रविचंद्रन अश्विन: पिता बनाना चाहते थे तेज गेंदबाज, बेटे ने स्पिन से जीत ली दुनिया
113 वनडे में अश्विन के 151 विकेट हैं, जबकि 92 टेस्ट मैचों में वह 474 विकेट ले चुके हैं। 65 टी-20 मैचों में उन्होंने 72 विकेट लिए हैं। अश्विन के स्पिनर बनने की कहानी काफी दिलचस्प है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन के पिता तेज गेंदबाज थे और बेटे को भी तेज गेंदबाज ही बनाना चाहते थे, लेकिन रविचंद्रन अश्विन की किस्मत में ऑफ स्पिनर बनकर दुनिया में नाम कमाना लिखा था। वेस्टइंडीज के रोसेउ मैदान पर रविचंद्रन अश्विन ने रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। एक रिकॉर्ड तो ऐसा बना दिया, जिसे तोड़ना नामुमकिन तो नहीं, लेकिन बेहद मुश्किल जरूर है।
रोसेउ में रविचंद्रन अश्विन ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाज तेजनारायण चंद्रपॉल का विकेट लिया। तेजनारायण वेस्टइंडीज के प्रसिद्ध क्रिकेटर शिवनारायण चंद्रपाल के बेटे हैं। शिवनारायण चंद्रपॉल को रविचंद्रन अश्विन ने वर्ष 2011 में टेस्ट मैच में आउट किया था, यानी पिता-पुत्र दोनों को आउट करने वाले रविचंद्रन अश्विन पहले भारतीय गेंजबाज बन गए हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ रविचंद्रन अश्विन के प्रदर्शन के बाद निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट टीम के सेलेक्टर्स को इस बात का दुःख हो रहा होगा कि उन्होंने टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में रविचंद्रन अश्विन को क्यों नहीं खिलाया? रविचंद्रन अश्विन न केवल अच्छे स्पिन गेंदबाज हैं, बल्कि लोअर ऑर्डर में बेहतरीन बल्लेबाजी भी कर लेते हैं।
संयोगवश बने थे स्पिनर
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पैदा हुए रविचंद्रन अश्विन की शुरुआत से इच्छा बल्लेबाज बनने की थी। हालांकि, पिता की भावनाओं का ख्याल रखते हुए वो तेज गेंदबाजी भी करते थे। 14 साल की उम्र में रविचंद्रन अश्विन के बाएं पैर के लिगामेंट में दिक्कत आ गई थी और यूं लग रहा था कि उनका क्रिकेट करियर आगे नहीं बढ़ेगा, लेकिन डॉक्टरों की सलाह पर सालभर बेड रेस्ट के बाद वह फिट हो गए। यह उनके क्रिकेट कैरियर में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट था।
अश्विन के तेज गेंदबाज से स्पिनर बनने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। दरअसल, अश्विन बीमारी से उठकर आए थे और उनकी स्कूल टीम को स्पिनर की जरूरत थी। शारीरिक रूप से कमजोर अश्विन ने इस अवसर को पकड़ लिया और ऑफ स्पिन गेंदबाजी शुरू कर दी।
क्रिकेटर के साथ रविचंद्रन अश्विन पढ़ाई में भी अच्छे थे और उन्होंने चेन्नई के ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बी.टेक की डिग्री हासिल की। घरेलू क्रिकेट में कुछ वर्ष बिताने के बाद रविचंद्रन अश्विन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने का मौका मिला।
श्रीलंका के खिलाफ उन्होंने वर्ष 2010 में पहला वनडे खेला और इसी साल टी-20 मैचों में भी पदार्पण किया। अगले ही साल उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में खेलने का मौका मिल गया। इसके बाद रविचंद्रन अश्विन ने पलटकर नहीं देखा। 113 वनडे में अश्विन के 151 विकेट हैं, जबकि 92 टेस्ट मैचों में 474 विकेट ले चुके हैं। 65 टी-20 मैचों में उन्होंने 72 विकेट लिए हैं।
शेन वॉर्न भी रविचंद्रन अश्विन से पीछे
रोसेउ में रविचंद्रन अश्विन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 700 विकेट लेने वाले क्लब में भी शामिल हो गए और उन्होंने यह करिश्मा मात्र 351 मैचों में किया है। उनसे आगे केवल श्रीलंका के एम.मुरलीधरन हैं, जिन्होंने 308 मैचों में 700 विकेट लिए थे। स्पिन के जादूगर शेन वॉर्न भी इस मामले में रविचंद्रन अश्विन से पीछे हैं और उन्हें 354 मैचों में 700 विकेट लिए थे।
अगर भारतीय गेंदबाजों की बात करें तो रविचंद्रन अश्विन से आगे अनिल कुंबले और हरभजन सिंह हैं। कुंबले के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 956 विकेट हैं, जबकि हरभजन ने 711 विकेट लिए हैं। कुंबले का रिकॉर्ड तो रविचंद्रन अश्विन तोड़ पाएंगे, यह थोड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन हरभजन सिंह का रिकॉर्ड ज्यादा दिन उनके आगे टिकने वाला नहीं है। रविचंद्रन अश्विन न केवल खुद खेल रहे हैं, बल्कि वह अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों को भी तैयार करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। चेन्नई में पिछले कई साल से अश्विन जेन नेक्स्ट क्रिकेट इंस्टीट्यूट भी चला रहे हैं।
ऐसा नहीं है, केवल रविचंद्रन अश्विन ने गेंद से ही कमाल किया हो। उन्होंने टेस्ट मैचों में 5 शतकीय पारी खेली है और 13 अर्धशतक जमाए हैं, टेस्ट क्रिकेट के लिए अश्विन एक परफेक्ट खिलाड़ी हैं। कुछ दिन पहले इंग्लैंड में खेले गए टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में जब रविचंद्रन अश्विन को नहीं खिलाया गया था तो क्रिकेट आलोचकों ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की कड़ी निंदा की थी।
आज बीसीसीआई के सेलेक्टर्स को यह बात समझ में आ रही होगी कि रविचंद्रन अश्विन किस क्षमता के खिलाड़ी हैं और वह कैसे ऑस्ट्रेलिया से टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल छीन सकते थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ रोसेउ में चल रहे टेस्ट मैच में रविचंद्रन अश्विन ने 5 विकेट लेकर भारत का पलड़ा भारी कर दिया है और जिस तरह की शुरुआत इस मैच में कप्तान रोहित शर्मा और यशस्वी जायसवाल ने दी है, लग रहा है कि भारत एक बड़ी जीत दर्ज कराने जा रहा है।
-----------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।