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Madhya pradesh assembly elections 2018: राहुल के सामने आया नया संकट और इस चुनौती से घिरे शिवराज?

Tue, 11 Dec 2018 11:05 AM IST
Updated Tue, 11 Dec 2018 11:05 AM IST
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Madhya pradesh assembly elections 2018 shivraj singh chouhan and rahul gandhi
क्या 16 मई 2014 के बाद 11 दिसबंर 2018 की तारीख भारतीय राजनीति के लिए बहुत अहम् साबित होने वाली है? - फोटो : File Photo

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क्या 16 मई 2014 के बाद 11 दिसबंर 2018 की तारीख भारतीय राजनीति के लिए बहुत अहम् साबित होने वाली है? ऐसा माना जा रहा है कि इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद देश के राजनीति की दिशा बदल सकती है और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर इसका ख़ास असर पड़ेगा। इन पांच राज्यों में राजस्थान और मध्यप्रदेश दो सबसे बड़े राज्य हैं।

राजस्थान में कांग्रेस की वापसी तय मानी जा रही है और मध्यप्रदेश को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। अगर कांग्रेस राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश जैसे राज्य को जीतने में कामयाब हो जाती है तो एक पार्टी के रूप में यह उसकी जबरदस्त वापसी होगी और इससे देश की राजनीति में लंबे समय से अपना मुकाम तलाश रहे उसके नेता राहुल गांधी आखिरकार एक राजनेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। 

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राहुल के लिए चुनौती भरा सफर
राहुल का अभी तक का सफर संघर्ष और विफलताओं से भरा रहा है। इस दौरान उनके हिस्से में जबरदस्त आलोचनाएं, मात और दुष्प्रचार ही आए हैं, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद से राहुल एक जुझारू नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं। गुजरात में उन्होंने मोदी–शाह की जोड़ी को उन्हीं की जमीन पर बराबरी की टक्कर दी थी। इसके बाद कर्नाटक में भी उन्होंने आखिरी समय पर गठबंधन की चाल चलते हुए भाजपा की इरादों पर पानी फेर दिया था। गुजरात विधानसभा चुनाव ने राहुल गांधी और उनकी पार्टी को एक नई दिशा दी है। इसे भाजपा और संघ के खिलाफ काउंटर नैरेटिव तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसने राहुल और उनकी पार्टी को मुकाबले में वापस आने में मदद जरूर की है।
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Madhya pradesh assembly elections 2018 shivraj singh chouhan and rahul gandhi
मध्यप्रदेश में कांग्रेस चुनाव हारती है तो उनकी इस कोशिश को बड़ा झटका लग सकता है - फोटो : File Photo

ऐसे में अगर वे भाजपा को उसके दूसरे सबसे बड़े गढ़ में मात देने में कामयाब हो जाते हैं तो इससे उनका कद बढ़ जायेगा और विपक्ष के नेताओं के कतार में वे सबसे आगे खड़े नजर आएंगें, इसीलिये मध्यप्रदेश का यह चुनाव राहुल गांधी के राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। 

एमपी की हार और जीत से बदलेगेी कांग्रेस की स्थिति 
अगर मध्यप्रदेश में कांग्रेस चुनाव हारती है तो उनकी इस कोशिश को बड़ा झटका लग सकता है, लेकिन अगर राहुल राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे दो राज्यों में कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने में कामयाब हो जाते हैं तो यह ना केवल उनकी पार्टी के लिये संजीवीनी साबित होगा बल्कि इससे राहुल गांधी नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष के स्वाभाविक विकल्प के रूप में भी उभर कर सामने आ जाएंगे।  इससे जनता व विपक्ष के बीच उनको लेकर विश्वास बढ़ेगा और उनके नेतृत्व पर मोहर लगेगी। ऐसा करने के लिये शायद राहुल के पास यह आखिरी मौका है इसलिये मध्यप्रदेश के चुनावी परिणाम कांग्रेस और राहुल गांधी की दिशा व स्थान तय कर सकते हैं। 

