'बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता है'

स्टीफन हॉकिंग Updated Thu, 15 Mar 2018 03:41 AM IST
Stephen Hawking
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भले ही मैं चल नहीं सकता और कंप्यूटर के माध्यम से बात करता हूं, पर मेरा मस्तिष्क स्वतंत्र है। बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता है। पूरी तरह से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास मानव जाति के अंत का कारण बन सकता है। जब कोई मुझसे पूछता है कि क्या मैं इस बात में विश्वास करता हूं कि ईश्वर ने ब्रह्मांड की रचना की है, तो मैं उनसे कहता हूं कि इस सवाल का कोई मतलब नहीं है। बिग बैंग से पहले समय का कोई अस्तित्व नहीं था, इसलिए ईश्वर के पास ब्रह्मांड की रचना के लिए कोई समय नहीं था। यह धरती के किनारे की दिशा पूछने जैसा है, यह पृथ्वी गोलाकार है, जिसका कोई किनारा नहीं है, इसलिए इसके किनारे की तलाश करना व्यर्थ की कवायद है। मैं इस सामान्य व्याख्या में विश्वास करता हूं कि कोई ईश्वर नहीं है। किसी ने भी ब्राह्मांड को नहीं बनाया और कोई हमारे भाग्य का निर्देशन नहीं करता है। इससे मुझे लगता है कि संभवतः कोई स्वर्ग भी नहीं है और जीवन के बाद कुछ नहीं है। ब्रह्मांड की शानदार रचना की प्रशंसा करने के लिए हमारे पास यही एक जीवन है और इसके लिए मैं बहुत आभारी हूं। ब्रह्मांड को यदि ईश्वर ने बनाया, तो फिर सवाल उठता है कि ईश्वर को किसने बनाया। पिछले सौ वर्षों में हमने काफी प्रगति की है, लेकिन आगे भी प्रगति करनी है, तो हमारा भविष्य अंतरिक्ष में है। आश्चर्य की भावना रखना और सवाल पूछते रहना युवाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। किताबें पढ़ने और ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल करने से बेहतर कुछ भी नहीं है।
-मशहूर वैज्ञानिक, जो अब हमारे बीच नहीं हैं

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