पुस्तक चर्चा: खिलंदड़े युवा से महान प्रबंधक तक...द ग्रेटेस्ट कैपिटलिस्ट हू एवर लिव्ड
बेशक फॉर्च्यून मैग्जीन ने उन्हें 'सर्वकालीन महान पूंजीवादी' बताया, लेकिन शुरुआती दौर में वॉटसन की छवि एक दिशाहीन और खिलंदड़े युवा की थी।
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आईबीएम की चमत्कारिक उपलब्धि ने डिजिटल दुनिया ही बदल कर रख दी थी। रेल्फ वॉटसन मैकइल्वेनी व मार्क वॉटमैन की नई किताब, द ग्रेटेस्ट कैपिटलिस्ट हू एवर लिव्ड इसके केंद्र रहे थॉमस जे वॉटसन जूनियर की दिलचस्प ज़िन्दगी और आईबीएम के शानदार सफर का पठनीय खाका पेश करती है। वॉटसन जूनियर का योगदान दरअसल आधुनिक विश्व के निर्माण में रॉकफेलर, मॉर्गन आदि से कहीं ज्यादा ही था। तकनीकी रूपांतरण के दौर में जूनियर ने पीसी की शुरुआत कर आईबीएम और उसके कर्मचारियों को तो जोखिम में डाला ही था, अपने भाई से उनका विवाद इस कदर बढ़ा कि भाई की मृत्यु के बाद उनकी खुद की मृत्यु की भी आशंका बन गई थी।
युवावस्था में थॉमस जे वॉटसन की नियति निरंतर विफल होने की थी। तीन अलग-अलग स्कूलों में पढ़ते हुए बेहद मुश्किल से उन्होंने हाई स्कूल डिप्लोमा किया। उनके पिता वॉटसन सीनियर का अपने बेटे के प्रति अजीब व्यवहार था। नतीजतन वॉटसन जूनियर विद्रोही और बिगड़ैल बन गए। यह किताब वॉटसन जूनियर के बारे में दोटूक बताती है कि वह अपने पिता की कंपनी में काम करना कतई नहीं चाहते थे। इसके बावजूद जूनियर ने न सिर्फ अपने पिता की कंपनी संभाली, बल्कि अपने आज्ञाकारी छोटे भाई को पिता का साम्राज्य संभालने के लिए प्रेरित और तैयार भी किया।
यह अजीब है कि अपने पिता के प्रति विकर्षण ने ही जूनियर को आईबीएम को बचाने के लिए प्रेरित किया। अमेरिका के द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल होने से ठीक पहले वायुसेना में शामिल होकर बी-24 विमान उड़ाकर उनमें आत्मविश्वास पैदा हुआ। किताब में जूनियर को महानतम पूंजीवादी बताया गया है, लेकिन उन्हें महानतम प्रबंधक कहना ज्यादा उचित होगा, क्योंकि वह अपने कर्मचारियों की प्रतिभा के साथ पूरा न्याय करते थे। पिता के साथ विवाद में अप्रत्याशित रूप से उन्हें जस्टिस डिपार्टमेंट के उस एंटी ट्रस्ट विभाग का साथ मिला, जिसका अमेरिकी की कॉरपोरेट दुनिया में खासकर उत्तराधिकार के मामले में हस्तक्षेप रहता आया है।
आईबीएम के मालिकाना विवाद का इतिहास तो अपनी जगह है ही, टेक इंडस्ट्री में आईबीएम के लंबे वर्चस्व को भी नहीं भूलना चाहिए। मसलन, टेक इंडस्ट्री में आज कैजुअल ड्रेस की जो प्रवृत्ति है, वह वस्तुत: 1970 के दशक में एपल जैसी कंपनियों द्वारा आईबीएम के सख्त ड्रेस कोड की प्रतिक्रिया का नतीजा था, आईबीएम में डार्क सूट, सफेद शर्ट और पारंपरिक टाई का बेहद सख्ती से पालन किया जाता था।
आईबीएम पर यह पहली किताब नहीं है, न ही वॉटसन पिता-पुत्रों के रिश्तों के बारे में यह पहली पुस्तक है। वर्ष 1990 में खुद जूनियर ने फादर, सन एंड कंपनी लिखी थी, जो बेस्ट सेलर थी। लेकिन आईबीएम पर लिखी गई यह संभवत: सबसे विशद और प्रामाणिक पुस्तक है।