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दूसरी पारी: कभी-कभी दिमाग भी छुट्टी लेता है, स्कॉटलैंड की 78 वर्षीय कैथ बोवी कुछ नया सीखने के मामले में प्रेरक

Fri, 09 Oct 2026 05:10 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 09 Oct 2026 05:10 AM IST
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Second Innings Sometimes mind takes break too Scotland 78 yr Kath Bowie inspiration in learning something new
जीवन की दूसरी पारी में चिंता छोड़ना अहम - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

मेरी उम्र 77 साल है और मैं छोटी-छोटी बातें भूलने लगा हूं। कहीं ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं?

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भूलने की आदत को लेकर चिंतित कृष्णगोपाल जी को वरिष्ठ जेरियाट्रिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. मीनल ठकराल ने यह सलाह दी :

उम्र के इस पड़ाव पर जब आप किसी कमरे में जाते हैं और वहां पहुंच कर यह सोचने लगते हैं कि ‘मैं यहां क्या लेने आया था?’, या किसी का नाम जुबान पर आकर अटक जाता है, तो मन में सबसे पहला डर अल्जाइमर या डिमेंशिया का आता है। हालांकि, हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं। असल सवाल यह है कि क्या भूलने के कारण आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है? अगर आप अपने काम खुद कर पा रहे हैं, जरूरी चीजें संभाल पा रहे हैं और ऐसी घटनाएं कम ही होती हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कभी-कभार दिमाग भी तो छुट्टी ले सकता है।

भूलना डिमेंशिया हो, जरूरी नहीं
अक्सर लोग भूलने की आदत को सीधे अल्जाइमर या डिमेंशिया से जोड़कर घबरा जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान में एक बीच की अवस्था ‘माइल्ड कॉग्निटिव इंपेयरमेंट’ (एमसीआई) की भी होती है। इसमें याददाश्त उम्र के हिसाब से थोड़ी कमजोर जरूर होती है, पर इन्सान अपने रोजमर्रा के काम खुद कर पाता है। एमसीआई का हर मामला डिमेंशिया में बदले, यह जरूरी नहीं। अनिद्रा, अवसाद-चिंता, दवाओं के दुष्प्रभाव, बी12 की कमी, थायराइड व मेटाबॉलिक गड़बड़ियां भी याददाश्त पर असर डालती हैं। इसलिए, यह समझना जरूरी है कि आपसे कैसी भूल हो रही है।
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खुद से कहें
अक्सर हम बातें भूलते नहीं हैं, बल्कि वे हमारे ध्यान में दर्ज नहीं हो पातीं। जैसे, टीवी देखते या किसी से बात करते हुए किसी सामान को कहीं रखकर भूल जाना। सही तरीका यह है कि जब भी आप कोई जरूरी चीज रखें, तो कुछ सेकंड रुकें, और हल्के से बोलें, ‘मैंने यह चीज, यहां रख दी है।’ ऐसा करने से वह बात आपके दिमाग में छप जाएगी।
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उल्टे हाथ का कमाल
अगर आप हमेशा सीधे हाथ से काम करते हैं, तो दिन में कुछ छोटे काम अपने उल्टे हाथ से करने की कोशिश करें। जैसे, बाएं हाथ से दांत साफ करना, चाय का कप पकड़ना या कंघी करना। ऐसा करने से दिमाग के वे हिस्से जाग उठते हैं, जो आमतौर पर सोए रहते हैं। यह दिमागी कसरत का बेहद सरल व मजेदार तरीका है।

उल्टा याद करने का खेल
शाम को चाय पीते वक्त या रात को सोने से पहले एक खेल खेलें। सुबह से याद करने के बजाय, यह सोचें कि आपने अभी आधा घंटा पहले क्या किया, दोपहर में क्या खाया था, किससे बात हुई थी और अंत में सुबह आप कब उठे थे। घटनाओं को पीछे की तरफ याद करने से दिमाग की नसें सक्रिय होती हैं और सोचने की क्षमता मजबूत होती है।

डॉक्टर के पास कब जाएं
अगर भूलने की यह आदत इतनी बढ़ जाए कि आप रोज के काम-जैसे बैंक जाना, खुद दवा लेना, जाने-पहचाने रास्तों पर चलना या रोजमर्रा के सामान्य काम करना मुश्किल हो जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अत्यधिक उलझन या कोई असामान्य बदलाव आए, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जब तक आप अपने सारे काम खुद मजे से कर रहे हैं और भूलने की घटनाएं कोई गंभीर परेशानी नहीं पैदा कर रही हैं, तब तक बेफिक्र रहिए, मस्त रहिए और जिंदगी के हर पल का आनंद लीजिए।

78 साल की उम्र में गेमिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड
जब कुछ नया सीखने की बात आती है, तो अधिकांश लोग उम्र के तकाजे की आड़ लेकर अक्सर अपने कदम पीछे खींच लेते हैं। लेकिन, स्कॉटलैंड की 78 वर्षीय कैथ बोवी ने अपनी कहानी से इस सोच को गलत साबित कर दिया। उन्होंने न सिर्फ वीडियो गेम खेलना सीखा, बल्कि इसी शौक को अपनी पहचान और विश्व रिकॉर्ड में बदल दिया। कैथ ने वर्ष 2017 में गेमिंग की शुरुआत की थी। आज वह ‘ग्रंपीग्रैन1948’ नाम से फोर्टनाइट (एक लोकप्रिय ऑनलाइन वीडियो गेम) की दुनिया में लोकप्रिय हैं। उनकी प्रतिभा और जुनून को देखते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उन्हें दुनिया की सबसे उम्रदराज महिला फोर्टनाइट स्ट्रीमर के रूप में मान्यता दी है। उनका नाम ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स गेमर्स एडिशन 2027’ में भी दर्ज किया गया है। कैथ का मानना है कि गेमिंग शुरू करने के लिए कोई कभी बहुत वृद्ध नहीं होता। उनकी कहानी उन लोगों के लिए खास संदेश है, जो उम्र, तकनीक या बदलाव के डर से कुछ नया सीखने से पीछे हट जाते हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के काम की संस्थाएं
जीवन अंकुर वृद्धाश्रम  बुजुर्गों को सुरक्षित, सुविधाजनक और अपनापन भरा वातावरण उपलब्ध कराता है। यहां वरिष्ठजनों के लिए आरामदायक आवास के साथ पौष्टिक और नियमित भोजन की व्यवस्था है। उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए उन्हें आवश्यक दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाती हैं और सप्ताह में नियमित रूप से बीपी व शुगर की जांच भी की जाती है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट  www.jeevanankurtrust.org.in पर या 8169615400 पर संपर्क कर सकते हैं।


सदादेवी फाउंडेशन  बुजुर्गों के लिए रहने की व्यवस्था के साथ भोजन की सुविधा प्रदान करती है। विशेष रूप से योग, ध्यान व भजन जैसी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों में बुजुर्गों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट sadadevifoundation.com पर या sadadevifoundation@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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