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निष्पक्ष चुनाव के लिए पहल: सी-विजिल एप जैसी तकनीक बेहद कारगर, आदर्श चुनाव संहिता के उल्लंघन पर नकेल
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निर्वाचन आयोग (फाइल)
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तकनीक का देश के चुनाव में किस प्रकार सही दिशा में प्रयोग हो, इसके लिए चुनाव आयोग लगातार नई पहल कर रहा है। इस बार जिला निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से देश भर के हर जिला में सी-विजिल एप्प के बारे में आम लोगों को जागरूक करने के अभियान व्यापक स्तर पर चलाए जा रहे हैं, ताकि आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन कम से कम हो सके।
चुनाव में तकनीक के बेहतर उपयोग का सबसे सटीक उदाहरण भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी सी-विजिल मोबाइल एप्प है। अभी पहले चरण के मतदान होने में दो सप्ताह से अधिक समय बाकी है, लेकिन सी-विजिल एप्प पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतें लगातार आ रही हैं। 16 मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश भर में लोकसभा और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम विधानसभाओं सहित अन्य राज्यों के विधानसभाओं में खाली सीटों के उपचुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी। मात्र 13 दिनों में सी-विजिल पर 79,000 से अधिक शिकायतें आई हैं, जिसमें 99 प्रतिशत से अधिक शिकायतों का समाधान करने का दावा भी निर्वाचन आयोग द्वारा किया गया है। उपरोक्त 99 प्रतिशत शिकायतों में से लगभग 89 प्रतिशत शिकायतों का हल 100 मिनट के भीतर किया गया है, जो सी-विजिल एप की खासियत को दर्शाता है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अभी प्राप्त 58,500 से अधिक शिकायतें अवैध होर्डिंग्स और बैनरों के विरुद्ध प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा, 1,400 से अधिक शिकायतें पैसे, उपहार और शराब वितरण से संबंधित थीं। लगभग 2,500 शिकायतें संपति के विरूपण से संबंधित हैं। आग्नेयास्त्रों के प्रदर्शन और भयादोहण से संबंधित 535 शिकायतों में से 529 शिकायतों का समाधान पहले ही किया जा चुका है।
उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग की यह पहल आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन करने वालों पर निगरानी के लिए कारगर कदम साबित होगी। बता दें कि वर्तमान में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन संबंधी शिकायतें करने और उसे ट्रैक करने के लिए द्रुत सूचना चैनल की कमी है। आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट में देरी के परिणामस्वरूप निर्वाचन आयुक्त के उड़न दस्ते, जिन्हें आदर्श आचार संहिता को लागू करने का कार्य सौंपा गया है, अक्सर अपराधियों का पता नहीं लगा पाते हैं। इसके अलावा, चित्र या वीडियो के रूप में किसी भी छेड़छाड़ रहित साक्ष्य की कमी घटना घटने के उपरांत शिकायत की सत्यता स्थापित करने में एक बड़ी बाधा थी।
आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के बारे में इस सी-विजिल एप्प के जरिये कोई भी आम व्यक्ति शिकायत कर सकता है। इसमें शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखने का भी प्रावधान है। शिकायत दर्ज करने से पहले आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने वाली गतिविधि की केवल एक तस्वीर या दो मिनट का वीडियो बनाकर उसके बारे में सक्षिप्त जानकारी देनी होती है। शिकायत के साथ कैप्चर की गई जीआईएस जानकारी स्वतः इसे संबंधित जिला नियंत्रण कक्ष को भेज दी जाती है, जिससे फ्लाइंग स्क्वॉड को कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर भेज दिया जाता है। जैसे ही शिकायत सी-विजिल एप्प पर भेजी जाती है, शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी प्राप्त होती है, जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मोबाइल पर शिकायत को ट्रैक कर सकता है।
एक साथ काम करने वाले तीन कारक सी-विजिल को सफल बना रहे हैं। उपयोगकर्ता वास्तविक समय में ऑडियो, फोटो या वीडियो कैप्चर करते हैं और शिकायतों के प्रति समयबद्ध अनुक्रिया के लिए 100 मिनट की गणना शुरू हो जाती है। जैसे ही उपयोगकर्ता उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए सी-विजिल में अपना कैमरा चालू करता है, एप्प स्वचालित रूप से जियो-टैंगिंग सुविधा सक्षम कर देता है। इसका मतलब यह है कि उड़न दस्ते रिपोर्ट किए गए उल्लंघन का सटीक लोकेशन जान सकते हैं। लोगों द्वारा खींचे गए इमेज को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। कोई व्यक्ति गुमनाम रूप से भी शिकायतें दर्ज करा सकता है।
जाहिर है, तकनीक के उपयोग से न केवल पूरी चुनाव प्रक्रिया को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष बनाया जा सकता है, बल्कि सभी दलों एवं प्रत्याशियों के लिए समान व्यवस्था कायम की जा सकती है। चुनाव को सुचारू ढंग से संपन्न कराने से लोकतंत्र की मजबूती सुनिश्चित होती है।