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लॉकडाउन: मजदूर दिवस पर इंटरनेट और वेबिनार बना सहारा

Sun, 03 May 2020 07:53 PM IST
Vineet Tiwari विनीत तिवारी
Updated Sun, 03 May 2020 07:53 PM IST
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International Labour Day: How much Government be serious about labor problems
अपने हकों की खातिर जिन मजदूरों ने शहादत दी, उनकी याद में मजदूर दिवस मनाया जाता रहा है।

अमेरिका के शिकागो शहर में 1886 में अपने हकों की खातिर जिन मजदूरों ने शहादत दी, उनकी याद में मजदूर दिवस मनाया जाता रहा है। पिछले 134 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर था जब अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर कोविड-19 के चलते कहीं भी न ही रैलियां निकाली जा सकीं और ना ही सभाएं या अन्य कार्यक्रम किए जा सके।

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वरिष्ठ अर्थशास्त्री साथी डॉ. जया मेहता की प्रेरणा और पहल से इंदौर में श्रम संगठनों, जन संगठनों, कला-संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों एटक, सीटू, सन्दर्भ, प्रलेस, इप्टा, एनएफआईडब्ल्यू और रूपांकन के संयुक्त तत्वाधान में एक अनूठा और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया। एक वेबिनार, बिल्कुल वैसा ही जैसे हाॅल में किए जाने वाले कार्यक्रम होते हैं। 
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बस फर्क यह था कि इसमें जुड़ने वाले लोग एक आभासी हाॅल में इंटरनेट कनेक्शन के जरिए इकट्ठे हुए थे। इनमें मेहतकश निर्माण मजदूर थे, कारखानों में काम करने वाले, आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ता और इन मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाले श्रम संगठनों के नेतृत्वकारी साथी भी इसमें शामिल हुए थे।
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यह तैयारी थी शासन-प्रशासन द्वारा हाशिये पर फेंक दिए गए पूरे मेहनतकश तबके को, उनकी समस्याओं और उनके जीवन से जुड़े मुद्दों को फिर से उन सारे लोगों के बीच लेकर आना जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपनी दुनिया समझ लिया है। यह कोशिश थी मेहनतकश तबके को वह मंच देने की जिस पर अभी तक तकनीकी सुविधा संपन्न अभिजात्य वर्ग अपना वर्चस्व बनाए हुए है। 

'लॉकडाउन के दौरान मेहनतकश जनता' विषय पद आयोजित वेबिनार में विभिन्न क्षेत्रों के मजदूर, विभिन्न ट्रेड यूनियन के नेतृत्वकारी काॅमरेड्स, कलाकारों, लेखकों, युवाओं और तमाम जागरूक लोगों ने सक्रिय रूप से शिरकत की।

इस वेबिनार में इंदौर, पीथमपुर, घाटा बिल्लौद, सहित भारत के विभिन्न नगरों यथा सेंधवा, सागर, अशोकनगर, भोपाल, पुणे, दमोह, शिवपुरी, ग्वालियर, रायगढ़, भिलाई, रायपुर, लखनऊ, दिल्ली से और अमेरिका से भी लॉकडाउन प्रभावित श्रमिकों सहित ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों, कलाधर्मियों एवं युवा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। 

मजदूर दिवस को लेकर आयोजित शाम में प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने मई दिवस की क्रांतिकारी शुभकामनाएं दीं और सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और लॉकडाउन के चलते उत्पन्न हुई परिस्थितियों में वेबिनार तकनीक के जरिये इस लॉकडाउन के दौरान मेहनतकश जनता और विभिन्न क्षेत्रों के मजदूरों से बातचीत के कार्यक्रम के महत्त्व को रेखांकित किया। साथी विनीत तिवारी ने रोजाना निर्माण मजदूरों एवं अन्य दिहाड़ी मजदूरों के मध्य किए जा रहे सर्वे के दौरान हुई बातचीत में इन मजदूरों द्वारा व्यक्त की गई वास्तविक समस्याओं का जिक्र किया।

