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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   PM Modi Magic Goes Viral: From Melody Toffee to Global Political Branding

Pm modi and Meloni gift: यह मेलोडी नहीं, मोदी की डिप्लोमेसी का जादू है..!

Wed, 20 May 2026 11:05 PM IST
Hari Verma हरि वर्मा
Updated Wed, 20 May 2026 11:05 PM IST
सार

मोदी अपने-आप में ब्रांड हैं। सियासी पिच पर बिहार के चुनावी अखाड़े में गमछा से गर्दा उड़ाने की शैली हो या अगोसा (अंगोछा) से असमिया अस्मिता से जुड़ने का अंदाज या फिर बंगाल में झालमुड़ी की तीखी मिर्ची का विरोधियों को स्वाद चखाना हो या अब चॉकलेटी मेलोडी से मेलनी को मेलोडी उपहार भेंट कर कुछ मीठा हो जाने की मिठास, दुनिया में छा जाने की मोदी की यह अनोखी शैली है। दुनिया इसकी दीवानी है।

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PM Modi Magic Goes Viral: From Melody Toffee to Global Political Branding
PM Modi Gift to Meloni - फोटो : X/@GiorgiaMeloni

विस्तार

सियासी पिच हो या सोशल मीडिया, मोदी अपने आप में ब्रांड हैं और यही कारण है कि उनका जादू देश-दुनिया में सर आंखों चढ़कर बोल रहा है। पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव में मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को मेलोडी टॉफी उपहार में दी तो एकाएक तीन घंटे के भीतर ही सोशल मीडिया पर यह मोदी मैजिक (वीडियो) 6 करोड़ से ज्यादा बार छा गया। इसी की चर्चा होती रही। और तो और मेलोडी टॉफी बनाने वाली पारले जी प्रोडक्ट इंडस्ट्री का शेयर (स्टॉक) 5 फीसदी तक उछलकर शेयर सर्किट (5.25 रुपये) हो गया। दरअसल, यह चॉकलेटी मेलोडी का नहीं बल्कि मोदी का जादू है। विरोधी भले इसे मोदी की नौटंकी बताते हों लेकिन हकीकत जुदा है और दुनिया दीवानी।

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सियासी पिच से सामाजिक सरोकार तक

मोदी सियासी पिच पर आक्रामक हेलिकॉप्टर शॉट से न केवल विरोधियों को चुनावी मैच में हराते रहे हैं बल्कि गूगली गेंदों से गिल्ली भी उड़ाने के माहिर हैं। बिहार में गमछा लहराकर गर्दा उड़ाने की घटना हो या असम में अंगोछा से असमिया अस्मिता से जोड़ने का अंदाज, सब वाकिफ हैं। हाल के बंगाल के चुनाव में झालमुड़ी खाकर विरोधियों को तीखी मिर्ची का अहसास कराया। अब इटली की पीएम मेलनी के साथ मोदी की यह मैत्री वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक तौर पर देश में मिठास घोलने जा रही है। मोदी-मेलनी मिलन के दरम्यान भारत में 2029 तक 29 बिलियन यूरो तक की अर्थव्यवस्था का खाका खींचा गया।

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पश्चिम एशिया संकट की इस घड़ी में मोदी पहले ही देशवासियों से तेल की कम खपत, सोने की खरीद न करने, ईंधन बचत, घर से काम और विदेश यात्रा में कटौती की अपील कर चुके हैं। इस अपील का असर दिखने लगा है। कुछ दिखावे का कदम है तो कुछ स्वत:स्फूर्त भी। आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ ईंधन संकट को लेकर यूएई से लेकर पांच देशों की इस यात्रा में मोदी का अर्थव्यवस्था को पंख देने, रक्षा और रणनीतिक समझौते पर ज्यादा जोर रहा।

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मोदी मैजिक पहले भी

2020 में कोरोना संकट के दौरान जब मोदी ने ताली-थाली बजाने या दीए-बाती जलाने की अपील की तो सारा देश एक अपील पर उनके साथ खड़ा हो गया था। तब भी विरोधियों ने ताली-थाली पीटने का मजाक उड़ाया। तभी मोदी ने वोकल फॉर लोकल का नारा देकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया। खादी कारोबार को 11 वर्षों में 447 फीसदी की वृद्धि दिलाकर 170.51 करोड़ के कारोबार तक ला दिया। बुनकरों की स्थिति बदली। फैशन और ब्रांडिंग के जमाने में हस्तकरघा की ओर लोगों का ध्यान खींचा। दिवाली पर चाइनीज झालर की जगह कुंभकारों के बनाए दीए-बाती से लाखों परिवारों के घर रोशन होने लगे।


स्टार्टअप और मेक इन इंडिया जैसी अपील से रक्षा उत्पादों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा। करीब-करीब 65 फीसदी रक्षा उपकरण देश में बनने लगे। आकाश और ब्रह्मोस का निर्यात होने लगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले ब्रह्मोस अब उत्तर प्रदेश में बनने लगे हैं। रक्षा मंत्रालय 67 फीसदी घरेलू खरीद को बढ़ावा दे रहा है। स्टार्टअप की वैश्विक रैंकिंग में भारत तीसरे नंबर पर आ गया है और यूनिकॉर्न 1 अरब डॉलर से ज्यादा हैं। तीसरी अर्थव्यवस्था की ओर जोर है।

सोशल मीडिया पर भी जादू

मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बढ़ा है। लोकप्रियता के मामले में दुनिया भर के नेताओं को मोदी ने पछाड़ दिया है। इंस्टा हो या यूट्यूब, मोदी के फॉलोअर्स सर्वाधिक हैं। यही कारण है कि जब वह बंगाल के चुनाव में झालमुड़ी खाते हैं तो एकाएक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झालमुड़ी की बाढ़ आ जाती है। अब मेलोडी टॉफी छा गई है। मोदी अपने प्रशंसकों के बूते ही सियासी पिच से लेकर दुनिया भर में छाए रहते हैं। देश में सत्ता के शिखर पर हैं। अपनी मेहनत के बूते राज्यों में भी कमल और सहयोगियों (एनडीए) का विस्तार कर रहे हैं।

देश की सत्ता के गलियारे से वामपंथ का पांव पूरी तरह से उखड़ चुका है। सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से अस्तित्व के लिए जूझ रही है। क्षत्रिय क्षत्रप छंटते जा रहे हैं। मोदी देश ही नहीं दुनिया में जहां जाते हैं, वहां का सर्वोच्च सम्मान मिलता है। मोदी विदेश यात्रा से लौटकर कैबिनेट की बैठक के अलावा ताजा वैश्विक संकट की समीक्षा करने वाले हैं। उनकी यही कार्यशैली उन्हें औरों से जुदा करती है। इसलिए मोदी शैली के विरोध में चाहे जो स्वर उठें लेकिन सच तो यही है कि यह मोदी का जादू है मितवा...।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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