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रणवीर इलाहबादिया और समय रैना का "समय": यह कहानी बाजार, ब्रांडिंग और नैतिकता के चौराहे से शुरू होती है..!

Tue, 11 Feb 2025 07:52 PM IST
Kumar Rahman कुमार रहमान
Updated Tue, 11 Feb 2025 07:52 PM IST
सार


मुंबई के वर्सोवा में भी समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया और अपूर्वा मखीजा समेत शो के आयोजकों पर केस दर्ज किया गया है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन की मांग पर यूट्यूब ने इस विवादित एपिसोड को हटा दिया है। अलबत्ता विवाद अभी थमा नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद की आईटी कमेटी से शिकायत करके एक्शन लेने की मांग की है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस ने भी इसकी आलोचना की है। 

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Ranveer Allahbadia Controversy And The Question Of Freedom of Speech on Irresponsible Content
मुंबई के वर्सोवा में भी समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया और अपूर्वा मखीजा समेत शो के आयोजकों पर केस दर्ज किया गया है। - फोटो : instagram.Ranveer Allahbadia

विस्तार

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एक हैं रणवीर अलाहाबादिया। पॉडकास्टर हैं। एक शो में उन्होंने एक ऐसा प्रश्न पूछा, जिस पर गंभीर विवाद छिड़ गया है। इस सवाल पर बवाल मचा हुआ है और बवाल मचने पर भी कई सवाल हैं! विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांग ली है, लेकिन कई सवाल हैं जिन पर चर्चा जरूरी है। आखिर ऐसा सवाल किया क्यों गया? और अगर ऐसा सवाल पूछा भी गया था तो उसे एडिटिंग में हटाया क्यों नहीं गया? क्या सिर्फ कॉमेडियन के कुछ बोलने से अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस शुरू होती है और सियासी नेताओं को इससे छूट है?

क्या है मामला? 

सबसे पहले जान लेते हैं कि पूरा मामला क्या है? समय रैना के यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ में यूट्यूबर रणवीर अलाहाबादिया जज थे। शो के हर एपिसोड में नए कंटेस्टेंट को परफॉर्म करने का मौका मिलता है। कंटेस्टेंट को टैलेंट दिखाने के लिए सिर्फ 90 सेकेंड का समय दिया जाता है। बाद में जजेज उससे सवाल भी करते हैं। आमतौर पर इसमें बोल्ड कॉमेडी कंटेंट होता है। इस शो में अलाहाबादिया ने पैरेंट्स पर अश्लील और अनावश्यक सवाल पूछा। यह एपिसोड आठ फरवरी को यूट्यूब पर अपलोड किया गया। एपिसोड आते ही इस पर विवाद शुरू हो गया। कई जगह पर इस मामले में एफआईआर लिखाई गई है।

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मुंबई के वर्सोवा में भी समय रैना, रणवीर अलाहाबादिया और अपूर्वा मखीजा समेत शो के आयोजकों पर केस दर्ज किया गया है। नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन की मांग पर यूट्यूब ने इस विवादित एपिसोड को हटा दिया है। अलबत्ता विवाद अभी थमा नहीं है। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद की आईटी कमेटी से शिकायत करके एक्शन लेने की मांग की है। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस ने भी इसकी आलोचना की है। 

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बाजार और ब्रांडिंग-

इस दुनिया में सब कुछ बिकता है। बिकता इसलिए है कि हर चीज के खरीदार मौजूद हैं। रिश्ते-नाते ही नहीं बातें तक बिकती हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर तो ज्यादातर बातें ही बिक रही हैं। यहां अश्लीलता के ‘खरीदारों’ की भरमार है। ऐसे कंटेंट को न सिर्फ लाखों व्यू मिलते हैं, बल्कि बदले में यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टा जैसे प्लेटफार्म मोटा मुनाफा भी देते हैं।


क्रिएटिव कंटेंट बनाने में समझ और मेहनत की जरूरत होती है, लेकिन अश्लील सामग्री में नहीं। यही वजह है कि ऐसे भोंडे और अश्लील कंटेंट की सोशल मीडिया पर भरमार है और ‘खरीदार’ हैं। समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के भी 73 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। 

