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चारधाम यात्रा का सैलाब आखिर क्यों हो रहा है उत्तराखण्ड सरकार के बूते से बाहर?

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Tue, 11 Jun 2019 03:51 PM IST
हिमालयी तीर्थों के लिए तीर्थयात्रियों की बाढ़ सी आ गई है।
हिमालयी तीर्थों के लिए तीर्थयात्रियों की बाढ़ सी आ गई है। - फोटो : अमर उजाला
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देेश के मैदानी इलाकों में पड़ रही भयंकर गर्मी से निजात पाने और इसी बहाने हिमालयी तीर्थों में पुण्य लाभ कमाने के लिए इस वर्ष उत्तराखण्ड के विख्यात चार धामों और पर्यटन स्थलों पर अत्यधिक भीड़ उमड़ रही है जिसे संभालना उत्तराखण्ड सरकार के बूते से बाहर हो गया है। आशा से अधिक जनसमुदाय के हिमालय पर उमड़ पड़ने के कारण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से लेकर परिवहन, आवास एवं शौचालय की जैसी सुविधाएं नाकाफी हो गई हैं।
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बद्नीनाथ और केदारनाथ में क्षमता से कहीं अधिक तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से आवासीय व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। नैनीताल में तो हालत इतनी खराब है कि पर्यटकों के वाहनों को 10 किमी पीछे ही रोक दिया जा रहा है। चारों धामों में इस बार एक माह की अवधि में ही हृदय गति रुकने और ठण्ड आदि से मरने वाले की संख्या 41 तक पहुंच गई है। इन मौतों में सड़क दुघटनाओं में मरने वाले शामिल नहीं हैं। संवेदनशील हिमालय पर इतनी भीड़ ने पर्यावरण प्रेमियों की पेशानी पर भी बल डाल दिए हैं।

लू धकेल रही है लोगों को हिमालय पर
जून का महीना शुरू होना ही था कि उत्तराखण्ड में विश्व विख्यात हिमालयी तीर्थों के लिए तीर्थयात्रियों की बाढ़ सी आ गई है। मैदानी इलाकों में आसमान से आग बरसने के कारण भी लोग शीतलता और शांति की चाह लेकर मध्य हिमालय की ओर उमड़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 18 एवं 19 मई की बहुचर्चित बद्री-केदार यात्रा ने तो चारधाम यात्रा पर चार चांद लगा दिए। आम श्रद्धालुओं में यह संदेश गया कि जिस तरह बद्रीनाथ और केदारनाथ के दर्शन करने से प्रधानमंत्री मोदी की मनोकामना पूरी हुई उसी तरह उनकी मनोकामनाओं को पंख लग जाएंगे। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बी.डी. सिंह के अनुसार 8 जून तक इन दोनों धामों में देश -विदेश के 9,64,809 तीर्थ यात्री दर्शन लाभ कर चुके थे।

क्यों बढ़ रही है पहाड़ों पर भीड़ 
रमजान का महीना निपटते ही रोजदार रहे साधन सम्पन्न लोग भी इन दिनों भारी संख्या में नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं। यही नहीं जब पंजाब जैसे प्रदेशों में सूरज आग उगल रहा हो तो फिर हेमकुण्ड साहिब जैसा शांत और शीतल तीर्थ और कहां हो सकता हैं।

समुद्रतल से 4,633 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हेमकुण्ड साहिब विश्व का सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा है जो कि हिमालय की स्थाई हिमरेखा की दहलीज पर है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इन दिनों लगभग 1350 किमी लंबे चार धाम यात्रा मार्ग एवं समुद्रतल से लगभग 2 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित पहाड़ी पर्यटन नगरों में मानव बाढ़ जैसी आ गई है। चूंकि तीर्थाटन और पर्यटन राज्य की आर्थिकी के प्रमुख आधारों में से एक होने के कारण राज्य सरकार भी चाहती है कि यहां मानव सैलाब उमड़ता रहे मगर सरकार के पास वर्तमान मे इतनी भीड़ को संभालने की न तो क्षमता है और ना ही कोई विजन है। 
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