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राज और नीति : दिल्ली में मध्य प्रदेश के अधिकारियों का दबदबा
सार
मध्य प्रदेश कैडर के 39 आईएएस अधिकारी इस समय दिल्ली में विभिन्न पदों पर तैनात हैं। इनमें 36 अधिकारी साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में कार्यरत बताए गए हैं। इसके अलावा तीन पूर्व आईएएस अधिकारी भी महत्वपूर्ण पदों पर हैं। विवेक अग्रवाल एफएटीएफ के उपाध्यक्ष हैं, जबकि अनुराग जैन नीति आयोग के सीईओ हैं।
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राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश कैडर के 39 आईएएस अधिकारी इस वक्त दिल्ली में कहीं ना कहीं किसी न किसी पद पर पदस्थ हैं। एक अधिकारी तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुके हैं। दिल्ली स्थित पावर सेंटर साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक में इस समय मध्य प्रदेश कैडर के 36 अधिकारी पदस्थ हैं। इससे पहले शायद ही इतने अधिकारी कभी वहां पदस्थ रहे हो। इनमें 10 सेक्रेटरी, पांच एडिशनल सेक्रेटरी और 21 जॉइंट सेक्रेटरी और डिप्टी सेक्रेटरी स्तर के पद पर पदस्थ हैं। इसके अलावा तीन पूर्व आईएएस अधिकारी भी महत्वपूर्ण पदों पर पदस्थ हैं। इनमें 1986 बैच के अनिल कुमार जैन पेट्रोलियम और नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड के चेयरपर्सन है। 1986 बैच के अजय तिर्की लोकपाल के मेंबर और पूर्व मुख्य सचिव और 1989 बैच के अधिकारी अनुराग जैन नीति आयोग के सीईओ हैं। केंद्र में संस्कृति सचिव 1994 बैच के विवेक अग्रवाल अंतरराष्ट्रीय संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के उपाध्यक्ष हैं। हम कह सकते हैं कि देश के पावर कॉरिडोर में मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी छाए हुए हैं।
प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी
प्रदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों तक एक बार फिर प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी है। इनमें आधा दर्जन जिलों के कलेक्टरों सहित मंत्रालय में एक से अधिक विभाग देख रहे अधिकारियों और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया जा सकता है। जहां बदलाव हो सकता है उनमें ग्वालियर, सिंगरौली, सतना, पन्ना, शाजापुर शामिल हैं। चंबल कमिश्नर सुरेश कुमार 30 सितंबर को रिटायर हो गए हैं। उनके स्थान पर भी नए अफसर की पोस्टिंग होगी। संभागीय कमिश्नर और मंत्रालय में ऐसे अधिकारी जिन्हें करीब दो साल या दो साल से भी ज्यादा एक ही विभाग में काम करते हुए हो गया है, उन्हें भी बदला जा सकता है। मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पदस्थ कई अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया जा सकता है।
ग्वालियर के आईजी का पद दो महीने से खाली
कानून और व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्वालियर संभाग में दो महीने से खाली पड़े आईजी पद की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में खूब है। अरविंद सक्सेना के यहां से रिटायर होने के बाद से पद का प्रभार डीआईजी असित यादव के जिम्मे है। अंदरखाने में चर्चा है कि यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के पद व प्रभाव के आधार पर भी फैसले के लिये मामला अटका हुआ है। पता चला है कि अभी दोनों तरफ से किसी विशेष पसंद की पैरवी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में यहां का फैसला कर सकती है।
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निमाड़ में गांजा पट्टी नेटवर्क की जांच बनी चुनौती
प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के खरगोन और बड़वानी जिले में में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती पकड़े जाने के बाद अब पुलिस के सामने फसल के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती है। खेतों में बहुत ही व्यवस्थित तरीके से सोलर, ड्रिप सिंचाई व्यवस्था मिलने से पुलिस बीज, सिंचाई, निवेश और खेती के लिए संसाधनों की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि खेती में निवेश किसका था, फसल की संभावित बिक्री किसे होनी थी और क्या अलग-अलग मामलों के बीच कोई साझा संपर्क है।
आशा और निराशा के बीच पेंडुलम बने अफसर
