क्या 150 साल जिया जा सकता है
दुनिया के उन इलाकों में, जहां लोग 100 साल से अधिक जीते हैं, कुछ समान आदतें देखने को मिलती हैं।
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जरा सोचिए, अगर हम सब 100 साल नहीं, बल्कि 150 या 200 साल तक जीने लगें, तो जिंदगी कैसी लगेगी? विज्ञान आज इस संभावना पर शोध कर रहा है, लेकिन अभी ऐसा कोई तरीका उपलब्ध नहीं है, जो उम्र को इतना बढ़ा सके। असली सवाल यह है कि हम जितने भी साल जीते हैं, क्या वे तंदुरुस्त, सक्रिय और स्वावलंबी होकर जी पा रहे हैं? खासकर बुजुर्गों के लिए यह बात सबसे अधिक मायने रखती है। आइए, जानते हैं कि कैसे आप अपनी दिनचर्या में कुछ सरल और प्रभावी बदलाव करके उम्र के इस पड़ाव को स्वस्थ और बेहतर बना सकते हैं।
जब तक जिएं, तंदुरुस्त रहें- लंबी जिंदगी जीने का असली मजा तभी है, जब शरीर में जान हो और दिमाग एकदम दुरुस्त रहे। विज्ञान की भाषा में इसे हेल्थस्पैन कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो जब तक जिएं, तंदुरुस्त रहें और अपने दम पर जिएं। इसके लिए, अपनी पसंद की चाय खुद बनाएं, और किसी पर निर्भर रहे बिना अपनी जिंदगी जिएं। जिस दिन आप सेहत को अपनी आजादी की तरह देखने लगेंगे, दवाइयों और बीमारियों का डर आपके दिल से अपने-आप निकल जाएगा।
थोड़ा रास्ता बदलिए, थोड़ा नया सीखिए- दिमाग भी एक छोटे बच्चे जैसा होता है, इसे हर दिन कुछ नया चाहिए। अगर शाम की सैर पर निकलते हैं, तो हमेशा एक ही रास्ते से मत जाइए। कभी गली बदलिए, कभी पार्क का दूसरा कोना देखिए। अपने पोते-पोतियों को पास बिठाइए और उनसे मोबाइल का कोई नया फीचर सीखिए। जब दिमाग नया सीखता है, तो वह वृद्ध होना भूल जाता है।
रात का खाना और सुबह की धूप-वैज्ञानिक शरीर की पुरानी और बेकार कोशिकाओं को ‘जोंबी सेल्स’ कहते हैं, जो शरीर में सूजन बढ़ाती हैं। प्रकृति ने हमारे शरीर को खुद सफाई करने की अद्भुत शक्ति दी है। इसके लिए जरूरी है कि रात का खाना सात से आठ बजे के बीच खा लें और अगली सुबह के नाश्ते के बीच 12 घंटे का अंतर रखें। इस खाली समय में शरीर अपनी कमजोर कोशिकाओं की खुद सफाई कर लेता है।
‘इकिगाई’ और रिश्तों की संजीवनी- दुनिया के उन इलाकों में, जहां लोग 100 साल से अधिक जीते हैं, एक समान आदत देखने को मिलती है। वे किसी न किसी सामाजिक समूह से जुड़े रहते हैं और उनके पास सुबह उठने की एक प्यारी-सी वजह होती है, जिसे जापानी भाषा में ‘इकिगाई’ कहते हैं।
हमउम्र साथियों के साथ बैठकर गपशप करें, पुरानी यादें साझा करें और खूब ठहाके लगाएं। किसी पौधे की देखभाल करना, बच्चे को किस्से सुनाना या किसी की मदद करना मन को सुकून देता है। जब दिल में खुशी और जिंदगी में कोई उद्देश्य होता है, तो शरीर के अंदरूनी हार्मोन खुद-ब-खुद आपको तरोताजा बनाए रखते हैं।
लंबे समय तक जीने की संभावना रोमांचक हो सकती है, पर स्वस्थ रहना, अपनों के साथ समय बिताना और पसंद के काम करना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। विज्ञान उम्र बढ़ाने में सफल हो या नहीं, जीवन के बचे हुए वर्षों को स्वस्थ, सम्मानजनक व आनंदमय बनाने की दिशा में हम आज से ही कदम बढ़ा सकते हैं।
90 की उम्र और फिटनेस की मिसाल
उम्र बढ़ने के साथ नई चुनौतियां स्वीकार करने का हौसला कम हो जाए, यह जरूरी नहीं। अमेरिका की 90 वर्षीय मार्गी हेनेसी इसकी प्रेरक मिसाल हैं, जो इन दिनों अपनी पहली हाइरॉक्स फिटनेस प्रतियोगिता की तैयारी कर रही हैं। पति के निधन के बाद उन्होंने घर के काम स्वयं संभालने शुरू किए। लॉन की घास काटना और बगीचे में खाद की भारी बोरियां उठाना उनके लिए शारीरिक मजबूती के साथ आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया। इस वर्ष अपने 90वें जन्मदिन के कुछ समय बाद, उनकी बहू ने उन्हें 18 किलोग्राम की खाद की बोरी उठाते देखा और हाइरॉक्स प्रतियोगिता में भाग लेने का सुझाव दिया। मार्गी तुरंत तैयार हो गईं। अब वह सप्ताह में तीन दिन प्रशिक्षण लेती हैं। उनके अभ्यास में भार उठाना, दौड़ना और विभिन्न शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मार्गी कहती हैं कि नई चुनौतियां स्वीकार करने के लिए उम्र बाधा नहीं है