शिवराज सिंह चौहान के लिए नई चुनौती 
राहुल की तरह शिवराज के लिये भी यह चुनाव बहुत महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। वे पिछले तेरह सालों से मध्य प्रदेश की सत्ता पर काबिज हैं। इतने लंबे समय से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के बाद भी शिवराज सहज, सरल और सुलभ बने हुए हैं, यही उनकी पूंजी और सबसे बड़ी ताकत है। भाजपा के अंदरूनी राजनीति में जिन दो मॉडल की चर्चा की जाती रही हैं उसमें एक नरेंद्र मोदी का गुजरात मॉडल है तो दूसरा शिवराज का मध्यप्रदेश माडल। वर्तमान में भाजपा की अंदरूनी राजनीति में गुजरात माडल हावी है, लेकिन उसके लिये मध्यप्रदेश माडल का विकल्प भी बचा हुआ है।

शिवराज सिंह चौहान के लिए होंगी मुश्किलें
यह चुनाव शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन का सबसे मुश्किल चुनाव साबित होने जा रहा है। इसमें चाहे उनकी हार हो या जीत चुनाव के नतीजे उनके सियासी कैरियर के सबसे बड़े टर्निंग पॉइंट साबित होने वाले हैं। यह बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकता है कि अगर शिवराज भाजपा को यह चुनाव जिताने में कामयाब हो गये तो वे ही मुख्यमंत्री बनेंगे और अगर मुख्यमंत्री बन भी गये तो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद वे इस पद पर बने रहेंगें, इसको लेकर भी संदेह किए जाने के ठोस कारण हैं।  
 

Madhya pradesh assembly elections 2018 shivraj singh chouhan and rahul gandhi
2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मध्यप्रदेश में शिवराज की जरूरत पड़ेगी - फोटो : File photo

दरअसल, मध्यप्रदेश का यह चुनाव भाजपा के अंदरूनी राजनीति को भी प्रभावित करने वाला है। अगर शिवराज अपने दम पर इस चुनाव को जीतने में कामयाब होते हैं तो पार्टी में उनका कद बढ़ जायेगा। ऐसे में पहले से ही शिवराज को लेकर असहज दिखाई पड़ रहे भाजपा के मौजूदा आलाकमान की असहजता शिवराज के इस बढ़े कद से और बढ़ सकती है। भाजपा की ताकतवर जोड़ी को मजबूत क्षत्रप पसंद नहीं है और वे किसी भी उस संभावना को एक हद से आगे बढ़ने नहीं देंगें जो आगे चलकर उनके लिये चुनौती पेश कर सके। अगर लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो गठबंधन की स्थिति में शिवराज, नितिन गडकरी के साथ उन चुनिन्दा नेताओं में से होंगें जिनके नाम पर प्रधानमंत्री पद के लिये सहमति बन सकती है।

वर्तमान में शिवराजसिंह चौहान भाजपा आलाकमान के लिये मजबूरी है क्योंकि यहां शिवराज ने अपने अलावा किसी और नेता को पनपने नहीं दिया है इसलिये फिलहाल पार्टी के पास मध्यप्रदेश में शिवराज के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मध्यप्रदेश में शिवराज की जरूरत पड़ेगी लेकिन इसके बाद मध्य प्रदेश में भाजपा की तरफ से शिवराज का विकल्प पेश किया जा सकता है जिससे भाजपा के इस गढ़ पर मोदी-शाह का पूरा नियंत्रण स्थापित किया जा सके और अगर शिवराज यह चुनाव हारते हैं तो उन्हें हाशिये पर धकलने की पूरी कोशिश की जायेगी।   

बहरहाल, इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और राहुल गांधी ही ऐसे नेता हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा जोर लगाया है। इस चुनाव में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व का मध्यप्रदेश में खास फोकस रहा है जबकि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने अपने स्वभाव के विपरीत जाते हुए शिवराजसिंह के चेहरे को सामने रखते हुए ही चुनाव लड़ा है, ऐसे में इन दोनों नेताओं का भविष्य ही सबसे ज्यादा दांव पर है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.


 
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