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International Museum Day 2020: पर्यटकों के लिए खास हैं भारत के ये संग्रहालय

सार

  • सालार जंग संग्रहालय देश के सबसे विख्यात संग्रहालयों में है।
  • दिल्ली का राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय राष्ट्रीय पहचान बनाता है।
  • श्रीकृष्ण संग्रहालय को तीन खंडों एवं नौ दीर्घाओं में बांटा गया है।
  • भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को जानना है तो कुरूक्षेत्र में बना श्रीकृष्ण संग्रहालय अवश्य देखिए।

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most famous special museums in india for tourists
संग्रहालय हमारी सभ्यता और संस्कृति के संवाहक हैं। - फोटो : अमर उजाला- प्रतीकात्मक फोटो

विस्तार

संग्रहालय हमारी सभ्यता और संस्कृति के संवाहक हैं। पर्यटन को पुष्ट करने में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। भारतीय पर्यटकों के साथ पूरी दुनिया से आने वाले पर्यटकों को हमारे देश की संस्कृति की जानकारी देकर न केवल उनका मनोरंजन करते हैं वरन् ज्ञानवर्धन भी करते हैं। प्रदर्शित सामग्री को देखकर आश्चर्यचकित भी हो जाते हैं। भारत में यूं तो प्रायः सभी प्रमुख जगह संग्रहालय स्थापित हैं परंतु यहां देश के चुनिंदा प्रसिद्ध संग्रहालयों की जानकारी आपको दे रहे हैं।

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  • सालार जंग संग्रहालय,हैदराबाद
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हैदराबाद शहर में स्थित सालारजंग संग्रहालय संभवत: देश के सबसे विख्यात संग्रहालयों में है। यहां 1.1 मिलियन कलाकृतियों एवं कला खंडों का संग्रह इसे विशद एवं भव्य बनाता है। संग्रहालय की 36 दीर्घाओं में 43 हजार से अधिक कलाकृतियां, 9 हजार पांडुलिपियां एवं 47 हजार मुद्रित पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। कलाकृतियां अपने आप में बेजोड़ हैं।

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यहां के सर्वश्रेष्ठ संग्रह में से एक घड़ी कक्ष है। ऐतिहासिक समय वाली दुनिया भर की घड़ियों और समय देख-रेख उपकरणों की एक गैलरी है। इनमें 19वीं सदी की एक संगीतमय घड़ी को इंग्लैंड से लाया गया था।

यहां रोम, इटली आदि देशों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। कुरान संग्रह यहां भी प्रभावशाली है। मुगल काल की प्राचीन वस्तुएं जैसे औरंगजेब के खंजर, टीपू सुल्तान की अलमारी, मुगल काल की पत्थर की मूर्तियां, कलाकृति, और राजा रवि वर्मा की चित्रकारी को जरूर देखें, जो सालार जंग के अद्भुत संग्रह का एक हिस्सा हैं। यह संग्रहालय 16 दिसंबर 1951 में नवाब मीर यूसुफ खान के महल में स्थापित किया गया था।

हैदराबाद में इस संग्रहालय के साथ-साथ सिटी म्यूजियम,राज्य पुरातत्व संग्रहालय, बिड़ला विज्ञान संग्रहालय तथा हैदराबाद से 80 किमी.दूर सुरेंद्रपुरी का पौराणिक संग्रहालय भी दर्शनीय हैं।


 

दिल्ली का राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय राष्ट्रीय पहचान बनाता है....

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नृत्य करती मूर्ती, वादय यंत्र, भित्ती चित्र, कपड़े, हथियार आदि प्रदर्शित किए गए हैं। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
  • राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय, नई दिल्ली

ऐतिहासिक, पुरातात्विक, सांस्कृतिक एवं कलात्मक कृतियों के प्रदर्शन के साथ दिल्ली का राष्ट्रीय पुरातत्व संग्रहालय राष्ट्रीय पहचान बनाता है। जनपथ पर स्थित तीन मंजिले वर्तमान संग्रहालय की स्थापना वर्ष 1949 में की गई तथा इसका अपना भवन का वर्ष 1960 में बनकर तैयार हुआ और इसे जनता के खोला गया।

संग्रहालय में करीब 2 लाख भारतीय एवं विदेशी मूल की वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। यहां 2700 ईसा पूर्व के टेराकोटा और कांस्य से बनी वस्तुएं, मौर्यकाल की लकड़ी से बनी मूर्तियां, दक्षिण भारत की कलात्मक वस्तुएं, सिंधुघाटी सभ्यता, गुप्तकाल, गंधर्वकाल, मुगलकाल, बौद्धयुग तथा मोहनजोदड़ों के समय की कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।

मोहनजोदड़ों सभ्यता की नृत्य करती मूर्ती, वाद्य यंत्र ,भित्ती चित्र, कपड़े, हथियार आदि प्रदर्शित किए गए हैं। संग्रहालय को रुचि के साथ देखने वालों को शायद एक दिन कम पड़े। संग्रहालय में विश्व के अत्यंत लघु चित्रों का भी अच्छा संग्रह है।

संग्रहालय में पुरातत्व, मानव शास्त्र, मध्य एशियाई पुरावशेष, पाण्डुलिपियां, मुद्रा एवं अभिलेख, पूर्व कोलंबियन एवं पश्चिमी कलाएं तथा प्रागेतिहासिक और पुरातत्व आदि दीर्घाएं बनाई गई हैं। यहां एक संरक्षण प्रयोगशाला, पुस्तकालय, प्रकाशन विभाग एवं छायाचित्रण अनुभाग भी बनाए गए हैं।

यहां कलाकृतियों का फोटो प्रलेखन किया जाता है तथा इसके प्रिंट शोध करने वालों को उपलब्ध कराए जाते हैं। भारतीय कला एवं संस्कृति से संबंधित पुस्तकें भी खरीदने के लिए यहां उपलब्ध हैं। यहीं पर कोटा की झाला हवेली के चित्रों को संजोकर सुरक्षित रखा गया है।

प्रयोगशाला के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित करीब 11 एकड़ में फैला राष्ट्रीय रेल संग्रहालय बच्चों के लिए विशेष रूप से दर्शनीय है जहां भारत की रेल विकास यात्रा को अत्यंत रोचकता से दर्शाया गया है।


 

यहां प्राचीन भारतीय इतिहास के साथ विदेशी करीब 50 हजार वस्तुओं का अद्भुत संग्रह प्रदर्शित किया गया है...

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पर्यटन को पुष्ट करने में संग्रहालयों का महत्वपूर्ण स्थान है। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
  • भारतीय संग्रहालय,कोलकाता

कोलकाता के हावड़ा जंक्शन से 4 कि.मी. दूर स्थित एशिया के सबसे पुराने एवं भारत के सर्वश्रेष्ठ भारतीय संग्रहालय में 4 हजार वर्ष प्राचीन जीवाष्म, कलश में बुद्ध की अस्थियों के अवशेष, प्राचीन वस्तुएं, ममी, युद्धसामग्री, आभूषण, कंकाल, प्राचीन सिक्के, दुर्लभ मुगल चित्र, उल्का पिंड आदि 5 वीं से 17 वीं शताब्दी की प्राचीन वस्तुओं का संग्रह किया गया है।

संग्रहालय को 6 खंडों में तथा दो चित्रशालाओं में बांटा गया है। यहां खंडों में अनेक विथिकाएं बनी हैं। यह संग्रहालय करीब 8 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित है। इसकी स्थापना ऐशियाटिक सोसायटी के प्रयासों से 2 फरवरी 1814 ई. को की गई।

वर्ष 1857 में भारतीय संग्रहालय का अपना निजी भवन बना तथा 1883 ई.में इसमें चित्रशाला की स्थापना की गई। कोलकाता में विश्वविद्यालय के शताब्दी भवन में स्थित आशुतोष म्यूजियम ऑफ इंडियन आर्ट और मेट्रोपोलियन बाई पास सर्कल के जंक्शन पर साइंस सिटी म्यूजियम भी दर्शनीय है।

  • प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय,मुंबई

मुंबई में यह संग्रहालय इंडिया गेट के समीप तिमंजिले आयताकार भवन में करीब 3 एकड़ क्षेत्र में स्थित है। यहां प्राचीन भारतीय इतिहास के साथ विदेशी करीब 50 हजार वस्तुओं का अद्भुत संग्रह प्रदर्शित किया गया है।

यहां सामग्री को तीन खंडों कला, पुरातत्व एवं प्राकृतिक इतिहास में विभक्त किया गया है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर प्राचीन गुप्त एवं मौर्य समय की एतीहसिक वस्तुओं को सजाया गया हैं। विभिन्न कालों की चित्रशैलियां, प्राचीन पांडुलिपियां, हाथीदांत,सोने,चांदी एवं अन्य धातुओं की लकाकृतियां,अस्त्र-शस्त्र, भारतीय वन्यजीव, वस्त्र गैलरी,प्रसिद्ध चित्रकारों के चित्र, खुदाई में प्राप्त अवशेष एवं मूर्तियां देखने को मिलती हैं।

संग्रहालय के आधुनिकरण के तहत 2008 में पूर्व खंड में पांच नई दीर्घाएं, संरक्षण स्टूडियो,प्रदर्शनी गैलरी एवं एक सेमिनार कक्ष की सुविधा विकसित की गई। संग्रहालय की अपना समृद्ध पुस्तकालय भी है। संग्रहालय की स्थापना 1922 में कई गई थी।

संग्रहालय में प्रवेश करते ही एक मानचित्र पर 48 कोस कुरूक्षेत्र के दर्शन होते हैं....

