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शिक्षक दिवस 2020: शिक्षक समाज का शिल्पकार है उसकी भूमिका को समझना होगा.!

Sat, 05 Sep 2020 07:28 AM IST
Namrata Kachouliya नम्रता कचौलिया
Updated Sat, 05 Sep 2020 07:28 AM IST
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teachers day 2020 in india dr sarvepalli radhakrishnan birthday 5 september teachers impact on students
शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

5 सितंबर शिक्षक दिवस अर्थात् महान सोच के धनी शिक्षाविद् डॉक्टर सर्वपल्ली राधकृष्णन का जन्मदिवस। शिक्षा की महत्ता के प्रति उनके विचार संपूर्ण मानवजाति को आज भी प्रेरित करते हैं और प्रासंगिक हैं क्योंकि उनकी सोच ने शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा बल्कि उन्होंने शिक्षा को ही संपूर्ण समाज का उत्थान करने वाली सोच की जन्मदाता माना है।

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वास्तव में हमारी शिक्षा तो जब हम जन्म लेते हैं तब से ही शुरू हो जाती है। तब हमें जो भी संस्कारो के रूप में शिक्षा दी जाती है वो प्रायः हमारे माता-पिता, दादा-दादी या करीबी रिश्तेदारों के द्वारा हमें मौलिक रूप से तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है।
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फिर जब हम स्कूली शिक्षा की ओर अग्रसर होते हैं तो हमें ज्ञान देने और समझाने का जिम्मा हमारे शिक्षकों का हो जाता है। ये वो शिक्षक होते हैं जो हमारे विकास में सिर्फ हमारी ही नहीं बल्कि पूरे समाज के साथ ही पूरे देश की तरक्की की कल्पना करते हैं और फिर उस मानक से हमें तैयार करते हैं।
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एक बहुत अच्छे विचारक ने कहा है और उचित भी लगता है कि अलग-अलग पेशों पर समाज के प्रति भिन्न- भिन्न जिम्मेदारियां होती हैं परंतु एक सत्य व्याख्या जो उन्होंने की है उसके अनुसार ऐसा है कि यदि एक वकील से गलती हो जाए तो वो फाइलों में दबाई जा सकती है, एक इंजीनियर से गलती हो जाए तो वो भी दोबारा सुधारी जा सकती है, परंतु एक शिक्षक से गलती हो जाए तो वो संपूर्ण समाज के अस्तित्व में दिखाई देती है।

अर्थात् शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी होती है क्यूंकि उनके द्वारा दिया हुआ ज्ञान का प्रभाव एक इंसान तक सीमित ना होकर सभी पर पड़ता है।



आज के परिवेश में शिक्षा के बहुत से रूप हो गए हैं. जैसे भौतिक,मौलिक,आध्यात्मिक और ये अपनी-अपनी जगह जरूरी भी है। पर इन सब के दौरान अत्यधिक महत्वपूर्ण ये है की हम इतने शिक्षित हो जाए की हमारे अंदर हर समय मानवता बनी रहे, दूसरों के प्रति दया की भावना हो, क्यूंकि आजकल ये सोच कहीं ना कहीं विलुप्त होती नजर आ रही है। जिस दिन से पूरा समाज इस सोच को खुद में विकसित कर शिक्षित हो जाएगा तब सही मायने में हमारी शिक्षा पूरी कहलाएगी।


डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने उचित ही कहा है, शिक्षा का परिणाम एक मुक्त रचनात्मक व्यक्ति होना चाहिए जो ऐतिहासिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध लड़ सके।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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