फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Historic Amid tensions with US India EATF TEPA comprehensive economic agreement effective from today

ऐतिहासिक अवसर: अमेरिका से तल्खी के बीच भारत-EATF का TEPA आज से प्रभावी, अपनी तरह का पहला व्यापक आर्थिक समझौता

Wed, 01 Oct 2025 05:08 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 01 Oct 2025 05:08 AM IST
विज्ञापन
सार
अमेरिका की मनमानी टैरिफ नीति के बीच भारत और ईएफटीए के बीच आज से प्रभावी होने जा रहा टीईपीए इस मायने में ऐतिहासिक है कि यह किसी यूरोपीय समूह के साथ पहला व्यापक आर्थिक समझौता है। उम्मीद है कि इससे भारत की दूसरे देशों व समूहों के साथ चल रहीं व्यापार वार्ताओं को ऊर्जा मिलेगी।
loader
Historic Amid tensions with US India EATF TEPA comprehensive economic agreement effective from today
भारत और ईएफटीए के बीच आज से प्रभावी होगा TEPA - फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी

विस्तार

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) और भारत के मध्य आज से प्रभावी होने जा रहा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) कई मायनों में ऐतिहासिक होने के साथ यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सशक्त मौजूदगी को भी रेखांकित करता है। गौरतलब है कि ईएफटीए एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना चार यूरोपीय देशों-आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन-ने मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए की थी। भारत और ईएफटीए के बीच बातचीत 2008 में शुरू हुई थी और 21 दौर की बातचीत के बाद दस मार्च, 2024 को यह समझौता संपन्न हुआ।



समझौते के क्रियान्वयन के लिए चार यूरोपीय देशों से मंजूरी मिलनी जरूरी थी, इसी वजह से इसमें कुछ देरी हुई। यह ऐतिहासिक इसलिए भी है, क्योंकि टीईपीए भारत का किसी यूरोपीय समूह के साथ पहला व्यापक समझौता है और इसके साथ ही, यह पहली बार है जब भारत ने किसी आर्थिक समझौते में बाजार-पहुंच को निवेश की दृढ़ प्रतिबद्धताओं से जोड़ा है।


समझौते के तहत ईएफटीए की चार अर्थव्यवस्थाओं ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें पहले दशक में 50 और अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर का निवेश होगा। यही नहीं, इस समझौते से ईएफटीए ब्लॉक से आयातित करीब 80-85 फीसदी वस्तुओं पर शुल्क में कमी आएगी, जबकि लगभग 99 फीसदी भारतीय निर्यातकों को उनके बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। हालांकि, सरकार ने डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए संरक्षणवादी रुख अपनाया है और घरेलू हितों की रक्षा के लिए उन्हें इससे बाहर रखा गया है।

इस समझौते से आगामी डेढ़ दशक में करोड़ों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। वैश्विक युद्धों और अमेरिकी टैरिफ के वर्तमान अनिश्चित दौर ने दुनिया को यह सिखाया है कि एक ही क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक हो सकती है। इस समझौते से भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का अधिक विश्वसनीय हिस्सा बन सकेगा।

दूसरी तरफ, अमेरिका, ओमान, पेरू, चिली और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ भारत की बातचीत चल रही है, तो कतर व बहरीन भी भारत के साथ ऐसे समझौतों की इच्छा जता चुके हैं। जाहिर है कि भारत अपने विशाल श्रमबल, बाजार और सुधारोन्मुख नीतियों के कारण देशों के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है। ईएफटीए देश यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं, लेकिन इनके साथ हुआ समझौता यकीनन भारत-यूरोपीय संघ के बीच चल रही व्यापार वार्ता को गति देगा, जिसके इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed