जीवन धारा: एकाग्रता से किए गए काम का अलग ही आनंद है... भलाई में करें ऊर्जा का उपयोग
जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसके लिए एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है। अगर आप एकाग्र मन से कोई कार्य करते हैं, तो आपको उसे करने में एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है।
विस्तार
एकाग्रता क्या है? यह ध्यान केंद्रित करने की एक अवस्था को संदर्भित करती है, जहां मन एक ही वस्तु या विचार पर केंद्रित होता है, बगैर इधर-उधर भटके, और इसकी पूर्णता ध्यान की ओर ले जाती है। मन बाहरी चीजों में अक्सर उलझकर रह जाता है, लेकिन एकाग्रता उनमें उलझने नहीं देती। एकाग्रता इतनी शक्तिशाली क्यों है? इसे एक औसत व्यक्ति के दिमाग की तुलना एक लाइट के बल्ब से करके सबसे अच्छे ढंग से समझा जा सकता है। आपने देखा होगा कि बल्ब से निकलने वाली प्रकाश की किरणें सभी दिशाओं में फैल जाती हैं। यदि कोई बल्ब से पांच फुट दूर खड़ा हो, तो उसे प्रकाश तो दिखाई पड़ता है, लेकिन उसकी ऊष्मा महसूस नहीं होती है, भले ही बल्ब के केंद्र में मौजूद फिलामेंट में बहुत ऊष्मा हो।
इसी प्रकार, एक औसत दिमाग वाले के पास संभावित रूप से बहुत शक्ति होती है, लेकिन वह सभी दिशाओं में बिखर जाती है। दिमाग एक के बाद एक अलग-अलग चीजों के बारे में सोचता है, किसी एक विषय पर गहराई से विचार किए बगैर औसत दिमाग अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर पाता। विज्ञान ने लेजर का निर्माण किया, जिसे एक समय केवल विज्ञान की काल्पनिक कथा और उपन्यासों में वर्णन करते थे। लेजर के जरिये किसी स्रोत से आने वाली सभी प्रकाश की किरणों को एक-दूसरे के साथ पंक्तिबद्ध किया जाता है, ताकि वे एक ही दिशा में और एक-दूसरे के साथ एकरूपता में चलें। प्रकाश का मूल स्रोत केवल प्रकाश भर नहीं, बल्कि उसके प्रभाव से ऊष्मा भी प्राप्त हो।
यदि हम लेजर बीम स्रोत से केवल तीन मीटर की दूरी पर खड़े हों, तो उसका इतना प्रभाव है कि हमारे शरीर में एक छेद कर देगी। इसे ही केंद्रित प्रकाश कहते हैं। ठीक उसी प्रकार, एकाग्रता में अधिक शक्ति है, इसमें उच्च बोध की शक्ति है, घटनाओं के पीछे छिपे सत्य को देखने की क्षमता है। इसमें असंभव को संभव करने की एक अद्भुत शक्ति है। एकाग्र मन कुछ भी कर सकता है। जब भी कोई किसी चीज में एकाग्रता के साथ पूरी तरह से डूब जाता है, जैसे कि कोई पसंदीदा किताब पढ़ना, इस गतिविधि को पूरा करने के बाद आराम और शांति की स्थिति में आ जाता है। ध्यान के संबंध में एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह मन को सभी दिशाओं में भटकने से रोकती है। जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसके लिए एकाग्रता अत्यंत आवश्यक है, एकाग्रता के बिना कुछ भी हासिल नहीं कर सकते।
अगर आप एकाग्र मन से कोई कार्य करते हैं, तो आपको कार्य को करने में अतिरिक्त आनंद की अनुभूति होगी। जो इन्सान एकाग्र नहीं हो पाता, वह काम करते वक्त दूसरों के विषय में सोचता रहता है, गलतियां करता है, काम पूरा करने में अनावश्यक समय लगाता है, अगर काम करता भी है, तो एक उदासी की भावना उसके भीतर रहती ही है। वह लगातार सोचता रहेगा कि समय कैसे बीत रहा है, समस्याओं के बारे में बस सोचता रहेगा और उसका पूरा दिमाग इन्हीं बातों के बीच फंसकर रह जाता है। इसलिए ध्यान के साथ-साथ जीवन में एकाग्रता जरूरी है।
सूत्र: भलाई में करें ऊर्जा का उपयोग
दुनिया में शोर नहीं है। हिमालय में शांति नहीं है। दोनों ही आपके भीतर हैं। बस जब तक जीवित हैं, तब तक आप जितनी अधिक ऊर्जा दूसरों की मदद करने में खर्च करेंगे, उतनी ही अधिक दिव्य ऊर्जा आप के अंदर प्रवाहित होगी। इस प्रकार आप देखेंगे कि आपके भीतर वह शांति मौजूद है, जो आप हिमालय में ढूंढ रहे थे। कुछ भी चाहिए एकाग्रता के साथ ही उसे प्राप्त करें।