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अमेरिका से कारोबार की नई चुनौती

Wed, 06 Mar 2019 07:14 PM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 06 Mar 2019 07:14 PM IST
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New Challenge of Business with America
जयंतीलाल भंडारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत अमेरिका पर बहुत अधिक शुल्क लगाने वाला देश है। ऐसे में अब अमेरिका भारतीय उत्पादों पर जवाबी शुल्क (मिरर टैक्स) लगा सकता है। ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिल हार्ले-डेविडसन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम भारत को मोटरसाइकिल भेजते हैं, तो उस पर 100 प्रतिशत का शुल्क लगाया जा रहा था, जिसे घटाकर 50 फीसदी किया गया। लेकिन जब भारत हमें मोटरसाइकिल का निर्यात करता है, तो हम कुछ भी शुल्क नहीं लगाते हैं। ट्रंप ने कहा कि अब समय आ गया है कि अमेरिका भी परस्पर बराबर जवाबी शुल्क लगाएगा।


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भारतीय उत्पादों पर शुल्क लगाने संबंधी ट्रंप का बयान भारत के अमेरिका के साथ कारोबार के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे शुल्कों से बचने के लिए रणनीति बनाने की जरूरत है। पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए भारत से आयातित 50 उत्पादों पर शुल्क मुक्त की रियायत खत्म कर दी थी। इनमें इस्पात, एल्यूमीनियम, हैंडलूम और कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए उत्पाद शामिल थे। चूंकि भारत और अमेरिका के बीच पिछले वर्ष 2017-18 में 100 अरब डॉलर से अधिक का कारोबार हुआ है तथा अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैश्विक कारोबारी सहयोगी है, लिहाजा नए शुल्कों से बचने के लिए रणनीति बनाने की जरूरत होगी।

गौरतलब है कि विगत 14 फरवरी को अमेरिका तथा भारत सरकार के आधिकारियों और सीईओ के बीच कारोबार तथा निवेश को लेकर मतभेदों के समाधान हेतु उच्च स्तरीय बातचीत हुई। अमेरिका और भारत ने वित्तीय सेवा, स्वास्थ्य देखरेख और सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय कारोबार और निवेश बढ़ाने के लिए तीन विशेष ग्रुप बनाने का निर्णय लिया। वहीं डाटा संग्रहण, कारोबारी असंतुलन कम करना, भारत की प्रस्तावित ई-कॉमर्स नीति पर अमेरिकी चिंता और दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे पर लगाए जा सकने वाले जवाबी शुल्कों जैसे मसलों को इस बातचीत में शामिल नहीं किया गया।

इस बातचीत में अमेरिका ने अपनी कारोबारी योजना में 'तरजीह की सामान्य प्रणाली जनरलाइज्ड सिस्टम प्रेफरेंस (जीएसपी) को रद्द करने के विचार को आगे नहीं बढ़ाया है, जिसके माध्यम से 2,000 भारतीय उत्पादों का शुल्क मुक्त कारोबार अमेरिका में करने की अनुमति मिली हुई है। अमेरिका से मिली व्यापार छूट के तहत भारत को करीब 5.6 अरब डॉलर के निर्यात पर शून्य सीमा शुल्क देना पड़ता है। जीएसपी के तहत भारत को एक विकासशील देश होने के नाते अमेरिका को बहुत-सी वस्तुओं का शुल्क-मुक्त निर्यात करने का मौका मिलता है। आंकड़े बता रहे हैं कि इस योजना से अमेरिका को जितने राजस्व का नुकसान होता है, उसका एक चौथाई भारतीय निर्यातकों को प्राप्त होता है।

उल्लेखनीय है कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और वाणिज्यिक बातचीत 2015 में शुरू हुई थी। दो सालाना बैठकों के बाद यह फैसला हुआ है कि कारोबार संबंधी मसलों को सुलझाने के लिए अलग से भारत-अमेरिका वाणिज्यिक बातचीत होगी। 2018 में दोनों देशों के बीच कारोबारी मसलों पर खींचतान बनी रही। भारत-अमेरिका के बीच कारोबार संबंधी विवाद जुलाई, 2018 में उच्च स्तर पर पहुंच गया, जब भारत ने 29 कृषि उत्पादों पर शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। अमेरिका से आने वाले सेब, जैतून और अखरोट पर 50 प्रतिशत ज्यादा कर लगाने के अलावा कुछ औद्योगिक उत्पाद भी निशाने पर रहे हैं। भारत ने इन उत्पादों पर कर लगाने का फैसला पांच बार टाला है।

इसमें दोमत नहीं है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैश्विक कारोबारी सहयोगी है। ऐसे में भारत द्वारा दो मार्च को ट्रंप के द्वारा अधिक शुल्क लगाने के एलान के साथ संरक्षणवादी बनते अमेरिका को भारत के हितों के लिए राजी करने के विशेष प्रयास भी जरूरी हैं।

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