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मुझे तस्वीर खिंचवाना शर्मनाक लगता था, इसलिए लेखन को बनाया पेशा
पाउला फॉक्स
Updated Fri, 05 Jan 2018 02:07 PM IST
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paula fox
मेरा जीवन बहुत ही झंझावतों से गुजरा है। मैं अपने माता-पिता की अवांछित संतान थी। इसलिए मेरी परवरिश अन्य लोगों ने की। इसलिए कम उम्र में ही मैं वयस्क हो गई और पढ़ाई के दौरान ही मैंने कई तरह की नौकरियां कीं। मेरा वैवाहिक जीवन भी बहुत सुखद नहीं रहा। दो-दो शादियों के बाद तलाक से मुझे गुजरना पड़ा। दूसरे तलाक के बाद मैंने लेखन के प्रति खुद को समर्पित कर दिया। वैसे बचपन से ही साहित्य के प्रति मेरा लगाव था।
जब मैं चार साल की थी, तो मेरे पिता ने बक्सा भर किताबें मुझे लाकर दी थीं। उन किताबों पर अच्छे-अच्छे रेखाचित्र बने थे। रॉबिन हुड की कहानी सुनकर बचपन में मैं काफी प्रभावित हुई थी। ये कहानियां मुझे मिस्टर कार्निंग सुनाते थे, उन्होंने ही मुझे किताबें पढ़ना सिखाया। मेरे पिता के पास मुझे कहानियां सुनाने के लिए वक्त ही नहीं होता था। मिस्टर कार्निंग ने छोटी-सी उम्र में ही मेरी परवरिश का जिम्मा ले लिया था। वह बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे और उनकी आवाज बहुत खूबसूरत थी।
हाई स्कूल में इल्या ट्रेसी नाम की शिक्षिका मुझे अंग्रेजी पढ़ाती थी। वहीं मैंने मिल्टन को पढ़ा। जुलियस सीजर को पढ़ना मेरे लिए एक आह्लादकारी अनुभव था। मैं खुद को उन बच्चों की तरह मानती थी, जिनकी परवरिश जंगल में होती है, जैसे मोगली, किप्लिंग की जंगल बुक का किरदार। मुझे कई लोगों ने सलाह दी कि मैं मॉडल बन सकती हूं। लेकिन मुझे मॉडल बनना अच्छा नहीं लगा, दरअसल मुझे तस्वीर खिंचवाना शर्मनाक लगता था। इसलिए मैंने लेखन को ही पेशे के रूप में अपनाया।
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जब मैं चार साल की थी, तो मेरे पिता ने बक्सा भर किताबें मुझे लाकर दी थीं। उन किताबों पर अच्छे-अच्छे रेखाचित्र बने थे। रॉबिन हुड की कहानी सुनकर बचपन में मैं काफी प्रभावित हुई थी। ये कहानियां मुझे मिस्टर कार्निंग सुनाते थे, उन्होंने ही मुझे किताबें पढ़ना सिखाया। मेरे पिता के पास मुझे कहानियां सुनाने के लिए वक्त ही नहीं होता था। मिस्टर कार्निंग ने छोटी-सी उम्र में ही मेरी परवरिश का जिम्मा ले लिया था। वह बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे और उनकी आवाज बहुत खूबसूरत थी।
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हाई स्कूल में इल्या ट्रेसी नाम की शिक्षिका मुझे अंग्रेजी पढ़ाती थी। वहीं मैंने मिल्टन को पढ़ा। जुलियस सीजर को पढ़ना मेरे लिए एक आह्लादकारी अनुभव था। मैं खुद को उन बच्चों की तरह मानती थी, जिनकी परवरिश जंगल में होती है, जैसे मोगली, किप्लिंग की जंगल बुक का किरदार। मुझे कई लोगों ने सलाह दी कि मैं मॉडल बन सकती हूं। लेकिन मुझे मॉडल बनना अच्छा नहीं लगा, दरअसल मुझे तस्वीर खिंचवाना शर्मनाक लगता था। इसलिए मैंने लेखन को ही पेशे के रूप में अपनाया।
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