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शोषितों के असाधारण हितैषी
Updated Thu, 11 Oct 2018 05:47 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
हाल ही में, एक मित्र के बुलावे पर एक शिक्षा सेमिनार में जाने का अवसर मिला। चूंकि सेमिनार होटल रॉयल प्लाजा दिल्ली में था तो लगा कि बड़े और धनी लोग होंगे और शिक्षा के वर्तमान पहलुओं पर चर्चा से कुछ जानने और सीखने को मिलेगा लेकिन वहां पहुंचकर नज़ारा कुछ और ही दिखा, एक भव्य सभागार में गरीब और सामान्य दिख रहे लगभग सत्तर युवक और युवतियां मौजूद थे। पूछने पर पता चला कि वे सभी सफाई मजदूरों तथा सीवर मे मारे गए दिहाड़ी मजदूरों के बच्चे हैं। एक सज्जन हिंदी और अंग्रेजी, मिली जुली भाषा में मंच से युवाओं से शिक्षा पर संवाद कर रहे थे वे बारी-बारी शिक्षा मे आने वाली समस्याओं के बारे पूछ रहे थे और उनके सहयोगी बड़ी सावधानी से इसे कागज पर नोट भी कर रहे थे ।
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चाय अवकाश के बाद पुन: वही सज्जन युवाओं से फिर मुखातिब होते हुए कहते हैं कि “शिक्षा केवल ज्ञानार्जन मात्र नहीं है बल्कि चुनौतियों का सामना करने, एक दूसरे की मदद करने और व्यक्ति को आत्म विश्वासी बनाने का सशक्त माध्यम है। शिक्षा ही, गरीबी, असमानता, भेदभाव और बहुत सी सामाजिक समस्याओं को हल करने का एकमात्र रास्ता है। शिक्षा वो यंत्र है, जिससे हम सामाजिक भेदों को समाप्त कर सकते हैं। और हम एक साथ आगे बढ़ने में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा सामाजिक, व्यक्तिगत और पारिवारिक समस्याओं को सुलझाने का भी एक सक्षम यंत्र है। यह उस दवा की तरह है, जो लगभग सभी रोगों का इलाज करने की क्षमता रखती है। शिक्षा प्राप्त करने का मतलब केवल इतना नहीं है कि, हमें नौकरी मिल जाये, शिक्षा हमें बौद्धिक स्वतंत्रता प्रदान करती है और राष्ट्र निर्माण में सहयोगी बनाती है। वे अपने वक्तव्य मे, बार-बार डा. आंबेडकर के संघर्ष का जिक्र करना नही भूलते।
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बातचीत के बाद पता चला कि ये 2006 बैच, केरल कैडर के एक नौकरशाह अजीत कुमार हैं मूल रूप से उत्तर प्रदेश से है और भारत के पीड़ित और शोषित तबकों के असाधारण हितैषी हैं। शोषित-उत्पीड़ित तबकों के हितैषी के तौर पर काम उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन से ही शुरू कर दिया था। आईएएस बनने के बाद भी वे अपने काम को जारी रखे हुए हैं तथा निरंतर वंचितों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। वे गहरी संवेदनात्मकता और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ सफाई पेशा समुदाय के सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान तथा सशक्तीकरण के लिए बड़ी सिद्दत से लगे हुए हैं। अजीत कुमार उन चंद नौकरशाह मे शामिल हैं जिन्हौने स्वयं को वंचित समाज के हितों के लिए समर्पित कर दिया है। वे दिल्ली से लेकर मुंबई तक कई “मौहल्ला ट्यूशन केंद्रों” के माध्यम से वंचित तबकों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। और इसकी मॉनिटरिंग भी स्वयं करते हैं।
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हम जानते हैं कि कुछ लोग जन्मजात जुनूनी होते हैं, कुछ लोग इसे जीवन के शुरूआती दिनों में हासिल करते हैं और उसके बाद यह जुनून उनका भावावेग बन जाता है और यह उनके पूरे जीवन को संचालित करता है। मकसद और मकसद लिए संघर्ष करने वाला योद्धा अक्सर इस तरह एकरूप हो जाते हैं, उन्हें अलग करना नामुमकिन होता है। मकसद की सफलताएं और असफलताएं दोनों योद्धा के जीवन के मील के पत्थर बन जाते हैं। ऐसे ही एक योद्धा नौकरशाह अजीत कुमार हैं। जो शिक्षा को अनिवार्य उपकरण मानते हुए सफाई पेशा समुदाय के युवाओं को शिक्षा के माध्यम से नई दिशा देने के लिए कृत संकल्प दिखते हैं। और अपना आदर्श बाबा साहब डा. बी आर आंबेडकर को मानते हैं।
अजीत कुमार अपने युवा सहयोगियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से घनिष्ठता से जुड़े हैं। अनुसूचित जातियों और जनजातियों विशेषकर सफाई पेशा समुदाय के लिए शैक्षणिक तौर पर समग्र प्रगति के लिए आवश्यक रोडमैप की तैयारी मे लगे हैं। और व्यग्रता के साथ युवाओं को इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। श्री अजीत कुमार सामाजिक न्याय के जीते-जागते दस्तावेज हैं। उन्हौने अपने मिशन को 'शिक्षा ही मेरी पहचान' नाम दिया है उनका यह काम सामाजिक न्याय मे मील का एक पत्थर साबित होगा । आज अजीत कुमार जैसे वंचतों के रहनुमाओं की देश और समाज को दरकार है।