सैन्य नेतृत्व को आत्मनिरीक्षण करने के लिए मजबूर किया है। पाकिस्तान रक्षा मद में करीब दस अरब डॉलर खर्च करता है और उसकी सेना में करीब साढ़े पांच लाख जवान हैं। जैसा कि जनरल बाजवा ने स्वयं कहा, 'हमने एक अध्ययन किया है, जिससे हम सेना के आकार को अगले पांच वर्षों में काफी हद तक कम कर सकते हैं। 

चूंकि पाकिस्तान को अपने नागरिकों की चिंता है, इसलिए हम अपने वादे पूरा करना चाहते हैं। आज पाकिस्तान अपने आर्थिक और सामरिक लक्ष्यों के चौराहे पर खड़ा है। हमारे पास उत्तर और दक्षिण के बीच संपर्क है-पाकिस्तान से अफगानिस्तान, फिर अफगानिस्तान से मध्य एशियाई गणराज्य और रूस तक। हम पूर्व से पश्चिम (भारत से ईरान) तक संपर्क बनाना चाहते हैं। इससे व्यापार बढ़ेगा और पाकिस्तान सहित क्षेत्र के अन्य देशों को लाभ होगा। और पाकिस्तान एक आधुनिक और दूरदर्शी देश बनेगा।' जब उनसे पूछा गया कि वह इसे किस तरह साकार करेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि 'यह पाकिस्तान और भारत के लिए आगे बढ़ने का समय है। आइए, हम साथ बैठकर कश्मीर सहित अपने सभी मुद्दों को सुलझाएं। हम सबसे पहले विकास चाहते हैं।'

भारत में बहुत से लोग मानते हैं कि पाकिस्तान चीन की कठपुतली बन गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। जनरल बाजवा ने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान किसी विदेशी शक्ति के खेमे का अनुयायी नहीं बनना चाहता है और अमेरिका सहित सबके साथ दोस्ताना संबंध बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अपनी स्वतंत्र विदेश नीति होनी चाहिए। पाकिस्तान यदि भारत से मित्रता करता है और परस्पर लाभकारी पड़ोसी रिश्ते अपनाता है, तो वास्तव में उसकी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की क्षमता बढ़ जाएगी। भारत के साथ सहयोग पाकिस्तान को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा। 

आर्थिक रूप से मजबूत और आंतरिक रूप से सामंजस्यपूर्ण पाकिस्तान अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और अन्य शक्तियों के साथ अपने संबंधों को बेहतर ढंग से संतुलित कर सकता है। जनरल बाजवा इस वर्ष नवंबर में सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इसलिए सिर्फ छह महीने ही बचे हैं, जिसमें भारत और पाकिस्तान फिर से बातचीत शुरू कर सकते हैं और एक सार्थक उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे पश्चिमी पड़ोसी देश के शांति संदेश का सकारात्मक जवाब देना चाहिए, जो उसके सैन्य प्रमुख की ओर से आया है।

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