फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Second aspect: How deep are the oceans? Calculating this is extremely complex

दूसरा पहलू: आखिर कितने गहरे होते हैं समुद्र, बेहद जटिल है इसकी गणना

Mon, 17 Mar 2025 07:25 AM IST
शुभम कुमार सुजैन ओ कोनेल
सुजैन ओ कोनेल Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 17 Mar 2025 07:25 AM IST
सार

वर्ष 1872 में ब्रिटिश नौसेना का जहाज  चैलेंजर समुद्र और उसकी गहराई का पता लगाने के लिए 291 किलोमीटर लंबी रस्सी अपने साथ लेकर गया था। एचएमएस चैलेंजर के दल ने अपनी चार साल की समुद्री यात्रा के दौरान पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के सबसे गहरे क्षेत्रों में से एक मारियाना ट्रेंच (खाई) की भी खोज की, जो 2,540 किलोमीटर तक फैली हुई है।

विज्ञापन
Second aspect: How deep are the oceans? Calculating this is extremely complex
समुद्र की गहराई - फोटो : एजेंसी

विस्तार

खोजकर्ताओं ने करीब पांच सौ साल पहले नेविगेशन चार्ट बनाना शुरू कर दिया था, जिससे पता चलता था कि समुद्र कितना चौड़ा है। लेकिन इस बात की गणना करना बहुत मुश्किल है कि इसकी गहराई कितनी है। अगर आप किसी तालाब या झील की गहराई मापना चाहते हैं, तो एक रस्सी या तार से वजन बांधकर पानी में डालकर माप सकते हैं, लेकिन समुद्र के लिए हजारों फीट लंबी रस्सी की जरूरत पड़ेगी।
विज्ञापन


वर्ष 1872 में ब्रिटिश नौसेना का जहाज एचएमएस चैलेंजर समुद्र और उसकी गहराई का पता लगाने के लिए रवाना हुआ था और यह 291 किलोमीटर लंबी रस्सी अपने साथ लेकर गया था। अपनी चार साल लंबी समुद्री यात्रा के दौरान चैलेंजर के दल ने समुद्र के अलग-अलग क्षेत्रों से चट्टानों, मिट्टी और जीवों के सैंपल एकत्रित किए। उन्होंने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के सबसे गहरे क्षेत्रों में से एक मारियाना ट्रेंच (खाई) की भी खोज की, जो 2,540 किलोमीटर तक फैली हुई है। आज वैज्ञानिकों को पता है कि समुद्र की औसतन गहराई 3.7 किलोमीटर है, लेकिन इसके कई हिस्से ज्यादा उथले या गहरे हैं।
विज्ञापन


गहराई मापने के लिए खोजकर्ता साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग का उपयोग करते हैं। एक जहाज ध्वनि ऊर्जा के स्पंदन भेजता है और ध्वनि कितनी तेजी से वापस यात्रा करती है, इसके आधार पर गहराई मापी जाती है। महासागर के सबसे गहरे हिस्से खाइयां हैं। एचएमएस चैलेंजर ने मारियाना ट्रेंच के दक्षिणी छोर पर इनमें से एक क्षेत्र का नमूना लिया, जो महासागर का सबसे गहरा बिंदु हो सकता है। चैलेंजर डीप के नाम से जाना जाने वाला यह ट्रेंच 11 किलोमीटर गहरा है। मेरे जैसे समुद्र वैज्ञानिक समुद्र के तल का अध्ययन करते हैं, इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि पृथ्वी कैसे काम करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उदाहरण के लिए, हमारे ग्रह की बाहरी परत टेक्टोनिक प्लेटों से बनी है-चट्टान और तलछट के विशाल हिलते हुए स्लैब। समुद्र तल पर चोटियों की पंक्ति हवाईयन-सम्राट सीमाउंट शृंखला तब बनी, जब एक टेक्टोनिक प्लेट उस स्थान पर चली गई, जहां पृथ्वी के अंदर से गर्म चट्टानें उभरी थीं। जब दो टेक्टोनिक प्लेटें पानी के अंदर एक-दूसरे से दूर जाती हैं, तब नई सामग्री पृथ्वी की पपड़ी में ऊपर उठती है। इस प्रक्रिया से नए महासागर तल का निर्माण होता है, जिसे सीफ्लोर स्प्रेडिंग कहा जाता है। पृथ्वी के अंदर से अत्यधिक गर्म तरल पदार्थ समुद्र तल में दरारों के माध्यम से ऊपर की ओर उछलता है, जिसे हाइड्रोथर्मल वेंट कहा जाता है। इन क्षेत्रों में अद्भुत मछलियां, शंख, ट्यूब वर्म और अन्य जीव रहते हैं। महासागरीय प्लेटों के निर्माण और विनाश के बीच तलछट समुद्र तल पर जमा हो जाती है और पृथ्वी के इतिहास, जलवायु व जीवन का विकास करती है, जो कहीं और उपलब्ध नहीं है।

-द कन्वर्सेशन से
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed