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अपने अधिकारों से न रहें अनजान: कागजात रखें दुरुस्त, मुफ्त कानूनी मदद भी मिलने के विकल्प

Fri, 06 Nov 2026 09:16 AM IST
ज्योति भास्कर अमक उजाला नेटवर्क।
अमक उजाला नेटवर्क। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 06 Nov 2026 09:16 AM IST
सार

दिल्ली के श्याम जी पुश्तैनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इस पर कानून विशेषज्ञ मृणाल सिंह ने उन्हें यह सलाह दी :

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अपने अधिकारों से न रहें अनजान (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला-प्रिंट

विस्तार

मैं 78 साल का हूं। बच्चों के साथ गांव से दूर शहर में रहता हूं। मुझे डर है कि मेरी अनुपस्थिति में कहीं कोई मेरी पुश्तैनी जमीन-जायदाद पर कब्जा न कर ले। मैं क्या करूं?

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आपकी यह चिंता बिल्कुल स्वाभाविक है। आखिर जिस जमीन से परिवार की पीढ़ियों की यादें और मेहनत जुड़ी हो, उसे किसी दूसरे के हाथों में जाते कौन देखना चाहेगा? गांव से दूर रहने पर असामाजिक तत्वों और भू-माफियाओं की नजर अक्सर ऐसी खाली जमीनों पर टिक जाती है। लेकिन, अच्छी बात यह है कि कुछ जरूरी सावधानियां बरतकर आप अपनी संपत्ति को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं। जरूरत बस समय रहते सही कदम उठाने की है।

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कागजात रखें दुरुस्त

सबसे पहले जमीन से जुड़े सभी कागजात दुरुस्त रखें। यदि जमीन पुश्तैनी है और परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम दर्ज है, तो अपने हिस्से का कानूनी हक स्पष्ट करा लें। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना (दाखिल-खारिज या म्यूटेशन) मालिकाना हक का पक्का सबूत नहीं है। इसलिए, मूल कागजात संभालकर रखें। अपने बच्चों को भी बताएं कि जमीन कहां स्थित है, उसका रकबा कितना है, सीमाएं क्या हैं और उससे जुड़े कागजात कहां-कहां रखे हैं।

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न होगा विवाद, न होगी चिंता

जमीन से जुड़े लगान नियमित रूप से भरें और रसीदें संभालकर रखें। सरकारी पोर्टल पर हर दो-तीन महीने में खसरा-खतौनी जांचते रहें, ताकि रिकॉर्ड में किसी गलत बदलाव का पता चल सके। आप गांव से दूर हैं, ऐसे में गांव के किसी भरोसेमंद व्यक्ति को जमीन की देखरेख की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, पर उसे जमीन बेचने या ट्रांसफर करने का अधिकार बिल्कुल न दें। उससे समय-समय पर जमीन की ताजा तस्वीरें और वीडियो मांगते रहें।

कब्जा हो ही गया, तो

अगर आपको लगता है कि कोई जमीन पर कब्जा या अवैध निर्माण करने की कोशिश कर रहा है, तो संबंधित अधिकारी को लिखित शिकायत देकर पावती रसीद सुरक्षित रख लें। चूंकि आप दूर हैं, तो स्पीड पोस्ट या ई-मेल को जरिये ऐसा कर सकते हैं। आप चाहें, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 164 की मदद भी ले सकते हैं। यदि कब्जा या निर्माण हो ही जाए, तो किसी अनुभवी वकील की मदद से सिविल कोर्ट में मालिकाना हक व कब्जा वापसी का दावा करें। निर्माण कार्य को रुकवाने के लिए स्टे (अंतरिम रोक) की मांग जरूर करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त कानूनी मदद भी मिल जाएगी।

अपने खास अधिकार जानें

आप 78 साल के हैं। इसलिए, जरूरी है कि आपको वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 के बारे में पता हो। इसके तहत एक विशेष ट्रिब्यूनल काम करता है, जिसके पास वरिष्ठ नागरिकों की संपत्ति से अवैध कब्जा हटाने और खाली कराने का अधिकार होता है। यहां बिना किसी फीस और जटिल प्रक्रिया के कम समय में बेदखली का आदेश मिल जाता है।
उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि जमीन-जायदाद की चिंता छोड़ दी जाए। जरूरत सिर्फ इतनी है कि दस्तावेज दुरुस्त रखें, जमीन की निगरानी की व्यवस्था बनाएं और किसी भी गड़बड़ी पर समय रहते कानूनी कदम उठाएं। 

वरिष्ठ नागरिकों के काम की संस्थाएं

सेवा घर वृद्धाश्रम जरूरतमंद बुजुर्गों को भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इसके अलावा, समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर बुजुर्गों को मनोरंजन से जोड़े रखता है। वृद्धाश्रम में दीपावली, होली और मकर संक्रांति जैसे त्योहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं। बुजुर्गों के लिए जरूरी दवाइयों की व्यवस्था भी की जाती है। संस्था का उद्देश्य बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और बेहतर जीवन प्रदान करना है। अधिक जानकारी के लिए आप 9991416220 पर संपर्क कर सकते हैं।

श्री बालाजी वृद्ध आश्रम चैरिटेबल ट्रस्ट

बेसहारा बुजुर्गों को रहने, खाने, कपड़े और दवाइयों जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराता है। ट्रस्ट बिछड़े बुजुर्गों को उनके परिवार और घर तक पहुंचाने का भी काम करता है। संस्था का प्रयास है कि बेसहारा और असहाय बुजुर्गों को सुरक्षित आश्रय के साथ-साथ उचित देखभाल मिल सके। यह समाज में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। अधिक जानकारी के लिए आप 9812388213 पर संपर्क कर सकते हैं।

68 की उम्र में सीखा तैरना 81 की उम्र में जारी है सफर

आंध्र प्रदेश की 81 वर्षीय अमलापुरापु सुब्बालक्ष्मी की कहानी उम्र को चुनौती देने का शानदार उदाहरण है। वह जब किसी तैराकी प्रतियोगिता से घर लौटती हैं, तो उनके परिवार वाले शायद ही कभी पूछते हैं कि प्रतियोगिता कैसी रही। वे एक अलग ही सवाल पूछते है कि इस बार आपको कितने मेडल मिले? सुब्बालक्ष्मी के बारे में दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने 68 वर्ष की आयु में तैराकी सीखना तब शुरू किया, जब उनके पोते ने उन्हें तैराकी न आने पर तंज कसा था। उन्होंने महज दो महीने में तैराकी के विभिन्न तरीके सीख लिए और अपनी पहली प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक जीते। अब तक वह 50 से अधिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। दुबई, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अक्तूबर 2026 में कोयंबटूर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता से वह तीन और पदक लेकर लौटीं। वह कहती हैं कि मैं बस जीतना और स्विमिंग करना जारी रखना चाहती हूं। इसके अलावा मेरे पास करने के लिए और कुछ नहीं है।

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