नेपाल का नया नक्शा और पीएम ओली के बिगड़े बोल के पीछे की सियासत

Atul sinhaअतुल सिन्हा Updated Thu, 21 May 2020 07:08 PM IST
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भारत-नेपाल रिश्तों के बीच तनाव की असली वजह आखिर क्या है?
भारत-नेपाल रिश्तों के बीच तनाव की असली वजह आखिर क्या है? - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • नेपाल में राजशाही खत्म होने और लोकतंत्र की बहाली के बाद से राजनीति अनिश्तिताओं का एक लंबा दौर चला।
  • भारत ने अपना पड़ोसी धर्म निभाने की कोशिश की है।
  • दोनों ही देशों की संस्कृति और धार्मिक मान्यताएं एक जैसी हैं।
  • भारत ने सीमा विवाद को बातचीत के जरिए हल करने को कहा है।

विस्तार

भारत-नेपाल के रिश्तों में अचानक आई तल्खी और नेपाल के प्रधानमंत्री के तीखे तेवरों के पीछे आखिर क्या वजहें है.. क्यों नेपाल के प्रधानमंत्री भारत के खिलाफ विवादास्पद और नफरत भरे बयान दे रहे हैं और क्यों चीन को लेकर उनके भीतर इतनी नरमी आई है? 
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नेपाली प्रधानमंत्री का संसद में भारत को लेकर दिया गया खतरनाक वायरस वाला बयान हो या फिर सीमा विवाद (खासकर लिपुलेख और कालापानी) पर भारत पर तंज कसने वाला उनका बयान, ये सीधे तौर पर साबित करता है कि अब ये विवाद इतनी आसानी से सुलझने वाला नहीं। खासकर तब जब नेपाल ने अपना नया राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर दिया है।
नेपाल में राजशाही खत्म होने और लोकतंत्र की बहाली के बाद से राजनीति अनिश्तिताओं का एक लंबा दौर चला। एक नए नेपाल के निर्माण के साथ ही वहां की पूरी व्यवस्था और सोच के साथ कई नीतिगत बदलाव भी हुए। बेशक नेपाल को राजशाही से मुक्ति दिलाने और वहां एक लोकतांत्रिक सरकार बनवाने में कम्युनिस्टों का बड़ा योगदान रहा।
लंबा संघर्ष चला, माओवादियों के हिंसक प्रदर्शनों से नेपाल लंबे समय तक दहलता रहा और आखिरकार पिछले कुछ वर्षों से नेपाल को पूरी तरह नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी ही चला रही है। तमाम आपसी अंतरविरोधों को भुलाकर वहां की कम्युनिस्ट पार्टियां एक हो गईं और पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ और के पी शर्मा ओली इस वक्त नेपाल की सत्ता के सर्वेसर्वा हैं।

लेकिन नेपाल की चीन से बढ़ती नजदीकी और भारत से बढ़ती दूरी के पीछे कौन सी ऐतिहासिक वजहें हैं जो बीच-बीच में भारत-नेपाल रिश्तों के बीच तनाव बढ़ाती हैं? 

दरअसल, नेपाल का वह दर्द बार बार उभरता है कि आखिर उसके पूर्वजों ने अंग्रेजों के साथ 1816 में जो सुगौली संधि की, उसके तहत उसके कई अहम हिस्से भारत में चले गए हालांकि भारत के भी मिथिला क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नेपाल के पास चला गया।

नेपाल के मूल निवासियों की नजर में मिथिला का ये हिस्सा और यहां रहने वाले लोग (मधेसी) आज भी एक सामाजिक और सांस्कृतिक अलगाववाद के शिकार हैं।

उन्हें आज भी नेपाल पूरी तरह अपना नहीं मानता, लेकिन ये समस्या अंग्रेजों के जमाने से यानी करीब दो शताब्दियों से चली आ रही है। सुगौली संधि के तहत इधर नेपाल को उत्तराखंड के कुमाऊं से लेकर सिक्किम तक के पर्वतीय क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा ब्रिटिश इंडिया के हवाले करना पड़ा।
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दोनों देशों के बीच अपने-अपने क्षेत्रों को लेकर आज भी ये दर्द बना हुआ है...

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