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श्रीकृष्ण संग्रहालय को तीन खंडों एवं नौ दीर्घाओं में बांटा गया है - फोटो : फाइल फोटो
  • श्रीकृष्ण संग्रहालय,कुरुक्षेत्र

भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों को जानना है तो कुरूक्षेत्र में बना श्रीकृष्ण संग्रहालय अवश्य देखिए। इसका निर्माण कुरूक्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा 1987 ई. में किया गया था। इस भवन के साथ दो अन्य भवन भी हैं जिन्हें मल्टीमीडिया महाभारत और गीता गैलरी के नाम से जाना जाता है। जिसकी स्थापना 2012 ई. में की गई थी।

यहां संग्रहालय में महाभारत काल के दुर्लभ पौधें भी लगाए गए हैं। वनस्पति शास्त्र के ज्ञाताओं एवं प्रेमियों के लिए यह वनस्पति वृक्ष विशेष महत्व के हैं। यहां परिजात, खेजड़ी, कदम्ब, रूद्राक्ष, सेव, चम्पा, कनक, तुलसी आदि के सैकड़ों पौधें मिलते हैं।

श्रीकृष्ण संग्रहालय को तीन खंडों एवं नौ दीर्घाओं में बांटा गया है। वर्ष 1991 ई. में संग्रहालय में प्रथम खंड में स्थानांतरित किया गया तथा वर्ष 1995 ई. में दूसरे खंड तथा 2012 ई. में तीसरा खंड जोड़ा गया।

संग्रहालय में प्रवेश करते ही एक मानचित्र पर 48 कोस कुरूक्षेत्र के दर्शन होते हैं। संग्रहालय में विभिन्न कालों एवं शैलियों में निर्मित धातु, काष्ठ एवं हाथी दांत पर उत्कीर्ण कृष्ण की लीलाएं, प्रागेतिहासिक काल की पुरातत्व सामग्री, लघुचित्र, ताड़पत्रों पर बने चित्र, भगवत गीता, महाभारत एवं भागवत की पाण्डुलिपियां, आन्ध्र प्रदेश की चर्म कठपुतलियां, शर-शैय्या पर लेटे भीष्मपितामह एवं वीर अभिमन्यु के वध की झांकी, कागज पर बनी मधुबनी चित्रकला में श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर कंस वध तक प्रमुख प्रसंगों का चित्रण देखने को मिलता है।

इसके साथ ही श्रीकृष्ण कथा पर आधारित मनोरम झांकियों में नवजात कृष्ण को यमुना पार ले जाते हुए वासुदेव, सखाओं के संग माखन चोरी करते हुए बालकृष्ण, बानासुर का वध करते हुए कृष्ण, गोवर्धन पर्वत को धारण करते हुए, कालिया नाग का मर्दन करते हुए, रासलीला, राधा-कृष्ण मिलन, अर्जुन को संदेश देने की सुन्दर झांकियां बनाई गई हैं।

एक झांकी में भीष्म को प्रतिज्ञा लेते हुए दर्शाया गया है। चक्रव्यूह की रचना तथा पांडव स्वर्ग की ओर प्रस्थान करते हुए दिखाए गए हैं। संग्रहालय में गीता के उपदेश पर 11 मिनिट का एक शो दिखाया जाता है। यह संग्रहालय देखकर दर्शक उस लोक में चले जाते हैं जिसमें कृष्ण जन्म थे और उन्होंने विविध लीलाएं की थी। कृष्ण लोक का यह मायावी संसार आपको वर्षों तक याद रहेगा।

इनके साथ ही चेन्नई का एग्मोर संग्रहालय, दिल्ली में गुड़िया संग्रहालय, मथुरा प्राचीन मूर्तियों का संग्रहालय, जयपुर के हर्बर्ट हाल एवं सिटी पैलेस संग्रहालय एवं अहमदाबाद का केलिको म्यूजियम ऑफ टेक्सटाइल भी देश के महत्वपूर्ण संग्रहालयों में आते हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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