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बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: कितनी आसान है भाजपा के लिए बंगाल की राह?

Sun, 04 Apr 2021 09:11 PM IST
Sarjana Sharma सर्जना शर्मा
Updated Sun, 04 Apr 2021 09:11 PM IST
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political analysis of west bengal election 2021 know about political situation of tmc bjp and congress
भाजपा के लिए आसान नहीं है बंगाल की राह? - फोटो : PTI

बंगाल का चुनाव हर दिन एक नया रंग, नया तेवर, लेकर आता है। चुनाव का अगला चरण पहले से ज्यादा रहस्य रोमांच से भरपूर होता है। पिछले तीन चार दिन से कोलकाता का नीला रंग धीरे-धीरे भगवा या कहें तो केसरिया भी होता जा रहा है। पहले पूरे शहर में ममता दीदी के बड़े-बड़े होर्डिंग और पोस्टर थे, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ जोड़े हुए बड़े इक्का-दुक्का होर्डिंग और खंभों पर भाजपा का चुनाव चिन्ह कमल नज़र आने लगा है।

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तृणमूल के जोड़ा फूल चुनाव चिन्हों के बीच कमल के फूल भी खिलने शुरू हो गए हैं। देखा जाए तो ये एक बहुत बड़ा परिवर्तन है। कोलकाता नगर निगम  पूरी तरह से दीदीमय है, किसकी हिम्मत की भाजपा को होर्डिंग या खंभा दे। 
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बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और हाबड़ा से भाजपा उम्मीदवार राहुल सिन्हा का कहते हैं- पहले और दूसरे चरण के चुनाव ने बता दिया है कि टीएमसी केेलिए चुनाव में जीत की राह आसान नहींं हैैै। वे कहते हैं- अभी तो देखते जाइए जैसे जैसे एक-एक चरण पूरा होगा वैसे-वैसे तस्वीर बदलती जाएगी।  

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बंगाल में रोड शो करते अमित शाह। - फोटो : ANI

भाजपा की रणनीति
दरअसल, भाजपा ने अपनी रणनीति चाणक्य की तरह तैयार की है। भाजपा लंबे समय से बंगाल पर काम कर रही थी। एक-एक विधानसभा सीट एक-एक बूथ का आंकलन, तृणमूल के नेता और ममता दीदी के दाएं हाथ मुकुल राय को भाजपा में लाना अमित शाह का एक बड़ा दांव था। वे दीदी के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब हुए, जो लोग बंगाल की राजनीति को अच्छे से समझते हैं उनका कहना है- मुकुल राय तृणमूल कांग्रेस की यशोदा मां थे। ममता दीदी ने देवकी की तरह भले ही तृणमूल कांग्रेस को जन्म दिया हो, लेकिन इसका लालन-पालन मुकुल राय ने यशोदा मैय्या की तरह किया था।

कोलकाता के अनेक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं- भद्रलोक को संदेश देने में भी भाजपा कामयाब हुई है। दिनेश त्रिवेदी हालांकि ज़मीनी नेता नहीं है लेकिन उनकी छवि बंगाल के भद्रलोक में अच्छी है इसलिए उनको भी तोड़ लिया। सौरव गांगुली को भाजपा में लाने में नेता कामयाब नहीं हो पाए, लेकिन उनको बीसीसीआई का अध्यक्ष बना कर भाजपा ने ये चाल भी अच्छे से चली।

कोलकाता के एक डॉक्टर समीर कहते हैं- उम्मीदवारों का चुनाव भी एक बड़ी रणनीति रहा। हालांकि बंगाल भाजपा में टिकट दिए जाने पर भारी विरोध और घमासान हुआ। पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है ये अटल जी और अड़वाणी जी के आदर्शों की पार्टी नहीं है ये दूसरी ही भाजपा है। स्थानीय नेताओं की भी नहीं चली। कौन टीएमसी उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दे सकता है यही सबसे बड़ा पैमाना रहा। टीएमसी लंबे समय से बंगाल में सत्ता में है अनेक बांग्ला फिल्मी और टीवी सितारों की ममता दीदी से नज़दीकी है। 

भाजपा टीएमसी के सितारों का मुकाबला अपने सितारों से कर रही है। अनेक बांग्ला सितारों को भाजपा में शामिल करके उन्हें चुनाव मैदान में उतार दिया। भद्रलोक और बुद्धिजीवियों के सामने भद्रलोक को चुनाव मैदान में उतारा। बाहुबलियों के सामने बाहुबलियों को उतारा। चाहे उनकी अपने इलाके में छवि कितनी भी खराब हो भाजपा ने अपना उम्मीदवार बना लिया। 24 परगना की कुलतोली सीट से टीएमसी ने बहुत बड़े बाहुबली गणेशमंडल को टिकट दिया जो कि तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष है। उस पर रेप, हत्या डराने धमकाने के अनेक मामले दर्ज हैं।

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भाजपा ने लगातार टीएमसी को चुनौती दी है। - फोटो : ANI

कमजोर वाम और कांग्रेस 
थोड़े ही समय में भाजपा बंगाल में एक बड़ी ताकत बन कर उभरी है। इतनी बड़ी ताकत की मुकाबला केवल दो में है भाजपा और तृणमूल कांग्रेस तीसरा कोई नहीं । देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की चुनावों में कोई दिलचस्पी लगती ही नहीं।

कांग्रेस उम्मीदवार यहां बेहाल और परेशान हैं। उनका दर्द है कि कोई भी बड़ा नेता चुनाव प्रचार के लिए बंगाल नहीं आ रहा है। राहुल गांधी ने अपने को केरल तक सीमित कर लिया है। पार्टी पैसे से  भी कोई मदद नहीं कर रही है । कोलकाता शहर में तो कम से कम कांग्रेस का चुनाव प्रचार न के बराबर है ।

उधर लगभग चार दशक तक बंगाल पर राज करने वाली सीपीएम भी जोर शोर से प्रचार नहीं कर रही है। भाजपा की तरफ नरम और तृणमूल की तरफ कड़ी है। सीपीएम नेता खुले आम कह रहे हैं उनकी पहली दुश्मन तृणमूल कांग्रेस है पहले इनसे निपट लें भाजपा से तो बाद में निपट लेंगें।

कुल मिलाकर ममता दीदी चारों तरफ से घिरी हैं लेकिन उनका भी अपना मज़बूत वोट बैंक है। जो उनको भारी मात्रा में वोट देगा। देखना ये है भाजपा की चाणक्य नीति या दीदी का मज़बूत वोट बैंक बाजी कौन मारेगा।  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

 

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