{"_id":"6ae533cca6afd2ebb809791a","slug":"when-doctors-begin-relying-on-ai-no-harm-in-use-keep-in-mind-patient-trust-on-doctor-themself-not-on-machine-2026-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"जब डॉक्टर एआई पर निर्भर होने लगें: उपयोग में बुराई नहीं, ध्यान रखें कि मरीज का भरोसा उनके ऊपर ही है","category":{"title":"Blog","title_hn":"अभिमत","slug":"blog"}}
जब डॉक्टर एआई पर निर्भर होने लगें: उपयोग में बुराई नहीं, ध्यान रखें कि मरीज का भरोसा उनके ऊपर ही है
Sat, 31 Oct 2026 05:50 AM IST
ज्योति भास्कर
रेचल बेडार्ड, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
रेचल बेडार्ड, द न्यूयॉर्क टाइम्स।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 31 Oct 2026 05:50 AM IST
सार
डॉक्टर एआई का उपयोग करें, लेकिन ध्यान रखें कि मरीज उनके भरोसे हैं, एआई के नहीं।
विज्ञापन
डॉक्टरों की मदद करने वाला एआई
- फोटो : Amarujala.com/AI
विस्तार
मुझे यह मानते हुए थोड़ा अजीब लग रहा है कि एआई मुझे एक बेहतर डॉक्टर तो बना रहा है, लेकिन मुझे इस बात की भी चिंता है कि इसका मेरे छात्रों पर, और कुल मिलाकर इस पेशे पर क्या असर पड़ेगा। मैं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा की डॉक्टर हूं और लगभग हर महीने, मेरे सामने कोई ऐसी शिकायत या बीमारी आती है, जिसके बारे में मुझे पता नहीं होता। मुझे अपनी मेडिकल शिक्षा और अपने कौशल पर पूरा भरोसा है। लेकिन लगातार बदलते तथ्यों और जानकारियों की दुनिया में अपनी पकड़ बनाए रखने को लेकर मैं उतना आश्वस्त नहीं हूं। तब मेरी जेब में मौजूद चैटबॉट मुझे भरोसा दिलाता है कि मेरे पास हमेशा काफी जानकारी होगी।
विज्ञापन
मेरे सभी छात्र और रेजिडेंट भी एआई का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मुझे इस बात की चिंता है कि कॅरिअर की शुरुआत में ही इतने असरदार टूल के क्या नतीजे हो सकते हैं। हालांकि, डॉक्टरी कोई ऐसा रचनात्मक काम नहीं है, जिसे टेक्नोलॉजी के दखल से बचाने की जरूरत हो। यह एक ऐसी सेवा है, जिसे मरीजों की देखभाल बेहतर बनाने वाले हर संसाधन को अपनाना चाहिए। इसलिए, एआई के दौर में डॉक्टरों को इसका प्रशिक्षण देने का मतलब है, उन्हें मशीन के साथ मिलकर सोच-समझकर फैसले लेने के लिए तैयार करना, ताकि वे चिकित्सा क्षेत्र के उस भविष्य के लिए तैयार हो सकें, जिसकी हम अभी बस एक झलक ही देख सकते हैं।
विज्ञापन
मैंने 20 साल पहले मेडिकल स्कूल में पढ़ाई शुरू की थी। तब से हर दिन, मैंने कुछ न कुछ खोजा है। किसी पत्रिका में छपे लेख को पढ़ा है या किसी साथी के साथ किसी केस पर चर्चा की है। चिकित्सा का काम ऐसा है, जिसमें अक्सर किसी दोस्त या साथी से सलाह लेनी पड़ती है। मैं अस्पताल में अपने सफेद कोट की जेब में ‘पॉकेट मेडिसिन’ नामक गाइड रखती थी और उसमें जानकारी देखती रहती थी। यह तो मुझे पता होता था कि मैं क्या ढूंढ रही हूं, पर वह किताब मुझे यह नहीं बता सकती थी कि वहां मिली जानकारी का इस्तेमाल कैसे करना है। फिर फोन में इंटरनेट का सहारा लेने लगी और अब एआई का इस्तेमाल करती हूं।
