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पड़ताल: संतुलन बिठाने की कोशिशों के बीच बांग्लादेश ने दिया सुरक्षा गठबंधन से दूर रहने का संकेत
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शेख हसीना
- फोटो :
Agency (File Photo)
विस्तार
महाशक्ति देशों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच बांग्लादेश ने अपना हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण पेश किया है। यह नीति दस्तावेज शेख हसीना के अमेरिका, ब्रिटेन और जापान दौरे के ठीक पहले जारी किया गया है। ये देश हिंद प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख खिलाड़ी हैं। इसके अलावा, अमेरिका और जापान क्वाड के भी महत्वपूर्ण सदस्य हैं।
शेख हसीना जिन देशों की यात्रा करने वाली हैं, वे बांग्लादेश के महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक साझेदार हैं। वे बांग्लादेशी उत्पादों, विशेष रूप से रेडिमेड वस्त्रों के महत्वपूर्ण गंतव्य हैं। बांग्लादेश उन्हें प्रमुख विकास भागीदारों के रूप में भी शामिल करने की उम्मीद रखता है, जो खुद निम्न आय वर्ग वाले देशों से मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में आ गया है। लेकिन इसने आर्थिक क्षेत्र में उसके लिए विशेष चुनौतियां भी पेश की हैं।
बांग्लादेश जीएसपी जैसी कुछ सुविधाओं को खो देगा, जिसने उसके उत्पादों को इन बाजारों में प्रवेश करने में मदद की। ऐसे में उसे बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। इसलिए बांग्लादेश को हिंद-प्रशांत के प्रति अपने दृष्टिकोण में स्पष्टता लाने की आवश्यकता थी, ताकि वह अपने निर्यात बाजारों में विशेषाधिकार प्राप्त करता रहे। यह सर्वविदित है कि चीन ने हिंद-प्रशांत देशों में गहरी पैठ बना ली है, जिसमें दक्षिण एशिया भी शामिल है। वहां बढ़ते तनाव ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपनी हिंद-प्रशांत रणनीति के साथ सामने आने के लिए मजबूर कर दिया है।
ज्यादातर मामलों में चीन पर अंकुश इन रणनीतियों का केंद्रीय विषय है। चूंकि चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और सैन्य हार्डवेयर आपूर्तिकर्ता है, इसलिए बांग्लादेश के लिए हिंद-प्रशांत को लेकर एक स्टैंड लेना आसान नहीं रहा है। बांग्लादेश चीन की समुद्री सिल्क रोड परियोजना का भी सक्रिय भागीदार है, जो चीनी बीआरआई का हिस्सा है। इसके अलावा, चीन बांग्लादेश में कई ढांचागत परियोजनाओं में लगा हुआ है। दरअसल इन कोशिशों के जरिये चीन हिंद महासागर में घुसने और इसके सुरक्षा माहौल को बदलने की कोशिश करता रहा है।
चीन जानता है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की हिंद-प्रशांत रणनीति में सुरक्षा का मुद्दा शामिल है। बांग्लादेश में चीनी राजदूत याओ वेन ने ढाका में आयोजित एक संवाद में इसका संकेत दिया था। उन्होंने बांग्लादेश को क्वाड में शामिल होने के प्रति चेतावनी दी थी, जिस पर बांग्लादेश ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल माना। उसने चीन को यह भी संकेत दिया कि वह विदेश नीति में स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है।
हिंद-प्रशांत को लेकर अपना नजरिया स्पष्ट करने के लिए ही बांग्लादेश ने 'इंडो-पैसेफिक आउटलुक' जारी किया है। इसमें रणनीति (स्ट्रेटजी) के बदले दृष्टिकोण (आउटलुक) शब्द का प्रयोग जान-बूझकर किया गया है, क्योंकि इसका अर्थ नरम है। यह दस्तावेज जारी करते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्री शहरयार आलम ने कहा कि 'वैश्विक जीडीपी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सामूहिक हिस्सेदारी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रमुखता, बढ़ती जलवायु कार्रवाई और बढ़ती तकनीकी गतिशीलता बांग्लादेश के दीर्घकालिक लचीलेपन और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख निर्धारक हो सकते हैं।' दस्तावेज में बांग्लादेश 'सबकी साझा समृद्धि के लिए एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र की कल्पना करता है।' इस दस्तावेज के चार मार्गदर्शक सिद्धांत और पंद्रह उद्देश्य हैं।
मार्गदर्शक सिद्धांतों का मुख्य ध्यान शेख मुजीबुर रहमान की विदेश नीति के सिद्धांत 'सभी के प्रति मित्रता, किसी के प्रति द्वेष नहीं' पर है। यह संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में बल प्रयोग के त्याग की भी बात करता है। यह संयुक्त राष्ट्र संधियों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के पालन पर जोर देता है और सतत विकास के लिए रचनात्मक क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग चाहता है। दस्तावेज के उद्देश्य खंड में वह चाहता है कि सभी देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सुरक्षा पर मौजूदा तंत्र को मजबूत करें और अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएनसीएलओएस के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता और उड़ान भरने की कवायद को बनाए रखें।
बांग्लादेश भी खुले, पारदर्शी, नियम आधारित बहुपक्षीय प्रणालियों को बढ़ावा देना चाहता है, जो हिंद-प्रशांत और उससे परे समान और सतत विकास को सक्षम बनाता हो। इसमें हिंद-प्रशांत में निर्बाध वाणिज्य प्रवाह के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। साफ है कि बांग्लादेश व्यापार व वाणिज्य में दिलचस्पी रखता है। शेख हसीना द्वारा कुछ महत्वपूर्ण देशों की यात्रा से पहले इस दस्तावेज को जारी करने की मुख्य वजह यह है कि बांग्लादेश उन देशों से अधिकतम आर्थिक लाभ उठाना चाहता है। साथ ही, इसे केवल आर्थिक पहलू तक सीमित करके यह संकेत दिया गया है कि वह किसी भी सुरक्षा गठबंधन का हिस्सा नहीं होगा। ऐसा करके उसने चीन को शांत करने की कोशिश की है, जिसे डर था कि बांग्लादेश चीन विरोधी गठबंधन में शामिल हो सकता है।
कुछ लोगों का कहना है कि भारत के साथ घनिष्ठता के कारण बांग्लादेश इस दिशा में आगे बढ़ा है, लेकिन यह सच नहीं हो सकता। भारत के लिए चीन शत्रुतापूर्ण पड़ोसी है, जिस पर नियंत्रण जरूरी है। लेकिन बांग्लादेश दोनों के साथ संतुलन बिठाने की कोशिश कर रहा है। इस दृष्टिकोण को उसके 'इंडो-पैसिफिक आउटलुक' में भी देखा जा सकता है, जहां बांग्लादेश ने किसी भी सुरक्षा गठबंधन से दूर रहने की कोशिश की है।
बांग्लादेश में आगामी जनवरी में चुनाव होने वाले हैं। अगर उस चुनाव को पश्चिमी देशों द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं माना गया, तो वे बांग्लादेश से अपने रिश्ते कम कर सकते हैं। वैसे में अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत और चीन उसके मुख्य समर्थक साबित हो सकते हैं। इस पृष्ठभूमि में बांग्लादेश द्वारा जारी दस्तावेज को उसकी संपूर्णता में समझा जा सकता है। उसने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को महत्व दिया है, क्योंकि आर्थिक महाशक्तियां इसी क्षेत्र में हैं, लेकिन वह किसी के पक्ष में खुलेआम नहीं दिखना चाहता।
-एसोसिएट फेलो, एमपी-आईडीएसए।