ऑपरेशन सिंदूर का एक साल, आधुनिक युद्ध का नया व्याकरण और सबक
Operation Sindoor Anniversary: 'ऑपरेशन सिंदूर’ ने सबसे बड़ा सबक यही दिया कि युद्ध जीतने के लिए हर बार जमीन पर उतरना जरूरी नहीं होता। लंबी दूरी से किए गए सटीक हमले, मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना, यह सब दिखाता है कि अब दूरी बाधा नहीं, बल्कि रणनीति का हिस्सा बन गई है।
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विस्तार
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक वर्ष हो गया। आतंकी ठिकानों और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठानों पर एक साल पहले हुआ यह अभियान केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, अपितु भारत की सुरक्षा सोच में आए बदलाव का संकेत था। यह वह क्षण था, जब युद्ध की पारंपरिक तस्वीर, सीमा पार करती सेना, आमने-सामने की लड़ाई और लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष, धीरे-धीरे पीछे छूटते दिखे। उनकी जगह एक नया मॉडल सामने आया, जिसमें दूरी बनी रही, लेकिन प्रभाव गहरा और सटीक रहा।
इस पूरे अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि तकनीक, सूचना और समय के नियंत्रण का खेल बन चुका है। आज जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों, खासकर मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है तो यह समझ और भी मजबूत होती है कि भविष्य के संघर्ष कैसे आकार ले रहे हैं?
जीत के लिए जमीन पर उतरना जरूरी नहीं
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने सबसे बड़ा सबक यही दिया कि युद्ध जीतने के लिए हर बार जमीन पर उतरना जरूरी नहीं होता। लंबी दूरी से किए गए सटीक हमले, मिसाइलों और ड्रोन के माध्यम से दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना, यह सब दिखाता है कि अब दूरी बाधा नहीं, बल्कि रणनीति का हिस्सा बन गई है। इससे जोखिम कम होता है, लेकिन असर उतना ही गहरा रहता है। यही कारण है कि आधुनिक सैन्य सोच अब कम संसाधन, अधिक प्रभाव की दिशा में बढ़ रही है।
आज का युद्ध यह भी सिखाता है कि तकनीक ने शक्ति के संतुलन को बदल दिया है। पहले जहां महंगे लड़ाकू विमान ही निर्णायक माने जाते थे, वहीं अब छोटे-छोटे ड्रोन भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ड्रोन केवल हमला करने का साधन नहीं हैं। वे निगरानी करते हैं, सूचना जुटाते हैं और दुश्मन की रणनीति को बाधित करते हैं। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि अगर हमले के लिए ड्रोन हैं तो उनसे बचाव के लिए मजबूत एंटी-ड्रोन व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
आधुनिक युद्ध में केवल हमला करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि खुद को सुरक्षित रखना उतना ही जरूरी हो गया है। मजबूत वायु रक्षा प्रणाली यह सुनिश्चित करती है कि दुश्मन के हमले लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही निष्प्रभावी हो जाएं। इसका असर केवल सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक स्तर पर पड़ता है। जब सुरक्षा मजबूत होती है तो आत्मविश्वास बढ़ता है और रणनीति अधिक प्रभावी हो जाती है।
तकनीक से लड़ा गया युद्ध
आज का युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं लड़ा जा रहा। सूचना का नियंत्रण, संचार व्यवस्था को बाधित करना और साइबर हमलों के जरिए दुश्मन को कमजोर करना, ये सब उतने ही महत्वपूर्ण हो चुके हैं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह दिखाया कि सही जानकारी और उसका सही समय पर उपयोग युद्ध का रुख बदल सकता है। अब युद्ध का एक बड़ा हिस्सा अदृश्य है, लेकिन उसका असर सबसे ज्यादा होता है।
लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि यदि कोई देश अपने हथियारों और तकनीक के लिए दूसरों पर निर्भर है तो उसकी रणनीति भी सीमित हो जाती है। इसलिए आत्मनिर्भरता अब केवल विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि सुरक्षा का आधार बन चुकी है। अपने संसाधनों पर भरोसा ही संकट के समय सबसे बड़ी ताकत बनता है। आज भारत 65 प्रतिशत स्वदेशी हथियारों को इस्तेमाल में ले रहा है। हमारा अपना एंटी मिसाइल सिस्टम है।
युद्ध के परिणाम जल्द
हालांकि, अब युद्ध लंबे और थकाऊ संघर्ष के बजाय छोटे, तेज और सटीक होते जा रहे हैं। लक्ष्य स्पष्ट होता है और कार्रवाई सीमित, लेकिन प्रभावी होती है। परिणाम जल्दी सामने आते हैं। यह आधुनिक युद्ध का एक संतुलित और व्यावहारिक रूप है। आज के समय में युद्ध केवल जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहा। उपग्रहों के माध्यम से संचार, दिशा-निर्देशन और निगरानी, ये सभी युद्ध का अहम हिस्सा बन चुके हैं। जिस देश के पास मजबूत अंतरिक्ष क्षमता है, उसकी सैन्य ताकत भी उतनी ही मजबूत मानी जाती है।
वैसे, एक और बड़ा बदलाव यह है कि युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। इसका असर शहरों और आम लोगों तक पहुंच रहा है। इसलिए नागरिक सुरक्षा, आपातकालीन तैयारी और जागरूकता अब अनिवार्य हो गई है। आधुनिक युद्ध में पूरा समाज किसी न किसी रूप में शामिल होता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने यह दिखाया कि भारत अब केवल पारंपरिक सैन्य सोच तक सीमित नहीं है। वह तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है, जहां तकनीक, रणनीति और सटीकता सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है। यह बदलाव केवल हथियारों का नहीं, बल्कि सोच का है। अब युद्ध का मतलब केवल लड़ाई नहीं, बल्कि समझ, संतुलन और समय पर सही निर्णय लेना है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर यही सबसे बड़ा सबक उभरता है कि आधुनिक युद्ध में जीत उसी की होती है, जो समय से पहले बदलाव को समझ ले और खुद को उसके अनुसार ढाल ले।
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