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Black hole: ब्लैक होल रोज एक सूर्य को खा रहा है, रोशनी इतनी कि 12 अरब प्रकाश वर्ष दूर पृथ्वी पर दिख रही चमक
Sun, 25 Feb 2024 07:27 AM IST
यशोधन शर्मा
क्रिश्चियन वुल्फ, द कन्वर्सेशन
क्रिश्चियन वुल्फ, द कन्वर्सेशन
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 25 Feb 2024 07:27 AM IST
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Black Hole
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विस्तार
नर्क क्या होता है, इसका सबूत तो वैज्ञानिकों के पास नहीं है। लेकिन पूरे ब्रह्मांड की सबसे नारकीय जगह से परिचय कराने के लिए वैज्ञानिकों को धन्यवाद जरूर दिया जाना चाहिए। दरअसल, नेचर एस्ट्रोनॉमी के नए अंक में एक ब्लैक होल का वर्णन है, जो ब्रह्मांड की अब तक ज्ञात सबसे बड़ी डिस्क से घिरा है, जिसका नाम है जे 0529-4351, जो ब्रह्मांड की सबसे चमकीली वस्तु भी है। हालांकि, यह कोई पहला ब्लैक होल नहीं है। इससे पहले भी करीब दस लाख बड़े ब्लैक होल खोजे जा चुके हैं, जो आकाशगंगाओं के केंद्र में स्थित हैं और करोड़ों सूर्य के बराबर हैं। पर तेजी से बढ़ रहा ये जे 0529-4351 ब्लैक होल कुछ अलग है।
यह तारों व गैस के बादलों को अपनी ओर खींचता हुआ अंगूठी जैसी आकृति बना रहा है, जो केवल एक पैटर्न है, जिसे ब्लैक होल जल्द ही निगल लेता है। यह डिस्क घर्षण से जल्द ही गर्म हो जाती है, क्योंकि इसमें मौजूद सामग्री के एक साथ रगड़ने से इतनी चमक पैदा होती है कि 12 अरब प्रकाश वर्ष से ज्यादा दूर पृथ्वी पर ब्लैक होल की भोजन प्रक्रिया के उन्मादी दृश्य देखे जा सकते हैं। जे 0529-4351 की डिस्क सूर्य की तुलना में पांच हजार खरब गुना ज्यादा तेज प्रकाश उत्सर्जित कर रही है।
ऊर्जा की इतनी मात्रा तभी उत्सर्जित हो सकती है, जब ब्लैक होल हर दिन एक सूर्य खा रहा हो। इसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से 15 से 20 अरब गुना ज्यादा है। हालांकि हम पृथ्वी वालों को इससे डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि इसकी रोशनी को हम तक पहुंचने में 12 अरब साल से ज्यादा का समय लगा है, जिसका अर्थ है कि इसने काफी पहले ही बढ़ना बंद कर दिया होगा।
ब्लैक होल की भोजन प्रक्रिया का यह उन्माद युगों पहले ही खत्म हो चुका है, क्योंकि आकाशगंगाओं में चारों ओर तैरने वाली गैसें ज्यादातर तारों में बदल गई हैं और उन्होंने अरबों वर्षों में खुद को एक व्यवस्थित पैटर्न में स्थापित कर लिया है। अब वे ज्यादातर अपनी आकाशगंगाओं के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल के चारों ओर लंबी व साफ-सुथरी कक्षाओं में हैं।
सवाल उठता है कि यदि यह ब्रह्मांड की सबसे चमकीली चीज है, तो इसे अभी ही क्यों देखा गया? दरअसल, दुनिया के टेलिस्कोप इतना डाटा पैदा करते हैं कि खगोलशास्त्री इन्हें छानने के लिए परिष्कृत मशीन लर्निंग टूल का इस्तेमाल करते हैं। मशीन लर्निंग टूल अपनी प्रकृति से उन चीजों को ढूंढती है, जो पहले पाई गई चीजों के समान होते हैं। लेकिन जे 0529-4351 जैसे दुर्लभ स्तर को पहचानने के लिए हमने मशीन लर्निंग से परहेज करते हुए परंपरागत वेधशालाओं का उपयोग किया।