पोस्टिंग की प्रत्याशा में आशा और निराशा के बीच आईएफएस अफसर पेंडुलम बने हुए हैं। अब तो उनके सब्र का बांध भी टूट रहा है, क्योंकि पोस्टिंग के प्रस्ताव मंत्रालय में अनुमोदन के लिए अटके पड़े है। वन विभाग में पहली बार पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के पद साल भर से ज्यादा समय से रिक्त हैं। कमोबेश यही स्थिति सिवनी और शहडोल सर्किल की है, जहां मुख्य वन संरक्षक या वन संरक्षक के पद खाली हैं। इसी प्रकार से करीब 6-7 महीनों से सीएफ ग्वालियर सर्किल का पद खाली है। इन सभी पदों का अतिरिक्त प्रभार से संचालन किया जा रहा है। रीवा सर्किल भी दो महीने से रिक्त है। पता चला है कि रिक्त पदों पर पोस्टिंग करने के प्रस्ताव वन बल प्रमुख ने कब से दे रखे हैं, लेकिन शासन स्तर पर लंबित बताए जा रहे हैं।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी
प्रदेश में मंत्रालय से लेकर जिलों तक एक बार फिर प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी है। इनमें आधा दर्जन जिलों के कलेक्टरों सहित मंत्रालय में एक से अधिक विभाग देख रहे अधिकारियों और लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया जा सकता है। जहां बदलाव हो सकता है उनमें ग्वालियर, सिंगरौली, सतना, पन्ना, शाजापुर शामिल हैं। चंबल कमिश्नर सुरेश कुमार 30 सितंबर को रिटायर हो गए हैं। उनके स्थान पर भी नए अफसर की पोस्टिंग होगी। संभागीय कमिश्नर और मंत्रालय में ऐसे अधिकारी जिन्हें करीब दो साल या दो साल से भी ज्यादा एक ही विभाग में काम करते हुए हो गया है, उन्हें भी बदला जा सकता है। मंत्रालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों में पदस्थ कई अधिकारियों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया जा सकता है।
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ग्वालियर के आईजी का पद दो महीने से खाली
कानून और व्यवस्था की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्वालियर संभाग में दो महीने से खाली पड़े आईजी पद की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में खूब है। अरविंद सक्सेना के यहां से रिटायर होने के बाद से पद का प्रभार डीआईजी असित यादव के जिम्मे है। अंदरखाने में चर्चा है कि यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर के पद व प्रभाव के आधार पर भी फैसले के लिये मामला अटका हुआ है। पता चला है कि अभी दोनों तरफ से किसी विशेष पसंद की पैरवी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि सरकार अगले कुछ दिनों में यहां का फैसला कर सकती है।
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निमाड़ में गांजा पट्टी नेटवर्क की जांच बनी चुनौती
प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के खरगोन और बड़वानी जिले में में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती पकड़े जाने के बाद अब पुलिस के सामने फसल के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती है। खेतों में बहुत ही व्यवस्थित तरीके से सोलर, ड्रिप सिंचाई व्यवस्था मिलने से पुलिस बीज, सिंचाई, निवेश और खेती के लिए संसाधनों की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि खेती में निवेश किसका था, फसल की संभावित बिक्री किसे होनी थी और क्या अलग-अलग मामलों के बीच कोई साझा संपर्क है।
आशा और निराशा के बीच पेंडुलम बने अफसर
पोस्टिंग की प्रत्याशा में आशा और निराशा के बीच आईएफएस अफसर पेंडुलम बने हुए हैं। अब तो उनके सब्र का बांध भी टूट रहा है, क्योंकि पोस्टिंग के प्रस्ताव मंत्रालय में अनुमोदन के लिए अटके पड़े है। वन विभाग में पहली बार पन्ना टाइगर रिजर्व और संजय टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के पद साल भर से ज्यादा समय से रिक्त हैं। कमोबेश यही स्थिति सिवनी और शहडोल सर्किल की है, जहां मुख्य वन संरक्षक या वन संरक्षक के पद खाली हैं। इसी प्रकार से करीब 6-7 महीनों से सीएफ ग्वालियर सर्किल का पद खाली है। इन सभी पदों का अतिरिक्त प्रभार से संचालन किया जा रहा है। रीवा सर्किल भी दो महीने से रिक्त है। पता चला है कि रिक्त पदों पर पोस्टिंग करने के प्रस्ताव वन बल प्रमुख ने कब से दे रखे हैं, लेकिन शासन स्तर पर लंबित बताए जा रहे हैं।
अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।