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जीवन में खुशियों का रंग घोलती, आपसी भाईचारे और सद्भावना का संदेश देती होली

Tue, 10 Mar 2020 09:53 AM IST
Devanand Kumar देवानंद कुमार
Updated Tue, 10 Mar 2020 09:53 AM IST
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Holi 2020: a message of happiness in life, love and brotherhood
होली हमारे जीवन को रंगीन बनाती है, उसे फिर से खुशियों से सराबोर करती है और खुलकर जीने का एहसास दिलाती है।

होली शब्द अपने आप में हर्ष और उल्लास का प्रतीक है। कहते हैं भारत में लोग दो त्योहारों में घर आना नहीं भूलते। उनमें से एक है होली तो दूसरी दीपावली। होली हमारे जीवन को रंगीन बनाती है, उसे फिर से खुशियों से सराबोर करती है और खुलकर जीने का एहसास दिलाती है। अगर हम ध्यान से देखें तो हमारे देश का हर त्यौहार, व्रत, परंपरा और मान्यताएं एक खास संदेश लिए हुए हैं। 

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आज कोरोना वायरस से बचने के लिए भी लोग भारतीय संस्कृति के नमस्कार को अपने आदत में ला रहे हैं। वैसे ही होली भी हमें आपसी भाईचारे और सद्भावना का संदेश देती है, तो वही होलिका दहन हमें अपनी बुराइयों का नाश कर जीवन में पुनः खुशियों के रंग भरने की बात कहती है। होली ऐसे समय पर आती है, जब ऋतु का राजा वसंत अपने पूरे उफान पर होता है। हर और नए फल-फूल वृक्ष लताओं से रंगोत्सव को स्वागत करने को आतुर होते हैं। इस मौसम में हम देखते हैं कि पेड़-पौधे अपने पुराने पत्ते गिराना शुरू कर देते हैं। मानो विमुख भाषा में मानव से कहना चाहती हो कि हे मानव तू भी अपनी पुरानी चिंता की गठरी को खुद से अलग कर अपने कुरीतियों को होलिका में नाश कर अपने जीवन में सकारात्मक रंगों के सहारे जीवन को सतरंगी बना।
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वैसे तो हर हर होली हर बार हम सबके लिए खास होती है, क्योंकि वह हमें अनगिनत हर्ष, उल्लास, प्रेम, आशीर्वाद और हुल्लड़ की यादें दे जाती है, पर इस बार की होली पर एक अद्भुत संयोग बन रहा है, जो इस होली को और विशेषता था खास महत्व वाला बनाता है। ज्योतिषियों के अनुसार इस होली पर 499 साल बाद पुनः एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब गुरु बृहस्पति और शनि अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। 
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ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, संतान, गुरु, धन-संपत्ति का प्रतिनिधि माना जाता है तो वहीं शनि को न्याय का देवता कहते हैं। इस बार देव गुरु बृहस्पति धनु राशि में और शनि मकर राशि में रहेंगे। भारतीय वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार ऐसा संयोग 3 मार्च 1521 को बना था। उसके 499 वर्ष बाद इस होली पर बन रहा है। विज्ञान के अनुसार बृहस्पति हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह शनि, अरुण, वरुण की तरह ही एक गैसीय ग्रह के रूप में जाना जाता है। इस ग्रह की त्रिज्या हमारी पृथ्वी ग्रह से 11 गुना बड़ी है। दुनिया की हर सभ्यता में बृहस्पति का उच्च स्थान है। 

अगर हम रोमन सभ्यता की बात करें तो वहां इसे जुपिटर कहा गया है, जिसका अर्थ है- पिता, आकाश के देवता। चीन,वियतनाम,कोरिया और जापानी संस्कृतियों में इसे वुडस्टार कहा गया है, तो वहीं जर्मन की पौराणिक कथाओं में थॉर कहा गया। इसी थॉर शब्द से अंग्रेजी में थर्सडे बना। शनि ग्रह बृहस्पति के बाद सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है, जो कि पृथ्वी से नौ गुना बड़ा है। इस प्रकार ज्योतिष ज्ञान और आधुनिक विज्ञान भी इन दो ग्रहों की महत्ता पर बेहद बल देते हैं। होली जैसे बड़े पर्व पर इन दो ग्रहों की शुभ स्थिति किसी शुभ योग से कम नहीं है।
 

Holi 2020: a message of happiness in life, love and brotherhood
होली हमें नकारात्मकता को छोड़ सकारात्मकता को अपनाते हुए उसके संग उत्सव मनाने का संदेश देती है।

होली सुरता पर देवत्व के विजय का पर्व है। यह हमें बारंबार नकारात्मकता को छोड़ सकारात्मकता को अपनाते हुए उसके संग उत्सव मनाने का संदेश देती है। भारत इतना बड़ा देश है कि यहां हर चीज में विविधता है। खाने-पीने से लेकर पहनने-ओढ़ने तक में यह विविधता साफ झलकती है। इस विविधता में भी हर त्यौहार में खास संदेश लिया रहता है, वह देश के हर कोने में स्पष्ट नजर आता है। 

बात करें होली की तो यह देश के हर हिस्से में अलग-अलग ढंग से मनाई जाती है। चाहे बृज के बरसाने वाली लट्ठमार होली तो विश्वप्रसिद्ध है। वहीं हरियाणा की धुलंडी, जहां भाभी द्वारा देवर को सताए चिढ़ाए जाने की प्रथा है। बंगाल में यह दोल यात्रा के रूप में मनाई जाती है, जो कि होली के एक दिन पूर्व से प्रारंभ होता है और महिलाएं पारंपरिक सफेद साड़ी पहनकर राधा कृष्ण की पूजा करती हैं। महाराष्ट्र में यह रंग पंचमी के नाम से जाना जाता है, तो पंजाब में मोहल्ला से पूरा बल्ले-बल्ले करता नजर आता है तो बिहार पहुंचकर पूरे विश्व को फगुआ के फगुनाहट से सराबोर कर देती है।

इस तरह होली के दिन पूरा भारत खुशियों के रंगों में सराबोर होने वाला है। एक दूसरे को गुलाल लगाकर मन का गुबार हटाते हुए समाज में भाईचारा कायम करने वाला है। आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ कहना चाहूंगा कि "राधा के रंग और कन्हैया की पिचकारी, प्यार के रंग से रंग दो दुनिया सारी, रंग न जाने कोई मजहब न कोई बोली, मुबारक हो आपको खुशियों भरी होली। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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