Ranveer Allahbadia Controversy And The Question Of Freedom of Speech on Irresponsible Content
समय रैना के वीडियोज पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं- - फोटो : Instagram

इनके तकरीबन हर एपिसोड पर कई लाख व्यू भी आते हैं। जब अलाहाबादिया ने एक बेसिर-पैर का अश्लील सवाल पूछा था तो कायदे से रैना को एडिटिंग में उसे हटा देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। निश्चित ही उन्हें यह ‘बिकाऊ माल’ लगा और उन्होंने इसे जाने दिया। रैना जैसे यूट्यूबर सेल्फ रिस्पांसबिल्टी को नहीं मानते और उन्हें लगता है कि कोई भी ‘बकवास’ बिक सकती है तो उसे मार्केट में बेच देना चाहिए। उन्हें यह भी पता है कि विवाद होने पर मुफ्त में उनकी ब्रांडिंग होगी। बाकी कानूनी पचड़ तो निपट ही जाएंगे। वैसे भी ऐसे मामलों को भारतीय न्याय व्यवस्था बहुत गंभीरता से नहीं लेती है। कई बार तो महज माफी मांगने से भी काम चल जाता है। 


बात नैतिकता की-

सोशल मीडिया के आने के बाद से भारतीय समाज बदला है और उसमें तेजी से खुलापन आया है। रील्स के रूप में सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री भरी पड़ी है। चूंकि रील्स बनाने वाले इनमें से ज्यादातर लोगों की न तो कोई पहचान होती है और न उनसे नैतिकता की उम्मीद ही की जाती है। यह मामला इसलिए तूल पकड़ गया, क्योंकि अलाहाबादिया जाने-पहचाने यूट्यूबर हैं। रणवीर अलाहाबादिया को 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों नेशनल क्रिएटर्स अवॉर्ड्स में ‘डिसरप्टर ऑफ द ईयर’ का पुरस्कार मिला था। उस दौरान उन्होंने कई मंत्रियों और राजनेताओं के पॉडकास्ट किए थे। इससे उन्हें काफी शोहरत मिली थी।  


पहले भी रहा है विवादों से नाता

समय रैना का शो ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ पहले भी विवादों में रह चुका है। एक शो में कंटस्टेंट ने कहा था कि अरुणाचल के लोग डॉग मीट खाते हैं। इस मामले की भी शिकायत पुलिस से की गई थी। यहां अहम बात यह है कि इस पूरे मामले में अलाहाबादिया को दोषी माना जा रहा है, लेकिन शो को हॉस्ट समय रैना की भी जिम्मेदारी बनती है कि इस तरह का कंटेंट को वह रोक सकते थे। 


कुछ सवाल अब भी हैं-

देश के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) सभी नागरिकों को अपने विचार व्यक्त करने का समान अधिकार देता है। यह अधिकार बोलने के साथ ही लिखने या छापने और दृश्य प्रस्तुतीकरण के लिए दिया गया है। अहम यह भी है कि इससे भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या नैतिकता, अदालत की अवमानना, मानहानि, अपराध के लिए उकसाना, या संसद की संप्रभुता और अखंडता के हितों का नुकसान न होता हो। यह बात तो हुई अभिव्यक्ति की जिम्मेदारी की। यह नियम सभी के लिए समान हैं, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा होता भी है? इसी बात पर कुछ लोग सोशल मीडिया पर सवाल भी उठा रहे हैं।


उनका कहना है कि जब कोई कॉमेडियन कुछ कह देता है तो उसे कानून के दायरे में लाया जाता है, लेकिन देश के तमाम राजनेता कुछ भी बोलते रहते हैं जो न सिर्फ समाज के लिए बल्कि देश के लिए भी घातक हो सकता है। ऐसे लोगों पर कभी भी कार्रवाई नहीं होती है और न इस तरह से हाय-तौबा मचती है। कुछ ने तो संसद में अश्लील भाषा बोले जाने का भी जिक्र किया है। उन्होंने इलाहाबादिया के मामले को बेजा सेंसरशिप कहां है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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