विज्ञापन
मैं जिस एप का इस्तेमाल करती हूं, उसमें सभी दावों के लिए स्रोत का जिक्र तो होता है, पर यहां मिलने वाली हर जानकारी काम की या सही नहीं होती। इसलिए इसका इस्तेमाल करते हुए मैं काफी सावधान रहती हूं। यह एप अक्सर, मुझे ऐसा सुझाव देता है, जिस पर मैंने पहले सोचा भी नहीं था। इसकी मदद से मरीजों की देखभाल में सुधार हुआ है। लेकिन, जिन रेजिडेंट्स को मैं गाइड करती हूं, उनके लिए इस एप की तेजी और पहले से मदद करने की क्षमता फायदेमंद होने के साथ-साथ रुकावट भी बन सकती है, क्योंकि बिना अनुभव के चैटबॉट के सुझावों को परखना मुश्किल है।
मैंने हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉक्टर और एआई रिसर्चर एडम रॉडमैन से पूछा कि इन जोखिमों के बारे में कैसे सोचा जाए। उन्होंने मेरी इस चिंता से सहमति जताई और कहा कि आजकल प्रशिक्षु सीखने की प्रक्रिया में भी एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने कहा कि अनुभवी लोगों को इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन नए प्रशिक्षु डॉक्टरों को बिना सीखे ही उपयुक्त जानकारी सुलभ होने से उनमें वह कौशल कभी विकसित ही नहीं हो पाएगा।
मैं चाहती हूं कि मेरे रेजिडेंट्स समस्याओं को उस तरह से सुनना सीखें, जैसे एक डॉक्टर को सुनना चाहिए-यानी ऐसी कहानियों के तौर पर, जिनमें ऐसे सुराग हों, जो सोचने-समझने की कई कड़ियों को जोड़ सकें। मैं चाहती हूं कि उनमें वे जरूरी समझ विकसित हों, जो मेडिकल के क्षेत्र में सही फैसला लेने के लिए जरूरी हैं। एक डॉक्टर के तौर पर, मैं अपने मरीजों में दिल की धड़कन में असामान्य आवाज का पता लगाने के लिए स्टेथेस्कोप और अपने अनुभव व ज्ञान का ही सहारा लेती हूं, भले ही मेरे पास ऐसी इमेजिंग तकनीकें हों, जिनकी वजह से स्टेथेस्कोप से भी बारीक जांच संभव हो सकती हो। जो लोग अभी डॉक्टर बनने का प्रशिक्षण ले रहे हैं, एआई उनके लिए क्या भूमिका निभाएगा, यह इस पर निर्भर है कि वे इसका उपयोग कैसे करते हैं।
मैं चाहती हूं कि इन टूल्स की मदद से काम करने वाले डॉक्टरों से उनके मरीजों को भी वैसा ही फायदा मिले, जैसा मुझे लगता है कि मेरे मरीजों को मिल रहा है। डॉक्टर एआई का उपयोग करें, लेकिन उन्हें इसमें सतर्कता बरतनी होगी, क्योंकि मरीज उन पर भरोसा करते हैं, एआई पर नहीं।
ग्रेनोला
यह एआई आधारित डिजिटल नोटबुक है, जो ऑनलाइन मीटिंग के दौरान बातचीत को सुनकर महत्वपूर्ण बातें लिखने में आपकी मदद करती है। यह कंप्यूटर के ऑडियो के माध्यम से बातचीत को सुनती है और उसे लिखित रूप में बदलती रहती है। आप चाहें, तो खुद भी नोट्स लिख सकते हैं। मीटिंग खत्म होने पर एआई आपकी लिखी बातों और पूरी बातचीत को मिलाकर एक व्यवस्थित सारांश तैयार करता है। इसमें महत्वपूर्ण चर्चाएं, लिए गए फैसले और आगे किए जाने वाले काम शामिल होते हैं। आप बाद में इससे सवाल पूछ सकते हैं, पुराने नोट्स खोज सकते हैं और आगे भेजे जाने वाले ई-मेल भी तैयार कर सकते हैं।