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भीड़, भगदड़ और हादसा: नई दिल्ली स्टेशन जैसे लोमहर्षक मंजर की पुनरावृत्ति रोकी जा सके, ऐसे कदम उठाएं रेल मंत्री

Mon, 17 Feb 2025 05:00 AM IST
अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 17 Feb 2025 05:00 AM IST
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सार
शनिवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़ में अफरा-तफरी के बाद के दृश्य अत्यंत लोमहर्षक हैं, जो एक बार फिर भारतीय रेल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। देश में भगदड़ से होने वाले हादसों का बढ़ना एक समग्र भीड़ प्रबंधन फ्रेमवर्क को विकसित करने की भी मांग करता है।
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Crowd stampede accident Railway Minister should take steps to prevent New Delhi station horror repeat
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन और लोग (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शनिवार को प्रयागराज की ट्रेन पकड़ने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़ में मची अफरा-तफरी के बाद के दृश्य अत्यंत लोमहर्षक हैं, जो एक बार फिर भारतीय रेल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। शुरुआती जांचों से यही पता चलता है कि यात्री महाकुंभ जाने के लिए प्रयागराज एक्सप्रेस की प्रतीक्षा कर रहे थे। इस बीच भुवनेश्वर राजधानी और स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के विलंब के आने की सूचना से उनके यात्री भी वहां एकत्र होने लगे।



तीनों ट्रेनों की भीड़ प्लेटफॉर्म-14 पर थी, तभी एक अन्य ट्रेन के प्लेटफॉर्म-16 पर आने की घोषणा हुई, तो एकाएक भीड़ दूसरे प्लेटफॉर्म पर भागी, एक यात्री सीढ़ियों से फिसलकर गिर गया और स्थितियां बेकाबू हो गईं। नई दिल्ली देश के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक है, जहां करीब पांच लाख यात्री रोज आते हैं। ऐसे में, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था होनी चाहिए थी, जिसका यहां अभाव दिखा। बताया जा रहा है कि हादसे के दिन एक घंटे के भीतर करीब 1500 जनरल टिकट बेचे गए, जिससे स्टेशन पर भीड़ बढ़ती गई और फिर स्थितियां काबू से बाहर हो गईं।


सवाल उठता है कि महाकुंभ में मौनी अमावस्या के दौरान हुए हादसे के बाद भी क्या भारतीय रेल को ऐसी भीड़ का अंदाजा नहीं था और अगर था, तो ऐसी किसी अनहोनी की दशा में बचाव की क्या योजना बनाई गई थी? इसे विडंबना के सिवाय क्या कहा जाए कि स्टेशन पर हालात बेकाबू होने और लोगों की मौतों के बाद भी रेलवे के अधिकारी हादसे को अफवाह बताते रहे और देर रात तक उन्होंने आधिकारिक बयान देने की जरूरत तक नहीं समझी। इसके ठीक-ठीक कारण तो जांच के बाद ही पता चलेंगे-हालांकि ऐसे पिछले हादसों के ही क्या कारण पता चले और उनसे क्या सबक सीखा गया, कोई नहीं जानता। बावजूद इसके कि 2013 में भी कुंभ के दौरान प्रयागराज स्टेशन पर मची भगदड़ से 36 लोग मारे गए थे, रेल प्रशासन ऐसी किसी आशंका को लेकर सोया हुआ था, तो यह शर्मनाक लापरवाही ही कही जाएगी।

हाथरस, बागपत और फिर मौनी अमावस्या वाले दिन प्रयागराज में-पिछले कुछ समय में जिस तरह से आए दिन भगदड़ की वजह से हादसे हुए हैं, उन्हें देखते हुए भगदड़ को एक ज्वलंत समस्या कहना अतिरंजना नहीं होगा। ऐसे में, एक समग्र भीड़ प्रबंधन फ्रेमवर्क विकसित करने की जरूरत है। रही बात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसे की, तो गलती जहां भी हो, खोजी जानी चाहिए और सुधारी भी जानी चाहिए। विपक्ष तो अपनी मांग रखेगा ही, लेकिन रेल मंत्री कम से कम ऐसे कदम जरूर उठाएं, जिनसे ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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