एटक के वरिष्ठ नेता वसंत शिंत्रे ने कार्यक्रम की शुरूआत में बताया कि यह वर्ष ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कौंसिल (एटक) का 100वां वर्ष है। एटक आजादी से पहले बनी मजदूरों की पहली यूनियन है जो तब से अब तक मजदूरों के हित और अधिकारों के लिए लड़ने वाला संगठन है। एटक के पूर्व राज्य अध्यक्ष एवं सक्रिय साथी दिवंगत काॅमरेड मोहन निमजे को समर्पित इस आयोंजन में काॅमरेड मोहन निमजे और उनके ट्रेड यूनियन मूवमेंट में लंबे योगदान को याद करते हुए काॅमरेड भारत सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।

International Labour Day: How much Government be serious about labor problems
Labour - फोटो : Amar Ujala

डॉ. जया मेहता ने मई दिवस के परिपेक्ष्य में इस कार्यक्रम की महत्ता को रेखांकित किया।  पीथमपुर ट्रेड यूनियन मूवमेंट से जुड़े एडवोकेट विजय शर्मा (धार), काॅमरेड यषवंत पैठनकर (पीथमपुर), धर्मपाल अधिकारी (पीथमपुर) और राजेष सूर्यवंषी (पीथमपुर) ने दिवंगत साथी मोहन निमजे और उनके योगदान को याद करते हुए ठेका मजदूरों की दुर्दशा और उनके वेतन को प्रबंधन द्वारा दो महीनों से रोक कर रखने और लॉकडाउन के दौरान काम करने पर मजबूर करने के लिए धमकी देने के बारे में बताया। इंदौर के नायता मुंडला क्षेत्र से निर्माण मजदूर शरीफ, पश्चिम बंगाल के प्रवासी निर्माण मजदूर मेहबुल हक, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) के प्रवासी निर्माण मजदूर गुलाबचंद के साथ निर्माण मजदूरों की यूनियन के काॅमरेड अरूण चैहान, महिला फेडरेशन की राज्य सचिव काॅमरेड सारिका श्रीवास्तव भी शामिल हुए।

औद्योगिक क्षेत्र और निर्माण क्षेत्र के मजदूरों से आगे तीसरा सत्र स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित रहा। वरिष्ठ पत्रकार सुनील बघेल ने बताया कि सफाईकर्मियों की जरूरतों का सवाल उठाया। कहा कि सफाई कर्मचारियों और नर्सिंग स्टाफ के साथ इतना उपेक्षा का रवैया अपनाकर हम कोविड-19 के विरुद्ध लड़ाई में सफल नहीं हुआ जा सकता है। 

वेबिनार में जरूरी हस्तक्षेप करते हुए संयोजक जया मेहता ने शहरी मजदूरों की स्थिति पर बल देने की बात कही। ऐसे वर्ग में इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर, बढ़ई, लुहार, मैकेनिक, टेंपो चालक आदि आते हैं, जो लॉकडाउन से उत्पन्न समस्याओं का गहरा असर भुगत रहे हैं। योजना आयोग के पूर्व सदस्य और राजनीतिक विचारक एसपी शुक्ला ने पुणे से मई दिवस की बधाई देते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान उससे उत्पन्न हुई समस्याओं ने मजदूरों को यह समझ दी है कि मौजूदा व्यवस्था में उनकी कोई प्राथमिकता नहीं है। 

इंदौर से इंटक के वरिष्ठ नेता श्री श्याम सुंदर यादव ने मई दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नंदानगर बीमा अस्पताल के कोविड-19 अस्पताल बनाए जाने से मजदूरों एवं उनके आश्रितों विशेषकर वृद्धजनों को इलाज करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सिंगरौली से एटक के राज्य उपाध्यक्ष संजय नामदेव ने लॉकडाउन के दौरान सिंगरौली जिले में विभिन्न उद्योगों में कार्यरत मजदूरों एवं ऑटोरिक्शा और साइकिलरिक्शा चालकों की बुरी स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया। सीपीआई के इंदौर जिला सचिव साथी रुद्रपाल यादव ने साथी मोहन निमजे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मई दिवस के महत्त्व को रेखांकित किया। वेबिनार में कुल 98 सदस्यों ने भागीदारी की। भारतीय महिला फेडरेशन की राज्य सचिव सारिका श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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