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घर के भेदिये: संदिग्ध जासूसों में व्यवसायी-यूट्यूबर-छात्र-गार्ड और दिहाड़ी मजदूर.. गहराई तक फैल चुकी हैं जड़ें
Wed, 21 May 2025 08:06 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 21 May 2025 08:06 AM IST
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हाल ही में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े करीब बारह संदिग्ध जासूसों की गिरफ्तारी की है, जो सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता को साबित तो करती ही है, इस बात को भी रेखांकित करती है कि देश की सुरक्षा को खतरा सिर्फ सीमा पार से ही नहीं है, बल्कि घर के भेदियों से भी है, जो कई राज्यों में सक्रिय रहकर संवेदनशील जानकारियां दुश्मनों तक पहुंचाते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये संदिग्ध लोग किसी एक खास वर्ग या पृष्ठभूमि से नहीं आए; जासूसी के आरोप में गिरफ्तार इन लोगों में व्यवसायी, यूट्यूबर, छात्र, सुरक्षा गार्ड, दिहाड़ी मजदूर आदि शामिल हैं, जिन्होंने संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करने और उसे प्रसारित करने के लिए मोबाइल एप और जेल के कैदियों का इस्तेमाल किया, जिसमें से कुछ को उनकी गतिविधियों के लिए पैसे भी मिले।
उत्तर प्रदेश से पकड़ा गया व्यवसायी शहजाद हो, यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा हो, परास्नातक छात्र देवेंद्र सिंह ढिल्लन हो, मुर्तजा अली, गजाला, यामिन हो या फिर अन्य, परेशान करने वाली बात यह है कि ये वे चेहरे हैं, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हमारे आसपास ही होते हैं। यह विविधता इस खतरे की गंभीरता को भी रेखांकित करती है कि अब दुश्मन किसी खास प्रोफाइल को नहीं, बल्कि ‘आसान पहुंच’ और ‘सूचना की उपलब्धता’ को प्राथमिकता दे रहा है और लगातार हमारी सैन्य, तकनीकी और रणनीतिक जानकारियां हासिल करने के प्रयास में लगा है।
मुमकिन है कि आर्थिक तंगी, दबाव या लालच ने इन लोगों को गलत राह पर धकेला हो, लेकिन यह स्थिति हमारे समाज और मनुष्य की अंतर्निहित कमियों की ओर इशारा तो करती ही है। इन संदिग्धों पर शिकंजा कसने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ होनी चाहिए, लेकिन यह केवल शुरुआत है।
हमें यह समझना होगा कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया और इंटरनेट ने जहां आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं इस तरह की आशंकाओं को और बढ़ाया है। सुरक्षा एजेंसियां तो अपनी मुस्तैदी दिखाकर ऐसे भेदियों को उनके अंजाम तक पहुंचाएंगी ही, नागरिक समाज का भी कर्तव्य है कि वे अपने आसपास के लोगों पर नजर रखें और उनकी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा बलों को दें।
देश की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता, इसलिए ऐसे लोगों को उनके गुनाहों की सख्त सजा दिलवाने के साथ-साथ आईएसआई समर्थित जासूसी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंकना जरूरी है। सुरक्षा व्यवस्था की पुनर्समीक्षा के साथ-साथ जन-जागरूकता और डिजिटल सुरक्षा पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।